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भारतीय सेना की ‘शेर’ राइफल: पहला टैक्टिकल वीडियो जारी, आत्मनिर्भर भारत की नई ताकत

भारतीय सेना की ‘शेर’ राइफल: पहला टैक्टिकल वीडियो जारी, आत्मनिर्भर भारत की नई ताकत

भारतीय सेना ने 23 नवंबर 2025 को अपनी नई असॉल्ट राइफल ‘शेर’ (AK-203) का पहला टैक्टिकल वीडियो जारी किया है। यह 24 सेकंड का वीडियो, जिसका टाइटल “Shadows and Steel” है, राइफल की घातक क्षमता, सटीकता और स्वदेशी निर्माण को दर्शाता है। सेना के ADG PI (अडिशनल डायरेक्टर जनरल, पब्लिक इंफॉर्मेशन) ने इसे “ताकतवर स्टील, भारत में बनी” बताते हुए शेयर किया, जो टैक्टिकल ASMR (Autonomous Sensory Meridian Response) स्टाइल में है। वीडियो में काले परदे के बीच राइफल की क्लिकिंग साउंड, फायरिंग और साइलेंसर के साथ गोलीबारी दिखाई गई है, जो जवान की जान बचाने और दुश्मन को भगाने की क्षमता पर जोर देता है।

वीडियो का संक्षिप्त विवरण

लंबाई और स्टाइल: 24 सेकंड का शॉर्ट क्लिप, जिसमें न्यूनतम डायलॉग के साथ ध्वनि प्रभाव (साउंड इफेक्ट्स) प्रमुख हैं। यह राइफल को ‘शेर’ के रूप में जीवंत बनाता है – चुपचाप घात लगाती हुई और फिर गरजती हुई।

कुंजी हाइलाइट्स:

राइफल को उठाने, लोड करने और फायर करने की प्रक्रिया।

7.62×39mm कारतूस के साथ 700 राउंड प्रति मिनट फायरिंग रेट।

800 मीटर तक सटीक रेंज, साइलेंसर के साथ कम आवाज।

सोशल मीडिया इम्पैक्ट: X (पूर्व ट्विटर) पर वीडियो वायरल हो गया है। Sputnik India के पोस्ट को 2,482 लाइक्स मिले, जबकि Vishwesh S Deshmukkh ने इसे “चिलिंग डोमिनेंस” बताया। कई यूजर्स ने इसे “INSAS का अंत” करार दिया।

वीडियो का मूल लिंक: भारतीय सेना का आधिकारिक X पोस्ट (वीडियो URL: https://video.twimg.com/ext_tw_video/1992435980318683136/pu/vid/avc1/480×270/e8cG3Sr4Vx70QK9j.mp4)।

‘शेर’ राइफल के बारे में मुख्य तथ्य

‘शेर’ रूस की AK-203 सीरीज पर आधारित है, लेकिन अब 100% स्वदेशी हो चुकी है। यह INSAS राइफल की जगह लेगी, जो लंबे समय से सेना की कमजोरी मानी जाती थी।

निर्माण

अमेठी (उत्तर प्रदेश) के कोरवा आयुध कारखाने में इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) द्वारा। दिसंबर 2025 तक 100% भारतीय स्टील और कंपोनेंट्स।

वजन

3.5 किलोग्राम (हल्की और आसानी से कैरी करने योग्य)।

फायरिंग

600-700 राउंड/मिनट, सिंगल/ऑटोमैटिक मोड।

रेंज

प्रभावी 800 मीटर (सटीक हिट के लिए)।

उपयोग

भारतीय सेना के 6,01,427 जवानों के लिए। 2026 से सालाना 1.5 लाख राइफलें उत्पादन। 30,000 अतिरिक्त पुलिस, अर्धसैनिक बलों और निर्यात के लिए।

लागत बचत

स्वदेशीकरण से विदेशी आयात पर निर्भरता खत्म, निर्यात संभावनाएं (दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका, मिडिल ईस्ट में रुचि)।

यह राइफल ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रतीक है। पहले चरण में 1,20,000 राइफलें सेना को मिल चुकी हैं, और पूरी डिलीवरी 2030 तक पूरी होगी।

राजनीतिक और रणनीतिक महत्व

आत्मनिर्भरता: 2019 के भारत-रूस समझौते के तहत शुरू, अब 5 साल पहले लक्ष्य हासिल। यह सेना की फायरपावर को बढ़ाएगा, खासकर LoC और LAC पर।

निर्यात क्षमता: दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के देशों ने खरीद में रुचि दिखाई है, जो भारत को हथियार निर्यातक बना सकता है।

सोशल मीडिया प्रतिक्रियाएं: BJP नेता दिलीप घोष ने इसे “भारत का शेर” बताया, जबकि यूजर्स ने “आतंकियों का काल” कहा। कुछ ने स्कोप लगाने की मांग की।

यह वीडियो न सिर्फ तकनीकी प्रदर्शन है, बल्कि भारत की सैन्य क्षमता का प्रतीक। सेना का लक्ष्य: हर जवान के हाथ में ‘शेर’। अधिक अपडेट्स के लिए आधिकारिक चैनल फॉलो करें।

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