क्रिकेट के मैदान से सत्ता की पिच तक: पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन तेलंगाना सरकार में मंत्री बने
क्रिकेट के मैदान से सत्ता की पिच तक: पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन तेलंगाना सरकार में मंत्री बने
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने आज एक नई ‘इनिंग्स’ शुरू की है। कांग्रेस नेता अजहरुद्दीन ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की कैबिनेट में मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। राजभवन में आयोजित सादगीपूर्ण समारोह में राज्यपाल जिश्नु देव वर्मा ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस नियुक्ति के साथ तेलंगाना कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या 16 हो गई है, जबकि कुल अनुमत संख्या 18 (मुख्यमंत्री सहित) है। यह कदम जुभली हिल्स विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले उठाया गया है, जहां मुस्लिम वोटरों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है।
शपथ ग्रहण समारोह: सीएम और दिग्गजों की मौजूदगी में
कब और कैसे? दोपहर 12:15 बजे राजभवन में शपथ ली गई। समारोह में सीएम रेवंत रेड्डी, कांग्रेस हाई कमांड के प्रतिनिधि और अन्य नेता मौजूद रहे। अजहरुद्दीन ने सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर शपथ ली और रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए।
अजहरुद्दीन का बयान: शपथ के बाद उन्होंने कहा, “मैं खुश हूं। पार्टी हाई कमांड, जनता और समर्थकों का आभार। यह जुभली हिल्स उपचुनाव से जुड़ा नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उनकी मेहनत और पार्टी के विश्वास का नतीजा है।
सीएम रेवंत रेड्डी ने ट्वीट कर बधाई दी: “मोहम्मद अजहरुद्दीन को मंत्री बनने पर बधाई।” यह नियुक्ति कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, क्योंकि कैबिनेट में पहले कोई मुस्लिम प्रतिनिधि नहीं था।
अजहरुद्दीन का सफर: क्रिकेट से राजनीति तक
मोहम्मद अजहरुद्दीन (उम्र 62 वर्ष) क्रिकेट के मैदान पर अपनी शानदार फील्डिंग, कवर ड्राइव और कप्तानी के लिए मशहूर हैं। उन्होंने 1984 से 2000 तक भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें 99 टेस्ट (37 शतक) और 334 वनडे (7 शतक) खेले। वे एशिया कप 1990-91 और 1995 में कप्तान रहे, जहां उन्होंने श्रीलंका को हराया। हालांकि, 2000 में मैच फिक्सिंग आरोपों से करियर प्रभावित हुआ, लेकिन 2012 में बरी हो गए।
राजनीति में प्रवेश 2009 में हुआ, जब वे कांग्रेस से मोरादाबाद (उत्तर प्रदेश) से सांसद बने। 2023 में तेलंगाना के जुभली हिल्स से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन बीआरएस के मगंती गोपीनाथ से हार गए। अगस्त 2025 में राज्यपाल कोटे से विधान परिषद (एमएलसी) सदस्य बने। वे तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमिटी (TPCC) के वर्किंग प्रेसिडेंट हैं।
सियासी मायने: उपचुनाव और विवाद
उपचुनाव कनेक्शन: जुभली हिल्स उपचुनाव (जून में गोपीनाथ की हृदयाघात से मौत के बाद) कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। यहां 1 लाख से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं, जो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। अजहरुद्दीन की नियुक्ति को अल्पसंख्यक वोट साधने की रणनीति बताया जा रहा है।
बीजेपी का हमला: तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष रामचंद्र राव ने इसे ‘अल्पसंख्यक तुष्टिकरण’ करार दिया। उन्होंने कहा, “उपचुनाव से ठीक पहले यह फैसला वोट बैंक पॉलिटिक्स है।” बीजेपी ने कांग्रेस पर ‘धर्म आधारित राजनीति’ का आरोप लगाया।
कांग्रेस का बचाव: पार्टी ने इसे ‘समावेशी प्रतिनिधित्व’ बताया। अजहरुद्दीन ने कहा, “मुझे देशभक्ति का सर्टिफिकेट किसी से नहीं चाहिए।”
यह नियुक्ति कांग्रेस को अल्पसंख्यक समुदाय में मजबूत करने में मदद करेगी, खासकर 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले।
आगे क्या? पोर्टफोलियो का इंतजार
अजहरुद्दीन को कौन सा विभाग मिलेगा, इसका ऐलान जल्द होगा। संभावना है कि खेल, युवा मामलों या अल्पसंख्यक कल्याण से जुड़ा हो। कैबिनेट में अभी दो जगहें खाली हैं, जहां और फेरबदल संभव।
अजहरुद्दीन की यह ‘नई पारी’ क्रिकेट प्रेमियों और राजनीतिक विश्लेषकों के लिए रोचक है। क्या वे सत्ता के मैदान पर भी ‘कवर ड्राइव’ मारेंगे? अपडेट्स के लिए बने रहें।
