तेजस्वी के ‘चरमपंथी’ वाले बयान पर ओवैसी का पलटवार: बिहार के मुस्लिम वोटर मानेंगे या ठुकराएंगे? सियासी जंग में छिपा वोटबैंक का खेल
तेजस्वी के ‘चरमपंथी’ वाले बयान पर ओवैसी का पलटवार: बिहार के मुस्लिम वोटर मानेंगे या ठुकराएंगे? सियासी जंग में छिपा वोटबैंक का खेल
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग से ठीक दो दिन पहले RJD नेता तेजस्वी यादव के एक बयान ने पूरे सिमांचल क्षेत्र में तहलका मचा दिया। तेजस्वी ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को ‘चरमपंथी’ (extremist) कहा, जिसका जवाब ओवैसी ने कड़ी नोकझोंक से दिया। ओवैसी ने इसे ‘पूरे मुस्लिम समुदाय का अपमान’ बताया और तेजस्वी को ‘मोदी का छोटा भाई’ करार दिया। लेकिन सवाल ये है – क्या बिहार के मुस्लिम वोटर (जो राज्य की 17.7% आबादी हैं) इस टिप्पणी को मानेगा, या इसे RJD के वोटबैंक पर करारा प्रहार समझेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान महागठबंधन के ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण को हिला सकता है, खासकर सिमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों में जहां AIMIM पहले से ही मजबूत है।
तेजस्वी ने एक इंटरव्यू में AIMIM के साथ गठबंधन न करने की वजह बताते हुए कहा था, “महागठबंधन में चरमपंथियों की कोई जगह नहीं है।” यह बयान सीट शेयरिंग टूटने के बाद आया, जब AIMIM ने 6 सीटें मांगीं लेकिन RJD ने ठुकरा दिया। अब AIMIM 100 सीटों पर स्वतंत्र लड़ रही है, जो महागठबंधन के लिए चुनौती बन सकती है।
ओवैसी का तीखा जवाब: ‘एक्सट्रीमिस्ट लिखना आता है?’ – अपमान का आरोप
कटिहार की रैली में ओवैसी ने तेजस्वी पर हमला बोला: “तेजस्वी ने मेरी टोपी और दाढ़ी देखकर चरमपंथी कहा। क्या नमाजी, कुरान पढ़ने वाला, रोजेदार, मदरसे जाने वाला, दाढ़ी रखने वाला चरमपंथी है? यह सिमांचल के मुस्लिमों का अपमान है। तेजस्वी बाबू, ‘एक्सट्रीमिस्ट’ तो अंग्रेजी में लिखकर बता दो!” ओवैसी ने इसे ‘पाकिस्तानी भाषा’ और ‘मोदी की नकल’ बताया, और कहा, “अगर अपने धर्म पर गर्व करना चरमपंथ है, तो मुझे फख्र है।” AIMIM ने X पर वीडियो शेयर कर इसे ‘माइनॉरिटी कम्युनिटी का अपमान’ करार दिया।
तेजस्वी ने मंगलवार को पटना प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे ‘नॉन-इश्यू’ बता दिया: “यह कोई मुद्दा ही नहीं है। हम विकास और नौकरियों पर फोकस कर रहे हैं।” लेकिन ओवैसी का पलटवार सिमांचल (किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया) में गूंज रहा है, जहां मुस्लिम वोट 40% से ज्यादा हैं।
बिहार के मुस्लिम वोटर क्या सोचते हैं? अपमान से नाराजगी, लेकिन वोटिंग में सतर्कता
बिहार के मुस्लिम वोटरों की प्रतिक्रिया मिश्रित है, लेकिन ज्यादातर इसे अपमानजनक मान रहे हैं। X पर वायरल पोस्ट्स से साफ है कि कई मुस्लिम यूजर्स तेजस्वी की आलोचना कर रहे हैं: “तेजस्वी ने ओवैसी को चरमपंथी कहा, लेकिन मुसलमानों के हक की बात करने वाला टेररिस्ट? यह MY समीकरण को तोड़ने जैसा है।” एक यूजर ने लिखा, “मैं AIMIM का समर्थक नहीं, लेकिन मुसलमान हूं। हक मांगना चरमपंथ क्यों?” AIMIM कार्यकर्ता ने कहा, “यह पूरे समुदाय का अपमान है। सिमांचल के लोग जवाब देंगे।”
हालांकि, कुछ मुस्लिम वोटर इसे ‘चुनावी ड्रामा’ मान रहे हैं। BJP नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा, “तेजस्वी मुस्लिमों को भड़काने की कोशिश कर रहा है, लेकिन नीतीश राज में कोई समस्या नहीं रही। मुस्लिम समुदाय जानता है।” 2020 में AIMIM ने सिमांचल में 5 सीटें जीतीं, जो RJD के वोट काट चुकी हैं। अब ओवैसी का ‘थर्ड फ्रंट’ दावा तेजस्वी के लिए खतरा है।
क्या चुनाव पर असर पड़ेगा? वोटबैंक में दरार की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान RJD के मुस्लिम वोटबैंक को प्रभावित कर सकता है। सिमांचल में मुस्लिम वोटर ओवैसी की ओर झुक सकते हैं, जो महागठबंधन को नुकसान पहुंचाएगा। एक एनालिस्ट ने कहा, “तेजस्वी का बयान गलतफहमी से निकला, लेकिन ओवैसी इसे मुद्दा बना रहे हैं। मुस्लिम वोटर अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।” NDA इसका फायदा उठा सकता है, जो ‘सुशासन’ पर फोकस कर रहा है। पहले चरण (6 नवंबर) में 66 सीटों पर मुस्लिम बहुल इलाके वोटिंग करेंगे।
X पर #TejashwiModiKaChhotaBhai और #MaafiMaangoTejashwi ट्रेंड कर रहे हैं, जहां मुस्लिम यूजर्स नाराजगी जता रहे हैं। लेकिन तेजस्वी के समर्थक इसे ‘वोट बंटवारे का डर’ बता रहे हैं। कुल मिलाकर, मुस्लिम वोटरों में नाराजगी है, लेकिन वोटिंग में विकास और जाति का फैक्टर भी खेल सकता है।
यह विवाद बिहार चुनाव को और धार्मिक रंग दे रहा है। क्या मुस्लिम वोटर ‘अपमान’ भूलकर RJD को वोट देंगे, या ओवैसी को ताकत मिलेगी? 14 नवंबर के रिजल्ट बताएंगे। अपडेट्स के लिए बने रहें!
