उत्तर कोरिया का नया हमला: परमाणु वारहेड से लैस बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जापान-दक्षिण कोरिया में हाई अलर्ट
उत्तर कोरिया का नया हमला: परमाणु वारहेड से लैस बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जापान-दक्षिण कोरिया में हाई अलर्ट
तनावपूर्ण पूर्वी एशिया में एक बार फिर हलचल मच गई है। उत्तर कोरिया ने शुक्रवार सुबह एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी है, जो परमाणु हथियारों से लैस होने का दावा किया जा रहा है। दक्षिण कोरिया और जापान की सेनाओं ने इसे तुरंत डिटेक्ट किया और दोनों देशों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। मिसाइल पूर्वी तट के ऊपर जापान की ओर फायर की गई, जो हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोरिया वार्ता की पेशकश के बाद आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह किम जोंग उन का अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी भरा संदेश है, जो क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल रहा है।
दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने पुष्टि की कि मिसाइल उत्तर कोरिया के प्योंगयांग इलाके से लॉन्च हुई और पूर्वी समुद्र (जापान सागर) में गिरी। जापानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मिसाइल ने करीब 1,100 किलोमीटर की दूरी तय की और अधिकतम ऊंचाई 100 किलोमीटर रही। यह मिसाइल हाइपरसोनिक वारहेड से लैस हो सकती है, जो मच 5 से ज्यादा की स्पीड से उड़ती है और मिड-फ्लाइट में दिशा बदल सकती है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना मुश्किल होता है। उत्तर कोरिया की राज्य मीडिया ने इसे ‘रणनीतिक सफलता’ बताया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करार दिया गया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने इसे ‘गंभीर उकसावा’ कहा है।
यह लॉन्च पिछले दो हफ्तों में उत्तर कोरिया की तीसरी मिसाइल टेस्टिंग है, जो नवंबर 2025 में अमेरिकी चुनाव से ठीक पहले हुई थी। ट्रंप ने हाल ही में किम को वार्ता का न्योता दिया था, लेकिन किम ने इसे ठुकरा दिया, कहते हुए कि अमेरिका को पहले परमाणु हथियारों पर दबाव बंद करना होगा। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने आपात बैठक बुलाई, जबकि जापान ने हokkaido द्वीप के निवासियों को शेल्टर में जाने की सलाह दी। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड ने कहा कि यह ‘क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा’ है और सहयोगी देशों के साथ मिलकर जवाब दिया जाएगा। दोनों देशों की नौसेनाओं ने समुद्री सीमाओं पर पेट्रोलिंग बढ़ा दी है।
उत्तर कोरिया ने हाल के महीनों में अपनी मिसाइल क्षमता को तेजी से बढ़ाया है। जनवरी 2025 में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल टेस्ट किया गया, जबकि अगस्त में ICBM लॉन्च हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, किम का यह कदम रूस के साथ गहरे सैन्य संबंधों से प्रेरित है, जहां मॉस्को ने प्योंगयांग को उन्नत तकनीक दी है। न्यूजवीक की रिपोर्ट में कहा गया कि यह लॉन्च रूसी ‘इस्कैंडर’ मिसाइल से प्रेरित हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) नहीं, बल्कि IAEA ने चेतावनी दी है कि उत्तर कोरिया के पास अब 20-25 न्यूक्लियर वारहेड्स हो सकते हैं, जो बैलिस्टिक मिसाइलों पर फिट हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कड़ी निंदा की है। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह UNSC रेजोल्यूशन का उल्लंघन है। चीन ने ‘सभी पक्षों से संयम’ बरतने की अपील की, जबकि रूस ने इसे ‘प्रतिरक्षा अभ्यास’ बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल से पहले का ‘टेस्टिंग मोड’ है, जो वार्ता की मेज पर मजबूत स्थिति बनाएगा। जापानी पीएम ने संसद में कहा, “हम अपनी सुरक्षा को किसी भी खतरे से बचाएंगे।” दक्षिण कोरिया में विपक्ष ने सरकार पर ‘कमजोर प्रतिक्रिया’ का आरोप लगाया।
यह घटना पूर्वी एशिया में तनाव को नई ऊंचाई दे रही है। पिछले साल 2024 में भी इसी तरह के लॉन्च से जापान में सायरन बजे थे। फिलहाल, कोई क्षति की खबर नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। वैश्विक बाजारों में तेल और स्टॉक में हल्की गिरावट देखी गई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ‘तत्काल संवाद’ की मांग की है। उत्तर कोरिया की यह जिद परमाणु अप्रसार संधि (NPT) को चुनौती दे रही है, और आने वाले दिनों में और टेस्ट की आशंका है।
