बदलाव का दौर: गंभीर पर मनोज तिवारी का तीखा प्रहार, बीसीसीआई से मांगा कोच बदलाव
बदलाव का दौर: गंभीर पर मनोज तिवारी का तीखा प्रहार, बीसीसीआई से मांगा कोच बदलाव
भारतीय क्रिकेट टीम की लगातार खराब फॉर्म ने सवालों का सैलाब ला दिया है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में 0-2 से शर्मनाक हार के बाद पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने हेड कोच गौतम गंभीर पर सीधा निशाना साधा है। “बदलाव का समय आ चुका है,” तिवारी ने कहा, बीसीसीआई से कोचिंग स्टाफ में बड़े बदलाव की मांग की। तिवारी का यह बयान गंभीर के ‘ट्रांजिशन फेज’ वाले तर्क को खारिज करता नजर आता है, जो टीम की हार के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोहराया गया था।
तिवारी ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, “यह ट्रांजिशन फेज की बात बकवास है। भारत को ट्रांजिशन की जरूरत ही नहीं। न्यूजीलैंड या जिम्बाब्वे को चाहिए। हमारा डोमेस्टिक क्रिकेट टैलेंट से भरा पड़ा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे सीनियर्स को जबरन रिटायर कराया गया। “रोहित और विराट टेस्ट क्रिकेट की पवित्रता बचाने के लिए खेलना चाहते थे, लेकिन मैनेजमेंट ने माहौल ऐसा बनाया कि वे पीछे हट गए।” तिवारी ने गंभीर की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी तंज कसा, जहां कोच ने बैटर्स की डिफेंसिव स्किल्स पर सवाल उठाए। “अगर बैटर्स में डिफेंस की कमी है, तो मैच से पहले ट्रेनिंग क्यों नहीं? गंभीर खुद स्पिन के अच्छे प्लेयर थे, उन्हें सिखाना चाहिए था।”
यह विवाद गुवाहाटी टेस्ट की हार से भड़का, जहां भारत को 408 रनों का लक्ष्य मिला और टीम 30 रनों से हार गई। गंभीर के कोचिंग काल में भारत ने घरेलू टेस्ट में 7 में से 5 हारे हैं—न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ। पूर्व कोच अनिल कुंबले ने भी गंभीर की रणनीति पर सवाल उठाए: “ऑलराउंडर्स पर ज्यादा जोर और बार-बार बदलाव से टीम अस्थिर हो गई। विराट, अश्विन, पुजारा, रोहित जैसे दिग्गजों की जगह भरने का कोई प्लान नहीं दिखा।”
विराट कोहली के भाई विकास कोहली ने भी सोशल मीडिया पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा। थ्रेड्स पर पोस्ट में उन्होंने लिखा, “एक समय था जब हम विदेश में जीत के लिए खेलते थे, अब भारत में भी मैच बचाने की कोशिश करते हैं। यही होता है जब बिना वजह बॉस बनने की कोशिश करते हो और टूटी चीजें बदलते हो।” फैंस इसे गंभीर पर तंज मान रहे हैं, खासकर कोहली के मई 2025 में टेस्ट रिटायरमेंट के बाद।
गंभीर ने बचाव में कहा, “हम गैलरी के लिए नहीं, टीम के लिए खेलते हैं। ऑलराउंडर्स से बैलेंस बनता है।” लेकिन आलोचना बढ़ रही है। दिनेश कार्तिक ने कहा, “रवि शास्त्री-विराट दौर में ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड भारत से डरते थे, अब कोई नहीं डरता। बड़े फैसले लेने होंगे।”
यह विवाद टीम की ODI सीरीज (30 नवंबर से रांची में) से पहले आया, जहां रोहित-कोहली की वापसी से टिकटों की भारी मांग है। बीसीसीआई पर दबाव बढ़ रहा है—क्या गंभीर का दौर समाप्त होगा? क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट को बचाने के लिए रणनीतिक बदलाव जरूरी हैं, वरना WTC फाइनल का सपना दूर हो जाएगा। उम्मीद है कि यह संकट टीम को मजबूत बनाएगा।
