राजनीति

चंडीगढ़ पर सियासी तूफान: ‘अभी अंतिम फैसला नहीं’, विंटर सेशन में बिल नहीं लाएंगे—केंद्र का स्पष्टिकरण, पंजाब में विरोध थमने के संकेत

चंडीगढ़ पर सियासी तूफान: ‘अभी अंतिम फैसला नहीं’, विंटर सेशन में बिल नहीं लाएंगे—केंद्र का स्पष्टिकरण, पंजाब में विरोध थमने के संकेत

पंजाब में चंडीगढ़ को लेकर छिड़े सियासी बवाल के बीच केंद्र सरकार ने रविवार (23 नवंबर 2025) को बड़ा स्पष्टीकरण दिया। गृह मंत्रालय ने कहा कि चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में लाने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। विंटर सेशन (दिसंबर 2025) में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश करने का कोई इरादा नहीं है। यह बयान सभी दलों के विरोध के बाद आया, जहां इसे ‘पंजाब की राजधानी छीनने की साजिश’ बताया जा रहा था।

विवाद का पूरा विवरण:

केंद्र ने संसद के बुलेटिन में 131वें संशोधन बिल का जिक्र किया था, जो चंडीगढ़ के लिए राष्ट्रपति को सीधे नियम बनाने की शक्ति देता। वर्तमान में चंडीगढ़ का प्रशासन पंजाब के राज्यपाल के पास है, जो पंजाब-हरियाणा की संयुक्त राजधानी होने के कारण है। यदि बिल पास होता, तो चंडीगढ़ अन्य यूटी (जैसे अंडमान-निकोबार) की तरह स्वतंत्र प्रशासक के अधीन आ जाता, जिससे पंजाब का ऐतिहासिक दावा कमजोर पड़ता। केंद्र का दावा है कि यह केवल कानून बनाने की प्रक्रिया सरल करने के लिए है, न कि प्रशासनिक संरचना बदलने के लिए। सभी हितधारकों से परामर्श के बाद फैसला लिया जाएगा।

पंजाब में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:

AAP: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे ‘पंजाब की राजधानी छीनने की साजिश’ बताया। कहा, “चंडीगढ़ पंजाबी जमीन पर बनी है, हम इसे किसी को नहीं देंगे।” AAP सांसद विक्रमजीत सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की मांग की।

कांग्रेस: प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने इसे ‘अनावश्यक’ करार दिया। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “यह पंजाब के अधिकारों पर हमला है।” लीडर ऑफ ऑपोजिशन प्रताप सिंह बाजवा ने दलों को एकजुट होने का आह्वान किया।

शिरोमणि अकाली दल (SAD): सुखबीर सिंह बादल ने इसे ‘पंजाब के अधिकारों पर सीधा हमला’ बताया। पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा, “यह फेडरल संरचना का उल्लंघन है।” SAD ने कोर कमिटी बैठक बुलाई।

BJP: प्रदेश अध्यक्ष सुनिल जाखड़ ने कहा, “पंजाब की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” उन्होंने शाह से मिलने का समय मांगा और बिल वापस लेने की मांग की। BJP नेता आरपी सिंह ने विपक्ष पर ‘बिना जानकारी विरोध करने’ का आरोप लगाया।

पृष्ठभूमि और प्रभाव:

चंडीगढ़ विवाद पुराना है—1966 के पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के बाद से पंजाब इसे अपनी राजधानी मानता है, जबकि हरियाणा भी दावा करता है। 1970 और राजीव-लोंगोवाल समझौते में केंद्र ने चंडीगढ़ पंजाब को सौंपने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ। हाल ही में पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट को भंग करने का फैसला भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। केंद्र के स्पष्टीकरण से तनाव कम हुआ है, लेकिन पंजाबी दलों ने सतर्कता बरतने को कहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा 2026 के पंजाब चुनावों को प्रभावित कर सकता है। अधिक अपडेट के लिए गृह मंत्रालय की वेबसाइट या PIB चेक करें।

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