उत्तराखंड

उत्तराखंड-नेपाल बॉर्डर के जंगल में छिपा चमत्कारी मंदिर: भारामल बाबा, जहां सच्चे मन से मांगी हर मनोकामना पूरी होती है

उत्तराखंड-नेपाल बॉर्डर के जंगल में छिपा चमत्कारी मंदिर: भारामल बाबा, जहां सच्चे मन से मांगी हर मनोकामना पूरी होती है

खटीमा (उधम सिंह नगर): भारत-नेपाल सीमा से सटे सुरई वन रेंज के घने जंगलों में एक ऐसा रहस्यमयी शिव मंदिर है, जिसे लाखों लोग “भारामल बाबा” के नाम से जानते हैं। यह मंदिर खटीमा शहर से करीब 14 किलोमीटर दूर, जंगल के बीचोबीच स्थित है। चारों तरफ घना जंगल, शारदा नहर का कल-कल बहता पानी और दूर से आती घंटियों की आवाज—यहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को लगता है कि बाबा खुद बुला रहे हैं।

इतिहास और चमत्कारों की कहानी

लोक मान्यता है कि शारदा नहर के निर्माण (1950-60 के दशक) के दौरान मजदूरों को यहां एक प्राचीन शिवलिंग मिला था। सपने में बाबा ने दर्शन दिए और कहा, “मैं यहीं रहूंगा, मेरी पूजा करो।” तब से यह स्थान “भारामल बाबा” के नाम से विख्यात हो गया। लोग इसे न्याय का देवता मानते हैं—जो भी सच्चे मन से माथा टेकता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है। कोर्ट-कचहरी के मामले, रोग, व्यापार में बाधा, संतान प्राप्ति—हर तरह की मुरादें लेकर लोग दूर-दूर से आते हैं।

मंदिर की खास बातें

मंदिर के ठीक सामने शारदा नहर बहती है, जिसका पानी पवित्र माना जाता है।

जंगल में बाघ, हाथी, तेंदुए का डर रहता है, लेकिन श्रद्धालु बताते हैं कि बाबा के दरबार में कभी कोई जानवर नुकसान नहीं पहुंचाता।

मंदिर में कोई पुजारी नहीं—स्वयंभू शिवलिंग की पूजा भक्त खुद करते हैं। जल, दूध, बेलपत्र चढ़ाकर मन्नत मांगी जाती है।

हर सोमवार और श्रावण मास में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

हर साल लगने वाला विशाल भंडारा

शीत ऋतु में (दिसंबर-जनवरी) यहां 7-10 दिन का विशाल भंडारा लगता है। एक दिन में 50,000 से 1 लाख लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। खिचड़ी, पूरी-सब्जी, हलवा का प्रसाद बांटा जाता है। नेपाल के धनगढ़ी, महेंद्रनगर, कंचनपुर से भी हजारों लोग पैदल चलकर आते हैं। भंडारे में चावल, दाल, आटा, तेल—सब कुछ श्रद्धालुओं का चढ़ावा होता है।

कैसे पहुंचें?

खटीमा से बनबसा रोड → सुरई रेंज → जंगल के अंदर 3-4 किमी कच्चा रास्ता।

नजदीकी रेलवे स्टेशन: खटीमा (14 किमी), टनकपुर (30 किमी)।

सावधानी: जंगल का रास्ता है, दिन में ही जाएं। बाइक या निजी वाहन बेहतर।

भारामल बाबा का दरबार सच्ची श्रद्धा का जीता-जागता प्रमाण है। लोग कहते हैं—“एक बार माथा टेक लो, बाबा खुद खींच लाते हैं।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *