शतरंज जगत में भारत का ऐतिहासिक गौरव: विश्वनाथन आनंद के नाम पर FIDE वर्ल्ड कप ट्रॉफी
शतरंज जगत में भारत का ऐतिहासिक गौरव: विश्वनाथन आनंद के नाम पर FIDE वर्ल्ड कप ट्रॉफी
हां, यह खबर पूरी तरह सत्यापित है और भारतीय शतरंज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। 31 अक्टूबर 2025 को गोवा के पणजी में FIDE वर्ल्ड चेस कप 2025 के भव्य उद्घाटन समारोह के दौरान नई ट्रॉफी का अनावरण किया गया, जिसे विश्वनाथन आनंद ट्रॉफी (Viswanathan Anand Trophy) नाम दिया गया। यह ट्रॉफी भारत के पहले ग्रैंडमास्टर और पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद के सम्मान में नामित की गई है, जो शतरंज की दुनिया में भारत की उभरती शक्ति का प्रतीक है।
ट्रॉफी और समारोह की झलक
ट्रॉफी का डिजाइन: यह एक रनिंग ट्रॉफी है, जो भविष्य के विजेताओं को सौंपी जाएगी। इसमें भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर को एक नृत्य मुद्रा में उकेरा गया है, जो भारतीय संस्कृति और शतरंज की रणनीतिक सुंदरता को दर्शाता है। ट्रॉफी 26 नवंबर 2025 को फाइनल मैच के बाद विजेता को सौंपी जाएगी।
उद्घाटन समारोह: समारोह में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और FIDE अध्यक्ष आर्काडी डवोर्कोविच उपस्थित थे। AICF अध्यक्ष नितिन नारंग ने घोषणा की, “यह ट्रॉफी शतरंज के राजा और भारत के पहले ग्रैंडमास्टर श्री विश्वनाथन आनंद के सम्मान में स्थापित की गई है। यह भारतीय शतरंज की प्रगति का प्रतीक है।”
टूर्नामेंट का स्वरूप: यह USD 2 मिलियन (करीब 16.8 करोड़ रुपये) पुरस्कार राशि वाला इवेंट है, जिसमें 80 देशों के 206 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। यह सिंगल-एलिमिनेशन फॉर्मेट में है, जिसमें आठ नॉकआउट राउंड हैं। टॉप-3 फिनिशर्स को 2026 कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए स्पॉट मिलेंगे, जो विश्व चैंपियनशिप का द्वार है।
विश्वनाथन आनंद का योगदान: क्यों यह सम्मान?
विश्वनाथन आनंद, जिन्हें “मद्रास टाइगर” के नाम से जाना जाता है, ने 1988 में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया और 2000, 2007, 2008, 2010, 2012 में विश्व चैंपियन बने। उन्होंने भारत में शतरंज को लोकप्रिय बनाया, जिससे नई पीढ़ी जैसे डी. गुकेश, आर. प्रग्नानंदhaa और निहाल सरीन उभरे। FIDE अध्यक्ष डवोर्कोविच ने कहा, “भारत शतरंज की आधुनिक महाशक्ति है, और आनंद इसका केंद्रीय स्तंभ हैं।” यह पहली बार है जब 2002 के बाद भारत में FIDE वर्ल्ड कप हो रहा है—उस समय आनंद ने ही फाइनल जीता था।
यह नामकरण न केवल आनंद के व्यक्तिगत योगदान को मान्यता देता है, बल्कि भारत को वैश्विक शतरंज हब के रूप में स्थापित करता है। टूर्नामेंट 1 नवंबर से शुरू हो चुका है, और भारतीय खिलाड़ी मजबूत दावेदार हैं।
