राजनीति

भाषा विवाद में सिद्धारमैया का तीखा प्रहार: ‘अंग्रेजी-हिंदी बच्चों का नेचुरल टैलेंट खत्म कर रहे’, मातृभाषा को माध्यम बनाने का आह्वान

भाषा विवाद में सिद्धारमैया का तीखा प्रहार: ‘अंग्रेजी-हिंदी बच्चों का नेचुरल टैलेंट खत्म कर रहे’, मातृभाषा को माध्यम बनाने का आह्वान

आज कर्नाटक राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर बेंगलुरु में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने और कन्नड़ भाषा की उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी और हिंदी का दबदबा कन्नड़ बच्चों के प्राकृतिक टैलेंट को कमजोर कर रहा है, जबकि विकसित देशों के बच्चे अपनी मातृभाषा में सोचते-सीखते-स्वप्न देखते हैं। सिद्धारमैया ने मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने के लिए कानून लाने की मांग की, ताकि कन्नड़ संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।

सिद्धारमैया का पूरा बयान: केंद्र पर ‘सौतेली मां’ का इल्जाम

भाषा थोपने का आरोप: सिद्धारमैया ने कहा, “केंद्र सरकार कन्नड़ को नजरअंदाज कर हिंदी थोप रही है। कर्नाटक केंद्र को 4.5 लाख करोड़ रुपये का राजस्व देता है, लेकिन बदले में ‘तुच्छ राशि’ ही मिलती है। यह सौतेली मां का व्यवहार है। हिंदी और संस्कृत को अनुदान मिलता है, लेकिन अन्य भाषाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।”

बच्चों के टैलेंट पर असर: उन्होंने चिंता जताई, “विकसित देशों के बच्चे अपनी मातृभाषा में सोचते, सीखते और सपने देखते हैं, लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत है। अंग्रेजी और हिंदी हमारे बच्चों का नेचुरल टैलेंट कमजोर कर रहे हैं। शिक्षा में कन्नड़ की उपेक्षा से कई समस्याएं पैदा हुई हैं।” सिद्धारमैया ने कन्नड़ को ‘भाषा के रूप में दिल की भाषा’ बनाने का संकल्प दिलाया।

आह्वान: “कन्नड़-विरोधी तत्वों का विरोध करें। कन्नड़ भाषा और संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लें। मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने के लिए कानून जरूरी है।”

विवाद की पृष्ठभूमि: कन्नड़ vs हिंदी का पुराना झगड़ा

यह बयान कर्नाटक में भाषा विवाद का नया अध्याय है, जो हाल ही में NEP 2020 (नई शिक्षा नीति) के तहत हिंदी को वैकल्पिक भाषा बनाने के प्रस्ताव से भड़का। कर्नाटक सरकार ने तीन-भाषा फॉर्मूला को अनिवार्य करने से इनकार कर दिया था, जिसे BJP ने ‘क्षेत्रीय भावना’ का विरोध बताया। सिद्धारमैया का यह बयान राज्योत्सव पर कन्नड़ एकता का प्रतीक है, लेकिन केंद्र पर ‘हिंदी राज’ थोपने का आरोप लगाकर राजनीतिक तापमान बढ़ा रहा है। BJP ने इसे ‘वोटबैंक पॉलिटिक्स’ करार दिया, जबकि कन्नड़ संगठन इसका समर्थन कर रहे हैं।

सिद्धारमैया का यह बयान दक्षिण भारत में भाषाई गौरव को मजबूत करने की कोशिश लगता है।

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