बिहार ‘डॉग बाबू’ विवाद के बाद असम में EC का सख्त रुख: वोटर लिस्ट से हटवाएंगे ‘गैर-मानव’ फोटो, BLOs को दिए विशेष निर्देश
बिहार ‘डॉग बाबू’ विवाद के बाद असम में EC का सख्त रुख: वोटर लिस्ट से हटवाएंगे ‘गैर-मानव’ फोटो, BLOs को दिए विशेष निर्देश
बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट में कुत्तों-बिल्लियों की तस्वीरें आने के विवाद के बाद चुनाव आयोग (EC) ने असम में भी सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल ‘डॉग बाबू’ मामलों से सबक लेते हुए EC ने असम के फील्ड स्टाफ को वोटर रोल्स में ‘नॉन-ह्यूमन’ (गैर-मानव) और ‘नो इमेज’ एंट्रीज की जांच करने का आदेश दिया है। इनकी जगह पंजीकृत वोटर्स के सही फोटोग्राफ लगवाए जाएंगे। यह कदम 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले स्पेशल रिवीजन के तहत उठाया गया है, जिसका ड्राफ्ट 10 फरवरी 2026 को जारी होगा।
विवाद का बैकग्राउंड:
बिहार SIR के दौरान कई वोटर आईडी में जानवरों की तस्वीरें आने की शिकायतें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। विपक्ष ने इसे EC की लापरवाही बताया, जबकि EC ने इसे सिस्टम की खामियों का सबूत माना। इसी को ध्यान में रखते हुए असम में स्पेशल रिवीजन (SSR के बीच SIR जैसी) की शुरुआत 17 नवंबर को हुई। क्वालीफाइंग डेट 1 जनवरी 2026 तय की गई है। असम CEO अनुराग गोयल ने कहा, “यह रूटीन रिवीजन से सख्त लेकिन SIR जितना गहन नहीं। BLOs को फॉर्म 1-3 के साथ घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करना होगा।”
EC के प्रमुख निर्देश:
नॉन-ह्यूमन एंट्रीज चेक: बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को सभी एंट्रीज की फील्ड वेरिफिकेशन करनी होगी। जानवरों, वस्तुओं या बिना फोटो वाली एंट्रीज हटाकर सही फोटो अपलोड करें।
एप्लीकेशन कलेक्शन: प्रभावित वोटर्स से फॉर्म 6 (नया रजिस्ट्रेशन) या फॉर्म 7 (डिलीशन) लेना अनिवार्य। पोलिंग स्टेशन रेशनलाइजेशन से प्रत्येक बूथ पर 1200 वोटर्स लिमिट होगी, जिससे 1826 नए बूथ बनेंगे।
टाइमलाइन: वेरिफिकेशन 22 नवंबर से 20 दिसंबर तक। फाइनल लिस्ट 10 फरवरी 2026 को पब्लिश।
NRC कनेक्शन: असम की खास स्थिति (NRC पेंडिंग) को देखते हुए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन SIR जितना सख्त नहीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नागरिकता जांच जारी रहेगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
असम सरकार: CM हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे “सकारात्मक” बताया। AGP मंत्री अतुल बोरा ने कांग्रेस पर “राजनीति करने” का आरोप लगाया, कहा कि EC की सफाई के बावजूद वे भ्रम फैला रहे हैं।
कांग्रेस: इसे “वोटर हटाने की साजिश” बताया। कहा, “बिहार जैसी गड़बड़ी असम में न हो, लेकिन EC का रुख संदिग्ध है।”
EC का स्पष्टीकरण: यह रूटीन प्रक्रिया है, जो ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करेगी। बिहार में 69 लाख नाम हटे थे, लेकिन असम में फोकस एक्यूरेसी पर।
यह कदम लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी माना जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसे “डिसेनफ्रैंचाइजमेंट” का खतरा बता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि असम के बॉर्डर एरिया में ‘इनफिल्ट्रेटर्स’ चेक से तनाव बढ़ सकता है। अधिक जानकारी के लिए EC की वेबसाइट या असम CEO ऑफिस चेक करें।
