राम मंदिर के शिखर पर लहराया धर्मध्वज: PM मोदी-भागवत ने किया ध्वजारोहण, अयोध्या में भक्ति का सैलाब
राम मंदिर के शिखर पर लहराया धर्मध्वज: PM मोदी-भागवत ने किया ध्वजारोहण, अयोध्या में भक्ति का सैलाब
विवाह पंचमी के पावन अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के 161 फीट ऊंचे मुख्य शिखर पर भगवा धर्मध्वज लहराने लगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण किया, जो मंदिर निर्माण की पूर्णता का प्रतीक बन गया। इस ऐतिहासिक क्षण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल समेत हजारों गणमान्य व्यक्ति और भक्त मौजूद रहे।
सुबह अयोध्या एयरपोर्ट पर पहुंचे पीएम मोदी का सीएम योगी ने स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने 1.5 किलोमीटर लंबा रोडशो किया, जिसमें भक्तों ने ‘जय श्री राम’ के नारों से अयोध्या को गुंजायमान कर दिया। रोडशो के बाद पीएम मोदी ने राम जन्मभूमि परिसर में सप्तऋषि मंदिर (महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र आदि के मंदिरों का समूह) में पूजा-अर्चना की। फिर शेषावतार मंदिर, माता अन्नपूर्णा मंदिर और राम दरबार गर्भगृह में दर्शन किए। ठीक 11:55 बजे शुरू हुए वैदिक अनुष्ठान में गणपति पूजन, पंचांग पूजन, षोडश मातृका पूजन और नवग्रह पूजन के बाद मंत्रोच्चार व शंखनाद के बीच ध्वजारोहण संपन्न हुआ।
36×54 फीट का यह भगवा ध्वज खादी से बना है, जिस पर ‘जय श्री राम’ और ‘राम राज्य’ अंकित है। 108 फीट ऊंचे स्वर्ण कलश युक्त ध्वजदंड पर फहराया गया यह ध्वज त्याग, धर्मनिष्ठा और सनातन संस्कृति का प्रतीक है। पीएम मोदी ने कहा, “यह धर्म ध्वज दूर से भी राम मंदिर के दर्शन करवाएगा। भारत के कण-कण में राम है, मैकाले वाली मानसिकता से मुक्ति जरूरी। सदियों के घाव भर रहे हैं।” सीएम योगी ने इसे “नए युग का प्रारंभ” बताते हुए कहा, “यह भारतीयों की आस्था-आत्मसम्मान का प्रतीक है। रामराज्य की स्थापना हो रही है।”
कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, सचिन तेंदुलकर समेत 10,000 से अधिक अतिथि शामिल हुए। 3,000 लोगों के ठहरने के लिए टेंट सिटी बनाई गई थी। कड़ी सुरक्षा के बीच आम दर्शन 26 नवंबर से सामान्य होंगे। 40 प्राइवेट जेट्स से गेस्ट्स पहुंचे। लाइव टेलीकास्ट ने करोड़ों रामभक्तों को जोड़ा। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा, “यह 500 वर्षों की तपस्या का फल है।”
यह ध्वजारोहण न केवल धार्मिक, बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया। दुनिया भर से रामभक्त इसे ‘धर्म की विजय’ के रूप में देख रहे हैं।
