जेवर एयरपोर्ट पर पहली ट्रायल फ्लाइट की सफल लैंडिंग: घरेलू उड़ानों के लिए रास्ता साफ
जेवर एयरपोर्ट पर पहली ट्रायल फ्लाइट की सफल लैंडिंग: घरेलू उड़ानों के लिए रास्ता साफ
उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस A320 विमान ने बुधवार को पहली कैलिब्रेशन (ट्रायल) फ्लाइट सफलतापूर्वक पूरी की, जो दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) से उड़ान भरकर जेवर की 3,900 मीटर लंबी रनवे पर लैंड हुई। लैंडिंग के बाद विमान को वॉटर सैल्यूट (पानी की सलामी) दी गई, जो एविएशन ट्रेडिशन का हिस्सा है। यह सफलता एयरपोर्ट को एरोड्रोम लाइसेंस मिलने और घरेलू उड़ानों के लिए तैयार होने का संकेत देती है।
ट्रायल फ्लाइट का पूरा विवरण: 15 मिनट की उड़ान, डेटा कलेक्शन
कब और कैसे? फ्लाइट दोपहर 1:30 बजे दिल्ली से रवाना हुई और जेवर पर सॉफ्ट लैंडिंग की। विमान पर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और सिविल एविएशन के प्रतिनिधि सवार थे। लैंडिंग के बाद 5 मिनट रुकने के बाद विमान ने टेकऑफ भी किया। पूरी प्रक्रिया में रनवे परफॉर्मेंस, नेविगेशन सिस्टम, इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और इमरजेंसी प्रोटोकॉल की टेस्टिंग हुई।
डेटा एनालिसिस: फ्लाइट के दौरान एकत्रित तकनीकी डेटा को डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को भेजा जाएगा। DGCA की जांच पूरी होने के बाद एयरपोर्ट को लाइसेंस मिलेगा, जो संचालन की अनुमति देगा।
ट्रायल शेड्यूल: यह पहली फ्लाइट थी, जो 15 अक्टूबर से शुरू हुए ILS और PAPI (प्रिसिजन अप्रोच पाथ इंडिकेटर) कैलिब्रेशन टेस्ट्स का हिस्सा है। आगे के ट्रायल 15 दिसंबर तक चलेंगे, जिसमें 25 घरेलू और 3 अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स शामिल हैं।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) के अधिकारियों ने इसे “भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए बड़ा मील का पत्थर” बताया। CEO अरुण वीर सिंह ने कहा, “यह सफलता हमें कमर्शियल ऑपरेशंस शुरू करने के लक्ष्य के करीब ले जाती है।”
निर्माण स्टेटस: 85% काम पूरा, अप्रैल 2026 से पहली कमर्शियल फ्लाइट
प्रोग्रेस: एयरपोर्ट का 85% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। CAT-1 और CAT-3 ILS सिस्टम (कोहरे में विजिबिलिटी बढ़ाने वाले) अक्टूबर में ही टेस्ट हो चुके हैं। पहला फेज (1 रनवे, 12 मिलियन पैसेंजर्स कैपेसिटी) अप्रैल 2026 से चालू होगा।
उद्घाटन प्लान: सिविल एविएशन मिनिस्टर किंजरापु राम मोहन नायडू ने सितंबर में ऐलान किया था कि 30 अक्टूबर 2025 को उद्घाटन होगा, और 45 दिनों के अंदर फ्लाइट ऑपरेशंस शुरू। पहले फेज में रोज 65 फ्लाइट्स (62 घरेलू, 2 अंतरराष्ट्रीय, 1 कार्गो) संभव होंगी।
कनेक्टिविटी: घरेलू उड़ानें मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, देहरादून, हुबली, हैदराबाद जैसे शहरों से। अंतरराष्ट्रीय ट्रायल सिंगापुर, दुबई, ज्यूरिख के लिए प्लान्ड हैं।
यह एयरपोर्ट दिल्ली के IGI एयरपोर्ट के लोड को कम करेगा और यूपी को एविएशन हब बनाएगा। पूर्ण क्षमता पर यह एशिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनेगा।
भविष्य का प्रभाव: यात्रियों और इकोनॉमी को फायदा
पैसेंजर्स के लिए: जेवर एयरपोर्ट दिल्ली-NCR के निवासियों के लिए सुविधाजनक होगा, खासकर ट्रैफिक और प्रदूषण से परेशान यात्रियों के लिए। यमुना एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी आसान।
इकोनॉमी बूस्ट: कार्गो लॉजिस्टिक्स हब बनेगा, जो एमएसएमई और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देगा। यूपी सरकार का दावा है कि इससे 1 लाख से ज्यादा जॉब्स क्रिएट होंगी।
चुनौतियां: निर्माण में पहले देरी हुई थी (कोविड और लैंड एक्विजिशन इश्यूज से), लेकिन अब सब ट्रैक पर है।
यह सफल ट्रायल न केवल जेवर बल्कि पूरे NCR के लिए खुशखबरी है। अगर ट्रायल्स स्मूथ रहीं, तो अप्रैल 2026 से आपकी अगली फ्लाइट जेवर से उड़ सकती है!
