राजनीति

बिहार हार के बाद महागठबंधन में भूचाल: RJD-कांग्रेस की राहें होंगी अलग?

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन (MGB) की करारी हार ने विपक्षी खेमे में भूचाल ला दिया है। 14 नवंबर को घोषित नतीजों में NDA ने 202 सीटें हासिल कर नीतीश कुमार को दसवीं बार मुख्यमंत्री बनाने का रास्ता साफ किया, जबकि RJD-कांग्रेस गठबंधन को महज 35 सीटें मिलीं। RJD को 25, कांग्रेस को 6 और अन्य सहयोगियों को बाकी। इस हार के बाद RJD और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप की बौछार हो रही है, जिससे गठबंधन टूटने की अटकलें तेज हो गई हैं। RJD प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने शनिवार को कहा, “अगर कांग्रेस बिहार में अलग राह चुनना चाहती है, तो चुन ले। वे अपनी असली ताकत जान जाएंगे।” क्या यह तकरार गठबंधन के अंत का संकेत है?

चुनावी हार के तुरंत बाद दोनों दलों ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी ठोकी। 28 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की समीक्षा बैठक में RJD पर सीट बंटवारे और अभियान की कमजोरी का आरोप लगा। कांग्रेस ने कहा कि RJD ने मजबूत सीटें नहीं छोड़ीं, जिससे वोट ट्रांसफर प्रभावित हुआ। जवाब में RJD ने कांग्रेस को “कमजोर कड़ी” करार दिया। मंडल ने कहा, “कांग्रेस का बिहार में कोई आधार नहीं, फिर भी गठबंधन में रखते हैं। RJD का वोट बैंक ही सहयोगियों को फायदा पहुंचाता है।” कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने पलटवार किया, “अगर कांग्रेस इतनी कमजोर है, तो RJD हमें क्यों रखती है? मंडल को तेजस्वी यादव से बात करनी चाहिए, मीडिया में नहीं।”

एक रिपोर्ट के अनुसार, यह तकरार 2025 चुनाव के दौरान ही सुलग रही थी। कांग्रेस ने 61 सीटों पर लड़ाई लड़ी, लेकिन सिर्फ 6 जीतीं—यह बिहार में उसका दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन है। RJD ने 141 सीटों पर 25 हासिल कीं, लेकिन वोट शेयर में BJP से आगे रही। हार के पांच मुख्य कारण: NDA का मजबूत कैंपेन (लालू राज की याद दिलाना), तेजस्वी का देर से मैदान में उतरना, आंतरिक कलह, कांग्रेस की कमजोर मशीनरी और वोट ट्रांसफर की नाकामी। तेजस्वी यादव ने शनिवार शाम विधायकों की बैठक बुलाई, जहां विपक्षी रणनीति पर चर्चा हुई।

कांग्रेस हाईकमान ने 27 नवंबर को दिल्ली में बैठक की, जहां बिहार प्रदर्शन की समीक्षा हुई। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा, “कमियां हाईकमान को बताई गईं। RJD से अलग होने का फैसला केंद्र स्तर पर होगा।” तारिक अनवर ने कहा, “यह समीक्षा बैठक थी, कोई फैसला नहीं।” लेकिन सोर्सेज बताते हैं कि हाईकमान RJD पर नाराज है, और 2028 चुनावों के लिए नई रणनीति पर विचार हो रहा है। BJP नेता शाहनवाज हुसैन ने तंज कसा, “वे चुनाव से पहले लड़ते थे, अब भी लड़ रहे। उनका गठबंधन राजनीतिक फायदा के लिए है, विचारधारा के लिए नहीं।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह तकरार गठबंधन के अंत का इशारा कर रही है। प्रो. राजीव रंजन ने कहा, “RJD अपना PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूला मजबूत करना चाहती है, जबकि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर INDIA ब्लॉक को बचाना चाहेगी। बिहार में अलग राहें संभव।” अगर टूटा, तो RJD अकेले या नए सहयोगियों (जैसे प्राशांत किशोर की जन सुराज) के साथ चलेगी, जबकि कांग्रेस बिहार में और कमजोर हो सकती है। तेजस्वी ने कहा, “उतार-चढ़ाव तो होते हैं, लेकिन RJD गरीबों की पार्टी है।”

विशेषज्ञों ने कहा कि यह विवाद 2027 के पहले ही विपक्ष को कमजोर कर रहा है। क्या हाईकमान गठबंधन बचा पाएगा? आने वाले दिनों में बैठकें तय करेंगी। फिलहाल, बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर का संकेत मिल रहा है।

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