हुमायूं कबीर कौन हैं? बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ निर्माण के ऐलान से सियासी तूफान
हुमायूं कबीर कौन हैं? बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ निर्माण के ऐलान से सियासी तूफान
पश्चिम बंगाल के तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण की आधारशिला रखने का ऐलान कर राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। यह तारीख 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं वर्षगांठ है, जिससे विवाद और तेज हो गया। कबीर का यह बयान 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले आया है, जहां TMC मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। भाजपा और हिंदू संगठनों ने इसे ‘तुष्टिकरण’ और ‘सांप्रदायिक उकसावा’ करार दिया है, जबकि कुछ मुस्लिम नेताओं ने भी इसका विरोध किया।
हुमायूं कबीर का प्रोफाइल: TMC का विवादास्पद चेहरा
हुमायूं कबीर (उम्र: 53 वर्ष) पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से TMC के विधायक हैं। वे मुस्लिम बहुल क्षेत्र से आते हैं, जहां मुस्लिम आबादी लगभग 75% है। कबीर TMC के वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी की मुस्लिम विंग से जुड़े हुए। वे पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं, लेकिन 2021 में TMC सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं।
राजनीतिक सफर: कबीर 2011 से भरतपुर से विधायक हैं। वे TMC के ‘बागी’ छवि के धनी हैं और अक्सर विवादित बयानों से सुर्खियां बटोरते हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार को 50,000 से ज्यादा वोटों से हराया। कबीर ममता बनर्जी के करीबी माने जाते हैं और पार्टी की अल्पसंख्यक राजनीति का चेहरा हैं।
विवाद: कबीर पहले भी CAA-NRC विरोधी रैलियों में सक्रिय रहे। वे ‘इस्लामिक जागरूकता’ पर जोर देते हैं और मुस्लिम युवाओं को संगठित करने के लिए जाने जाते हैं। X (पूर्व ट्विटर) पर उनके फॉलोअर्स 2 लाख से ज्यादा हैं, जहां वे TMC की नीतियों का प्रचार करते हैं।
कबीर ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा, “हम 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखेंगे। यह मस्जिद 3 साल में बनकर तैयार हो जाएगी। इसमें 2 लाख लोग और 400 प्रमुख मुस्लिम नेता शामिल होंगे। हम हर साल 6 दिसंबर को काला दिवस मनाते हैं, और यह मस्जिद मुसलमानों की भावनाओं का प्रतीक होगी।” यह ऐलान 25 नवंबर को अयोध्या राम मंदिर के शिखरारोहण से ठीक पहले आया, जिसे भाजपा ‘प्रत्यक्ष चुनौती’ बता रही है।
उमा भारती की चुनौती: ‘वही हाल होगा जो अयोध्या में हुआ’
राम मंदिर आंदोलन की प्रमुख नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कबीर के बयान पर तीखा पलटवार किया। X पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, “खुदा, इबादत, इस्लाम के नाम पर मस्जिद बने हम सम्मान करेंगे, लेकिन बाबर के नाम से बनी इमारत का वही हाल होगा जो 6 दिसंबर को अयोध्या में हुआ था – ईंटें भी गायब हो गई थीं।” उमा ने ममता बनर्जी को टैग करते हुए सलाह दी, “ममता जी, बाबर के नाम पर मस्जिद बनाने की बात करने वालों पर कार्रवाई कीजिए। बंगाल और देश की अस्मिता के लिए आपकी जिम्मेदारी है।”
उमा का यह बयान राम मंदिर आंदोलन की याद दिलाता है, जहां वे 1992 में कारसेवकों के साथ थीं। भाजपा इसे TMC की ‘वोटबैंक राजनीति’ के खिलाफ हथियार बना रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: TMC vs BJP का ध्रुवीकरण
कबीर के ऐलान से बंगाल की सियासत गरम हो गई। यहां मुख्य प्रतिक्रियाएं:
TMC
पार्टी ने इसे ‘धार्मिक स्वतंत्रता’ बताया। किरणमय नंदा ने कहा, “भाजपा बाबरी को तोड़कर परंपरा खत्म करना चाहती है, लेकिन ममता की सरकार बनी रहेगी।”
BJP
गौरव भाटिया: “राम मंदिर के उत्सव के बीच TMC बाबरी का ऐलान कर रही है – ममता का दोहरा चरित्र।” केशव प्रसाद मौर्य: “बाबर के नाम पर एक ईंट नहीं रखने देंगे। 2026 में जनता उखाड़ फेंकेगी।” दिलीप घोष: “बाबर हमलावर था, देश उसका सम्मान नहीं करेगा।” भाजपा ने बरहामपुर में राम मंदिर निर्माण का ऐलान किया।
अन्य
– विश्व हिंदू परिषद: 1 करोड़ इनाम घोषित, ‘मौत की धमकी’।
– कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई: “मस्जिद बनाओ, लेकिन ‘बाबरी’ नाम क्यों? मेरा संबंध शिवाजी से है, बाबर से नहीं।”
– अयोध्या संत: “भारत में बाबर के नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनेगी।” – यूपी विधायक नंदकिशोर गुर्जर: “TMC अंतिम सांसें गिन रही है।”
X पर बहस: वायरल पोस्ट्स और तनाव
X पर #BabriMasjidBengal और #TMCExposed ट्रेंड कर रहा है। BJP के गौरव भाटिया का पोस्ट (81 लाइक्स) वायरल है, जहां उन्होंने ममता को निशाना बनाया। हिंदू यूजर्स ‘जय श्री राम’ के साथ विरोध जता रहे हैं, जबकि कुछ मुस्लिम यूजर्स ने कबीर को ‘भावनाओं का अपमान’ बताया। एक पोस्ट में कहा गया, “हुमायूं जी, बाबर से प्यार में मुसलमानों का सुकून खत्म न करें।”
संभावित प्रभाव: चुनावी ध्रुवीकरण और तनाव
यह ऐलान मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में TMC को फायदा पहुंचा सकता है, लेकिन पूरे बंगाल में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा रहा है। भाजपा इसे CAA-NRC के खिलाफ प्रचार में इस्तेमाल करेगी। चुनाव आयोग ने अभी चुप्पी साधी है, लेकिन संतों की धमकियां तनाव बढ़ा सकती हैं। कबीर का यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ नहीं, बल्कि ‘वोट इन इंडिया’ की रणनीति लगता है। अधिक अपडेट्स के लिए आधिकारिक स्रोत फॉलो करें।
