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राम मंदिर ध्वजारोहण: मोहन भागवत ने कहा, ‘बलिदानियों की आत्मा तृप्त हुई, मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूरी’

राम मंदिर ध्वजारोहण: मोहन भागवत ने कहा, ‘बलिदानियों की आत्मा तृप्त हुई, मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूरी’

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा धर्मध्वज फहराने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भावुक संबोधन दिया। अभिजीत मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ध्वजारोहण के बाद मंदिर परिसर में हजारों भक्तों को संबोधित करते हुए भागवत ने इसे सनातन संस्कृति की सार्थकता का दिवस बताया। उन्होंने बलिदानियों को याद करते हुए कहा कि आज उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी।

मोहन भागवत के प्रमुख बयान:

सार्थकता का दिवस: “आज हम सबके लिए सार्थकता का दिवस है। ध्वजारोहण हो जाने के बाद आज मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूरी हो गई है।” उन्होंने इसे करोड़ों रामभक्तों की आस्था का साकार रूप बताया।

बलिदानियों को श्रद्धांजलि: “इस दिन के लिए कितने राम भक्तों ने अपने प्राण अर्पण किए। महंत रामचंद्र दास जी महाराज, डालमिया जी और उन लोगों ने प्राणार्पण किया और अपना पसीना बहाया। आज उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी।” भागवत ने 500 वर्षों के संघर्ष में जान गंवाने वालों को नमन किया।

धर्मध्वज का महत्व: “यह पूरा ध्वज सूर्य भगवान का प्रतीक है। ध्वज पर अंकित कोविदार वृक्ष व भगवान सूर्य के बारे में विस्तार से बताया। यह ध्वज व्यक्ति से लेकर संपूर्ण सृष्टि तक ‘जीवन’ का प्रतीक है। धर्मध्वज की तरह सनातन की ध्वजा को भी शिखर तक लेकर जाना है।” उन्होंने इसे धर्म, धर्मध्वज की अनिवार्यता और राम के आदर्शों का प्रतीक बताया।

मंदिर की भव्यता: “जैसा सपना देखा था, उससे भी शुभकर मंदिर बन गया है।” भागवत ने मंदिर को राष्ट्र की आस्था और एकता का केंद्र बताते हुए युवाओं से अपील की कि वे राम के मूल्यों—सत्य, करुणा और न्याय—को जीवन में उतारें।

भागवत का संबोधन लगभग 10 मिनट चला, जिसमें उन्होंने रामराज्य की कल्पना साकार करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में पीएम मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

वैदिक मंत्रोच्चार और ‘जय श्री राम’ के उद्घोषों के बीच यह क्षण लाइव प्रसारण से करोड़ों लोगों तक पहुंचा। सोशल मीडिया पर फैंस इसे ‘आत्मिक विजय’ बता रहे हैं। यह ध्वजारोहण प्राण प्रतिष्ठा के 673 दिनों बाद मंदिर की पूर्णता का प्रतीक बन गया।

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