मैसेजिंग ऐप्स पर सख्ती: अब बिना एक्टिव SIM नहीं चलेगा WhatsApp-टेलीग्राम, 90 दिनों में लागू होंगे DoT के नए नियम
मैसेजिंग ऐप्स पर सख्ती: अब बिना एक्टिव SIM नहीं चलेगा WhatsApp-टेलीग्राम, 90 दिनों में लागू होंगे DoT के नए नियम
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मैसेजिंग ऐप्स के लिए ऐतिहासिक नियम बनाए हैं, जिसके तहत WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat, ShareChat, JioChat, Arattai और Josh जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अब बिना एक्टिव SIM कार्ड के ऐक्सेस ब्लॉक हो जाएगा। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 28 नवंबर 2025 को जारी आदेश में इन ऐप्स को टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स की तरह रेगुलेट करने का फैसला किया है। यह Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025 का हिस्सा है, जो ऐप-बेस्ड कम्युनिकेशन को पहली बार टेलीकॉम-स्टाइल रेगुलेशन के दायरे में लाता है। नियम 90 दिनों के अंदर लागू होंगे, यानी फरवरी 2025 तक यूजर्स को अपना अकाउंट एक्टिव SIM से बाइंड करना होगा।
पहले यह SIM-बाइंडिंग केवल बैंकिंग, UPI और फाइनेंशियल ऐप्स तक सीमित थी, जहां इनएक्टिव SIM पर लॉगिन ब्लॉक हो जाता था। अब मैसेजिंग ऐप्स को भी इसी तरह रियल-टाइम वेरिफिकेशन करना होगा। DoT के AI और डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट ने इन कंपनियों को लेटर भेजा है, जिसमें कहा गया है कि यूजर का अकाउंट उसी SIM और मोबाइल नंबर से कंटिन्यूअसली लिंक्ड रहे, जिससे रजिस्ट्रेशन हुआ था। अगर SIM इनएक्टिव हो गया या डिवाइस चेंज हो गया, तो ऐप एक्सेस बंद हो जाएगा। WhatsApp के वेब वर्जन पर हर 6 घंटे में लॉगआउट भी अनिवार्य होगा।
सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करेगा। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने समर्थन किया है, कहा कि इससे यूजर, नंबर और डिवाइस के बीच रिलायबल लिंक बनेगा, जो स्पैम, फाइनेंशियल फ्रॉड, स्कैम कॉल्स और फेक अकाउंट्स को रोकेगा। DoT ने इन ऐप्स को ‘Telecommunication Identifier User Entity (TIUE)’ कैटेगरी में रखा है, जिससे वे टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के दायरे में आ जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डेटा प्राइवेसी और नेशनल सिक्योरिटी बढ़ेगी, लेकिन यूजर एक्सपीरियंस प्रभावित हो सकती है।
नए नियमों का यूजर्स पर असर: क्या बदलाव आएंगे?
SIM वेरिफिकेशन: रजिस्ट्रेशन के बाद हर सेशन में एक्टिव SIM चेक होगा। अगर SIM बंद या चेंज हो गया, तो ऐप लॉगआउट हो जाएगा।
डिवाइस बाइंडिंग: मल्टी-डिवाइस सपोर्ट सीमित हो सकता है; वेब/डेस्कटॉप यूज पर टाइम-बाउंड लॉगिन।
प्राइवेसी चिंताएं: यूजर्स को डेटा शेयरिंग पर सहमति देनी पड़ेगी, जो WhatsApp जैसी कंपनियों के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को चुनौती दे सकता है।
ट्रांजिशन पीरियड: 90 दिनों में कंपनियां अपडेट करेंगी, उसके बाद नॉन-कंप्लायंस पर सर्विस सस्पेंड।
विश्लेषकों का अनुमान है कि इससे WhatsApp (भारत में 50 करोड़+ यूजर्स) और Telegram जैसे ऐप्स के एक्टिव यूजर्स में गिरावट आ सकती है, खासकर वे जो Wi-Fi पर Wi-Fi only डिवाइस यूज करते हैं। Meta (WhatsApp की पैरेंट कंपनी) और Telegram ने अभी कोई ऑफिशियल रिएक्शन नहीं दिया, लेकिन इंडस्ट्री सोर्सेज कहते हैं कि वे TRAI से बातचीत करेंगे। यह नियम डिजिटल इंडिया को सिक्योर बनाने का प्रयास है, लेकिन प्राइवेसी एडवोकेट्स ने इसे ‘सरकारी सर्विलांस’ बताया है। यूजर्स से अपील: अपना SIM एक्टिव रखें और ऐप अपडेट्स चेक करें।
