अल-अक्सा मस्जिद के इमाम पर इजरायल का मुकदमा: उकसावे के आरोप में चार्जशीट, मुस्लिम विद्वानों में गुस्से की लहर
अल-अक्सा मस्जिद के इमाम पर इजरायल का मुकदमा: उकसावे के आरोप में चार्जशीट, मुस्लिम विद्वानों में गुस्से की लहर
अल-अक्सा मस्जिद, इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र स्थल के इमाम शेख इकरामा साबरी पर इजरायली अथॉरिटीज ने उकसावे और आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप में मुकदमा चलाने का फैसला किया है। जून 2024 में दायर चार्जशीट में साबरी पर 2022 के हमलों का गुणगान करने का इल्जाम लगाया गया है, जिसमें चार इजरायली नागरिकों की मौत हुई थी। यह कदम फिलिस्तीनी क्षेत्र में तनाव को और भड़का सकता है, क्योंकि मुस्लिम स्कॉलर्स और संगठनों ने इसे ‘धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला’ करार देते हुए कड़ी निंदा की है। साबरी ने आरोपों को ‘झूठा और राजनीतिक साजिश’ बताया है।
शेख इकरामा साबरी, जो यरूशलेम के हायर इस्लामिक काउंसिल के प्रमुख भी हैं, को अगस्त 2024 में हमास नेता इस्माइल हनीया की शहादत पर खुतबा देने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इजरायली पुलिस ने दावा किया कि साबरी ने अल-अक्सा में जुमे की नमाज के दौरान हनीया को ‘शहीद’ कहकर उकसावा फैलाया। इससे पहले, जून में इजरायली कोर्ट ने उन्हें 2022 के हूती हमले का समर्थन करने के लिए दोषी ठहराया, जहां उन्होंने हमलावरों को ‘शहीद’ कहा था। साबरी पर होलोकॉस्ट के आंकड़ों पर संदेह जताने और ‘प्रोटोकॉल्स ऑफ द एल्डर्स ऑफ जियोन’ जैसे एंटी-सेमिटिक किताब पढ़ने की सलाह देने के पुराने बयान भी मुकदमे का आधार बने हैं। इजरायल ने उन्हें अल-अक्सा में प्रवेश पर छह महीने का प्रतिबंध भी लगाया है।
इस कदम से मुस्लिम स्कॉलर्स और संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया है। जॉर्डन के इस्लामिक एंडोमेंट्स काउंसिल ने बयान जारी कर कहा कि ‘कोई भी अथॉरिटी मुसलमानों को अल-अक्सा में नमाज पढ़ने से नहीं रोक सकती। यह हमारी धार्मिक जिम्मेदारी पर हमला है।’ काउंसिल के सदस्य और प्रमुख धार्मिक नेता शेख इकरामा साबरी (नोट: अलग व्यक्ति नहीं) ने इसे ‘मुस्लिम अधिकारों का उल्लंघन’ बताया। इंटरनेशनल यूनियन ऑफ मुस्लिम स्कॉलर्स (IUMS) ने इसे ‘अल-अक्सा पर इजरायली कब्जे की साजिश’ करार दिया और चेतावनी दी कि इससे क्षेत्रीय हिंसा भड़क सकती है। फिलिस्तीनी उलेमा ने कहा कि साबरी का मुकदमा ‘इस्लामी प्रतीकों को कुचलने की कोशिश’ है, जो 1967 से चली आ रही स्टेटस क्वो को तोड़ने का हिस्सा लगता है।
अल-अक्सा मस्जिद, जो टेम्पल माउंट पर स्थित है, यहूदियों के लिए सबसे पवित्र स्थल भी है। इजरायल इसे ‘सुरक्षा के नाम पर’ नियंत्रित करता है, लेकिन जॉर्डन के वक्फ के तहत मुसलमानों का विशेष अधिकार है। साबरी का मामला 2023-24 में अल-अक्सा पर इजरायली छापेमारी के बाद आया, जब हमास ने इसे ‘जंग का कारण’ बताया था। मुस्लिम स्कॉलर्स का कहना है कि यह मुकदमा न केवल साबरी बल्कि पूरी उमmah की धार्मिक आजादी पर खतरा है। विपक्षी संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है।
साबरी के वकील खालिद जबरका ने कहा कि वे कोर्ट में सबूत पेश करेंगे और अपील करेंगे। इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन ग्विर ने इसे ‘आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई’ बताया। यह विवाद इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को नई ऊंचाई दे सकता है, जहां अल-अक्सा हमेशा फ्लैशपॉइंट रहा है। मुस्लिम जगत में यह खबर तेजी से फैल रही है है। कुल मिलाकर, यह मुकदमा धार्मिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय शांति पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
