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अहमदाबाद की ईसनपुर झील से अवैध कब्जा हटाने पहुंचे 15 JCB: 918 मकानों पर बुलडोजर चले, लाखों वर्गमीटर जमीन मुक्त

अहमदाबाद की ईसनपुर झील से अवैध कब्जा हटाने पहुंचे 15 JCB: 918 मकानों पर बुलडोजर चले, लाखों वर्गमीटर जमीन मुक्त

गुजरात की वाणिज्यिक राजधानी अहमदाबाद में आज एक बड़ा एंटी-एंक्रोचमेंट अभियान चलाया गया, जिसमें ईसनपुर झील (Isanpur Lake) के आसपास अवैध कब्जों को हटाने के लिए 15 JCB मशीनें और अन्य भारी उपकरण उतारे गए। अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) ने 918 अवैध आवासीय संरचनाओं को ध्वस्त करने का लक्ष्य रखा है, जिससे लगभग 96,000 वर्गमीटर क्षेत्र में से 30% हिस्सा (करीब 28,800 वर्गमीटर) मुक्त हो गया। यह अभियान पुलिस की सख्त निगरानी में चलाया जा रहा है, और स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया है।

अभियान का विवरण: झील को बचाने का बड़ा कदम

जगह और दायरा: ईसनपुर झील, जो अहमदाबाद के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है, पर अवैध निर्माण ने पर्यावरण को खतरे में डाल दिया था। AMC के अनुसार, झील का 30% हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में था, जहां झुग्गी-झोपड़ियां, अस्थायी घर और छोटे-मोटे दुकानें बनी हुई थीं। आज सुबह शुरू हुए इस ड्राइव में 15 JCB मशीनें, 10 हिटाची एक्सकेवेटर और 20 डंपर ट्रक लगाए गए।

संरचनाओं पर कार्रवाई: कुल 925 संरचनाओं की पहचान की गई थी, जिनमें से 918 पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। ये ज्यादातर अस्थायी घर हैं, जहां मजदूर परिवार और प्रवासी रहते हैं। अभियान के पहले चरण में ही 200 से अधिक संरचनाएं ध्वस्त हो चुकी हैं।

तैयारी और नोटिस: AMC ने पिछले हफ्ते ही सभी प्रभावित परिवारों को पूर्व सूचना दी थी। डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर ने कहा, “यह झील के संरक्षण के लिए जरूरी है। अवैध कब्जे से जल स्तर घट रहा था और प्रदूषण बढ़ रहा थ

अभियान में 500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिसमें SRP (स्टेट रिजर्व पुलिस) की 5 यूनिट शामिल हैं। इलाके को सील कर दिया गया है, और ट्रैफिक डायवर्जन लागू है।

पृष्ठभूमि: पर्यावरण संकट और अवैध प्रवास का मुद्दा

ईसनपुर झील अहमदाबाद की प्रमुख जल स्रोतों में से एक है, लेकिन पिछले 10 वर्षों में अवैध निर्माण ने इसे सिकुड़ने पर मजबूर कर दिया। सैटेलाइट इमेजरी से पता चला कि झील का क्षेत्रफल 20% कम हो गया था। यह अभियान गुजरात सरकार की ‘झील पुनरुद्धार योजना’ का हिस्सा है, जो चंडोला झील (अप्रैल-मई 2025 में 10,000+ संरचनाएं ध्वस्त) के बाद दूसरा बड़ा कदम है।

AMC अधिकारियों के मुताबिक, इन कब्जों में कई प्रवासी परिवार शामिल हैं, लेकिन कार्रवाई किसी समुदाय-विशेष को टारगेट नहीं कर रही। हालांकि, स्थानीय स्तर पर कुछ विवाद भी उठे हैं, जहां निवासियों ने “बिना वैकल्पिक आवास” का आरोप लगाया।

प्रभावितों के लिए राहत: पुनर्वास की योजना

सरकारी मदद: प्रभावित परिवारों को गुजरात हाउसिंग बोर्ड की PMAY (प्रधानमंत्री आवास योजना) के तहत नई झुग्गी-फ्लैट आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। योग्य परिवारों को 1 लाख रुपये तक का मुआवजा मिलेगा।

विरोध: कुछ निवासियों ने प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से उन्हें हटाया। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन हो रहा है, लेकिन पुनर्वास तत्काल होना च

प्रतिक्रियाएं: सराहना और आलोचना का दौर

AMC और सरकार: मेयर ने इसे “पर्यावरण की जीत” बताया। गुजरात के पर्यावरण मंत्री ने कहा, “ऐसे अभियान से शहर की हरित पट्टी मजबूत होगी।”

निवासी और विपक्ष: प्रभावितों ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर “अचानक कार्रवाई” का शिकार बताया। कांग्रेस ने विधानसभा में मामला उठाने की बात कही।

पर्यावरणविद: वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट ने सराहना की, “झील मुक्त होने से जल संरक्षण में मदद म

यह अभियान दो दिनों तक चलेगा, और AMC ने कचरे के रिसाइक्लिंग की योजना भी बनाई है—ध्वस्त मलबे से पेवर ब्लॉक और बेंच बनाए जाएंगे। स्थिति पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि मानसून से पहले झील को पूरी तरह बहाल करने का लक्ष्य है।

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