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दिल्ली में वायु प्रदूषण ‘बहुत गंभीर’, सुप्रीम कोर्ट ने चेताया: मास्क भी पर्याप्त नहीं, वकीलों से की वर्चुअल सुनवाई की अपील

दिल्ली में वायु प्रदूषण ‘बहुत गंभीर’, सुप्रीम कोर्ट ने चेताया: मास्क भी पर्याप्त नहीं, वकीलों से की वर्चुअल सुनवाई की अपील

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर में सर्दी की दस्तक के साथ ही वायु प्रदूषण का संकट चरम पर पहुंच गया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई इलाकों में 400 से ऊपर पहुंच चुका है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इस जहरीली हवा के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कड़ी चेतावनी जारी की। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और अतुल एस चंद्रकर की बेंच ने सुनवाई के दौरान वकीलों से कहा, “स्थिति बहुत गंभीर है! आप सभी यहां क्यों आ रहे हैं? वर्चुअल सुनवाई की सुविधा उपलब्ध है, कृपया इसका उपयोग करें। यह प्रदूषण स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।” वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बताया कि वकील मास्क पहन रहे हैं, तो जस्टिस नरसिम्हा ने साफ कहा, “मास्क भी पर्याप्त नहीं हैं। यह पर्याप्त नहीं होगा। हम चीफ जस्टिस से भी इस पर चर्चा करेंगे।” यह बयान कोर्ट में मौजूद वकीलों और अधिकारियों के बीच सन्नाटा छोड़ गया।

दिल्ली का AQI सुबह 9 बजे तक कई जगहों पर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, बावाना में AQI 460, चांदनी चौक 455, आनंद विहार 431, रोहिणी 447 और ITO 438 दर्ज किया गया। इंडिया गेट और कर्तव्य पथ क्षेत्र में AQI 408 रहा, जहां घना कोहरा जैसा स्मॉग छाया हुआ। GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के तहत स्टेज-3 लागू है, जिसमें निर्माण कार्य बंद, 10वीं तक स्कूल बंद और ऑड-ईवन लागू है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आदेश जारी करना काफी नहीं, पंजाब-हरियाणा सरकारों को पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई करनी होगी। बुधवार को CJI बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने दोनों राज्यों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें पराली जलाने पर ठोस कदमों का जिक्र हो। अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

सुप्रीम कोर्ट का यह बयान दिल्ली के प्रदूषण संकट की गंभीरता को उजागर करता है। हर साल नवंबर-दिसंबर में पराली जलाना, वाहनों का धुआं, निर्माण धूल और मौसम की स्थिरता से हवा जहरीली हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, PM2.5 कण फेफड़ों में घुसकर हृदय रोग, अस्थमा और कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। WHO के मानकों से दिल्ली का AQI 100 गुना ज्यादा है। कोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि राज्य सरकारें जिम्मेदार होंगी। दिल्ली सरकार ने स्कूलों को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट किया है, लेकिन अस्पतालों में सांस की बीमारियों के मरीजों की संख्या 30% बढ़ गई है।

यह संकट सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं। एनसीआर के गुरुग्राम, नोएडा और फरीदाबाद में भी AQI 300 से ऊपर है। केंद्र सरकार ने क्लाउड सीडिंग (बारिश पैदा करने) की योजना पर विचार किया है, लेकिन अभी लागू नहीं। सुप्रीम कोर्ट की अपील के बाद कई वकील वर्चुअल मोड अपनाने को तैयार हैं। क्या यह चेतावनी प्रदूषण पर लगाम लगाएगी? फिलहाल, दिल्लीवासी घरों में कैद हैं, और सांस लेना मुश्किल हो गया है।

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