राजनीति

महाराष्ट्र सियासत में अजित पवार के ‘फंड’ बयान पर फडणवीस की सफाई: ‘चुनावी भाषण में ये सब बोलना पड़ता है’

महाराष्ट्र सियासत में अजित पवार के ‘फंड’ बयान पर फडणवीस की सफाई: ‘चुनावी भाषण में ये सब बोलना पड़ता है’

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विवादित ‘फंड’ वाले बयान पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार (23 नवंबर 2025) को इसे ‘चुनावी रेटोरिक’ बताते हुए खारिज कर दिया। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में फडणवीस ने कहा, “चुनावी भाषण में ये सब बोलना पड़ता है। सरकार का उद्देश्य सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास है, चाहे कोई भी वोट दे।” यह बयान पवार के शुक्रवार के प्रचार भाषण के बाद आया, जिसने विपक्ष को ‘धमकी’ का हथियार दे दिया। फडणवीस ने साथ ही महायुति (भाजपा-एनसीपी-शिवसेना) में कलह की अफवाहों को भी ‘निराधार’ बताते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार के साथ एकजुटता का संदेश दिया।

बयान का पूरा संदर्भ:

पुणे जिले के मालेगांव नगर पंचायत चुनाव (2 दिसंबर) के प्रचार के दौरान अजित पवार ने राकांपा के 18 उम्मीदवारों के समर्थन में सभा को संबोधित करते हुए कहा था, “तुम्हारे पास वोट हैं, मेरे पास फंड हैं। अगर तुम मेरे उम्मीदवारों को चुनोगे, तो मालेगांव के लिए फंड की कोई कमी नहीं दूंगा। लेकिन अगर इनकार करोगे, तो मैं भी इनकार कर दूंगा। अब तय कर लो।” वित्त मंत्री के नाते पवार का यह बयान वायरल हो गया, जिसे विपक्ष ने ‘वोट खरीदने की धमकी’ करार दिया। सोशल मीडिया पर #AjitPawarFund ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स ने इसे ‘लोकतंत्र का अपमान’ बताया।

फडणवीस की प्रतिक्रिया का विश्लेषण:

फडणवीस ने पवार के बयान को हल्का करते हुए कहा कि चुनावी जोश में ऐसी बातें आम हैं, लेकिन सरकार का फोकस विकास पर है। उन्होंने जोर दिया कि फंड जनता के टैक्स से आते हैं, न कि व्यक्तिगत जेब से। साथ ही, महायुति में अविश्वास की खबरों को सिरे से नकारते हुए कहा, “हमारी एकता अटल है। शिंदे और पवार मेरे साथी हैं, अफवाहें फैलाने वाले विपक्ष को जवाब देंगे।” यह बयान महायुति की एकजुटता दिखाने का प्रयास माना जा रहा है, खासकर निकाय चुनावों के बीच।

विपक्ष की तीखी प्रतिक्रियाएं:

शिवसेना (UBT): नेता अंबादास दानवे ने कहा, “फंड जनता का पैसा है, न कि पवार का। वोटर्स को धमकाना लोकतंत्र का कत्ल है। चुनाव आयोग कार्रवाई करे।”

कांग्रेस: प्रवक्ता ने इसे ‘सत्ता का दुरुपयोग’ बताया। कहा, “महायुति विकास के नाम पर वोट खरीद रही है।”

समाजवादी पार्टी: अबू आज़मी ने ट्वीट कर कहा, “अजित पवार को याद रखना चाहिए कि फंड जनता का है। वोट के बदले फंड की बात तो तानाशाही है।”

अजित पवार का बचाव:

पवार ने बाद में सफाई दी कि यह ‘धमकी’ नहीं, बल्कि विकास पर जोर देने का तरीका था। कहा, “ये धमकी कैसे हुई? मैं तो मतदाताओं को जागरूक कर रहा था।” समर्थकों ने इसे ‘चुनावी जोश’ बताया।

यह विवाद महाराष्ट्र निकाय चुनावों को गरमा रहा है, जहां महायुति का पैनल भाजपा समर्थित है। विशेषज्ञों का मानना है कि फडणवीस का बयान गठबंधन बचाने की कोशिश है, लेकिन विपक्ष इसे उछाल रहा है। चुनाव आयोग से शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।

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