केरल ने रचा इतिहास: भारत का पहला राज्य बना चरम गरीबी मुक्त
केरल ने रचा इतिहास: भारत का पहला राज्य बना चरम गरीबी मुक्त
हां, यह खबर बिल्कुल सही है। 1 नवंबर 2025 को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने राज्य विधानसभा के विशेष सत्र में ऐलान किया कि केरल अब भारत का पहला राज्य बन गया है, जहां चरम गरीबी (एक्सट्रीम पॉवर्टी) पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। यह घोषणा ‘केरल पिरवी’ (राज्य स्थापना दिवस) के अवसर पर की गई, जो 1956 में केरल के गठन की 69वीं वर्षगांठ थी। विजयन ने इसे “नवा केरल” (नया केरल) के निर्माण का एक मील का पत्थर बताया।
कैसे हासिल की यह उपलब्धि?
परियोजना की शुरुआत: 2021 में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक में ‘एक्सट्रीम पॉवर्टी एराडिकेशन प्रोजेक्ट’ (EPEP) को मंजूरी दी गई। यह विधानसभा चुनाव के प्रमुख वादों में से एक था।
लक्ष्य और कार्यान्वयन: राज्य सरकार ने 64,006 सबसे कमजोर परिवारों (कुल 1,03,099 व्यक्ति) की पहचान की। इनमें से प्रत्येक परिवार के लिए अनोखी जरूरतों के आधार पर ‘माइक्रो-प्लान’ बनाए गए। एक-समान नीति के बजाय, भोजन, स्वास्थ्य, आवास, आय स्रोत और शिक्षा पर फोकस किया गया।
21,263 लोगों को पहली बार राशन कार्ड, आधार कार्ड और पेंशन जैसी सुविधाएं मिलीं।
4,394 परिवारों को आजीविका परियोजनाओं से जोड़ा गया।
कुल खर्च: 1,000 करोड़ रुपये से अधिक।
सहयोग: स्थानीय स्वशासन संस्थाएं (LSG), कुडुंबश्री वॉलंटियर्स और केरल इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन (KILA) ने पारदर्शी तरीके से सर्वे और समीक्षा की। यह प्रक्रिया राजनीतिक सीमाओं से परे चली।
डेटा आधार: विश्व बैंक के मानक के अनुसार, चरम गरीबी का मतलब प्रतिदिन 180 रुपये से कम आय है। नीति आयोग के 2023 मल्टी-डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) में केरल की दर सिर्फ 0.55% थी (राष्ट्रीय औसत 14.96%)। नवीनतम आंकड़ों में यह 0.48% तक गिर गई।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
सरकार का दावा: विजयन ने कहा, “यह केरल के लोगों की सामूहिक जीत है। भूमि सुधार, सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी पुरानी नीतियों का परिणाम है।” उन्होंने 1970 के दशक के संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि केरल ने गरीबी, उच्च जन्म दर जैसी समस्याओं से उबरकर सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) में अग्रणी बन गया।
विपक्ष का विरोध: कांग्रेस-नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने इसे “शुद्ध धोखा” (pure fraud) करार दिया। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशियन ने सदन के नियमों का उल्लंघन बताते हुए सत्र का बहिष्कार किया और नारे लगाते हुए वॉकआउट कर लिया। उनका कहना था कि यह लोकसभा चुनाव से पहले प्रचार स्टंट है। विजयन ने जवाब में कहा, “विपक्ष ‘फ्रॉड’ शब्द का इस्तेमाल अपनी हरकतों के लिए कर रहा है। हम वही कहते हैं जो लागू कर सकें।”
क्या यह वाकई संभव है?
यह दावा केरल की लंबी परंपरा पर टिका है—उच्च साक्षरता (94%+), मजबूत सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सामाजिक आंदोलनों का इतिहास। हालांकि, कुछ विद्वान और कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह बहुआयामी गरीबी को पूरी तरह कवर करता है, या सिर्फ आर्थिक संकेतकों पर फोकस है। फिर भी, यह दक्षिण एशिया में एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
केरल की यह सफलता अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा हो सकती है।
