राजनीति

हाथ में संविधान थामे सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी: SIR को ‘NRC की साजिश’ बताते हुए कोलकाता में निकाला विशाल मार्च

हाथ में संविधान थामे सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी: SIR को ‘NRC की साजिश’ बताते हुए कोलकाता में निकाला विशाल मार्च

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज हाथ में भारतीय संविधान की प्रति थामे सड़कों पर उतरकर चुनाव आयोग के विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि से शुरू होकर रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर जोरासांको ठाकुरबाड़ी पर समाप्त हुई इस रैली में हजारों TMC कार्यकर्ता शामिल हुए। ममता ने इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ बताते हुए चेतावनी दी कि अगर वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए, तो बंगाल की जनता सड़कों पर उतर आएगी। यह प्रदर्शन 12 राज्यों में आज से शुरू हो रही SIR प्रक्रिया के खिलाफ TMC का सबसे बड़ा कदम है, जिसे पार्टी ने ‘बीजेपी की साजिश’ करार दिया है।

ममता बनर्जी पारंपरिक सफेद सूती साड़ी और चप्पल में नजर आईं, जबकि उनके भतीजे और TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी भी रैली में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। रैली में तिरंगे और TMC के झंडे लहराते कार्यकर्ताओं ने ‘लोकतंत्र बचाओ’, ‘बंगाल का वोट बंगाल का हक’ और ‘संविधान जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए। ममता ने मार्च के दौरान कहा, “SIR का मतलब है वैध वोटरों को हटाना। यह संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ साजिश है। हम संविधान की शपथ लेकर लड़ेंगे।” यह रैली रेड रोड से गुजरी, जहां भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात थी।

SIR क्या है? TMC का विरोध क्यों?

चुनाव आयोग ने 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (जिनमें पश्चिम बंगाल, बिहार, यूपी आदि शामिल) में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया है। इसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर 13 दस्तावेजों (जैसे आधार, वोटर आईडी, राशन कार्ड) से वोटरों की जानकारी वेरिफाई करेंगे। आयोग का दावा है कि यह 2002 के SIR पर आधारित है और फर्जी वोटरों को हटाने के लिए जरूरी है।

लेकिन TMC और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि यह NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) का छिपा रूप है, जिसका मकसद अल्पसंख्यकों और गरीबों के वोट हड़पना है। ममता ने कहा, “बीजेपी चाहती है कि बंगाल में उनके फायदे के लिए वोटर लिस्ट बदली जाए। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यह साजिश है।” TMC ने दावा किया कि SIR से वैध मतदाताओं को परेशान किया जाएगा, और पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है। BLOs भी सुरक्षा और ‘ऑन-ड्यूटी’ स्टेटस की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं।

BJP का पलटवार: ‘साफ नीयत, साफ वोटर लिस्ट’

BJP ने SIR का स्वागत किया और TMC के विरोध को ‘भय का प्रचार’ बताया। प्रदेश BJP अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने कहा, “ममता दीदी घबरा रही हैं क्योंकि फर्जी वोटरों की लिस्ट साफ हो जाएगी। यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए है।” BJP ने भी 4 नवंबर को उत्तर 24 परगना के पानीहाटी में काउंटर रैली निकालने का ऐलान किया है, जहां TMC के आरोपों का जवाब दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि SIR केवल वेरिफिकेशन है, कोई नाम हटाना नहीं।

राजनीतिक संदर्भ: 2026 चुनाव से पहले बड़ा दांव

यह रैली TMC की रणनीति का हिस्सा है, जो बंगाली अस्मिता और संविधान रक्षा को जोड़कर BJP को घेरने की कोशिश कर रही है। ममता ने पहले भी बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर BJP को निशाना बनाया था। विपक्षी नेता जैसे महुआ मोइत्रा ने कहा, “यह BJP का वोट बैंक इंजीनियरिंग का प्रयास है।” TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में पेशी का हवाला देकर रैली में न हिस्सा लेने की सफाई दी।

सोशल मीडिया पर #SaveDemocracy और #SIRConspiracy ट्रेंड कर रहा है, जहां TMC समर्थक वीडियो शेयर कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह प्रदर्शन 2026 के बंगाल चुनाव में TMC के लिए वोटर मोबिलाइजेशन का हथियार बनेगा। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट SIR को मंजूरी देता है, तो TMC को बैकफुट पर आना पड़ सकता है।

फिलहाल, SIR प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और बंगाल में राजनीतिक तापमान चरम पर है। अपडेट्स के लिए बने रहें!

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