सरकार की चेतावनी: ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले सावधान, ‘डार्क पैटर्न’ से बचें वरना हो जाएंगे ठगे!
सरकार की चेतावनी: ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले सावधान, ‘डार्क पैटर्न’ से बचें वरना हो जाएंगे ठगे!
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग का जोश चरम पर है, लेकिन केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को सख्त चेतावनी जारी की है। ‘डार्क पैटर्न’ नामक इन चालाक ट्रिक्स से उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाली कंपनियों को 3 महीने के अंदर खुद ऑडिट करना होगा। अगर ऐसा न हुआ, तो कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, “डार्क पैटर्न उपभोक्ताओं के साथ धोखा हैं। हम पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे।” अगर आप अमेज़न, फ्लिपकार्ट या किसी ऐप पर शॉपिंग करते हैं, तो सावधान रहें – ये ट्रिक्स आपकी जेब काट सकती हैं।
कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री ने हाल ही में X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर अलर्ट किया: “डील अच्छी लग रही है, लेकिन चेकआउट पर छिपे चार्जेस से बिल बढ़ गया? ये डार्क पैटर्न है!” त्योहारी शॉपिंग के बीच यह चेतावनी उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित हो सकती है।
डार्क पैटर्न क्या हैं? ये कैसे ठगते हैं उपभोक्ताओं को?
डार्क पैटर्न वेबसाइट्स या ऐप्स के डिजाइन में छिपी ऐसी चालाकियां हैं, जो उपभोक्ताओं को गलत फैसले लेने के लिए मजबूर करती हैं। ये ट्रिक्स मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर ज्यादा खरीदारी या अतिरिक्त चार्ज वसूलने का काम करती हैं। नवंबर 2023 में CCPA ने 13 प्रकार के डार्क पैटर्न को ‘अनुचित व्यापार व्यवस्था’ घोषित किया था, जिसके तहत 20 लाख रुपये तक जुर्माना और 6 महीने की कैद हो सकती है।
कुछ प्रमुख डार्क पैटर्न:
ड्रिप प्राइसिंग: प्रोडक्ट की कीमत शुरू में कम दिखाई जाती है, लेकिन चेकआउट पर डिलीवरी, टैक्स या हिडन फीस ऐड हो जाती हैं। उदाहरण: ₹500 का प्रोडक्ट फाइनल में ₹700 हो जाता है।
कन्फर्म शेमिंग: “क्या आप दान नहीं देंगे?” जैसे मैसेज से शर्मिंदा करके एक्स्ट्रा पेमेंट करवाना।
फेक काउंटडाउन: “ऑफर सिर्फ 5 मिनट बाकी!” दिखाकर जल्दबाजी में खरीदने को मजबूर करना।
बास्केट स्नीकिंग: कार्ट में अनचाहे प्रोडक्ट ऐड कर देना, जैसे इंश्योरेंस।
रोचेट इफेक्ट: सब्सक्रिप्शन कैंसल करना मुश्किल बनाना।
ये ट्रिक्स उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत अपराध हैं। CCPA ने ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे 3 महीने में खुद ऑडिट करें और डिक्लेरेशन दें कि उनके प्लेटफॉर्म पर कोई डार्क पैटर्न नहीं है।
सरकार ने क्या कदम उठाए? कंपनियों पर नकेल कसी
जून 2025 में अल्टीमेटम: CCPA ने अमेज़न, फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों को डार्क पैटर्न हटाने का आदेश दिया। उल्लंघन पर जुर्माना और ब्लॉकिंग का डर।
अक्टूबर 2025 में अलर्ट: उपभोक्ता मंत्रालय ने X पर ‘ड्रिप प्राइसिंग’ के खिलाफ ट्वीट किया, त्योहारी शॉपिंग के दौरान सावधानी बरतने को कहा।
हेल्पलाइन: अगर आपको डार्क पैटर्न दिखे, तो नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन 1915 पर कॉल करें या jagograhakjago.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
उपभोक्ता क्या करें? सुरक्षित शॉपिंग के टिप्स
ऑनलाइन शॉपिंग का मजा लेना चाहते हैं, लेकिन ठगे न जाएं? ये सावधानियां अपनाएं:
कीमत चेक करें: चेकआउट से पहले फाइनल बिल स्कैन करें। हिडन फीस न हो।
ऑफर्स वेरिफाई करें: काउंटडाउन या ‘सीमित स्टॉक’ वाले क्लेम्स पर भरोसा न करें।
रिव्यू पढ़ें: असली यूजर रिव्यूज चेक करें, फेक से बचें।
सब्सक्रिप्शन से सावधान: कैंसल बटन आसानी से मिलना चाहिए।
शिकायत करें: समस्या हो तो 1915 पर कॉल करें – सरकार आपकी मदद करेगी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि डार्क पैटर्न से सालाना अरबों रुपये का नुकसान होता है। CCPA का यह कदम उपभोक्ताओं को सशक्त बनाएगा। त्योहारी शॉपिंग एंजॉय करें, लेकिन आंखें खुली रखें!
