उत्तराखंड सैन्य धाम विवाद: पीएम मोदी के लोकार्पण से पहले एडवोकेट विकेश नेगी का पीएमओ को पत्र, हरीश रावत ने खोला मोर्चा
उत्तराखंड सैन्य धाम विवाद: पीएम मोदी के लोकार्पण से पहले एडवोकेट विकेश नेगी का पीएमओ को पत्र, हरीश रावत ने खोला मोर्चा
उत्तराखंड के देहरादून जिले के गुनियाल गांव में बन रहे सैन्य धाम (Sainya Dham) एक बार फिर से सुर्खियों और विवादों के केंद्र में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी उत्तराखंड दौरे से ठीक पहले, एडवोकेट विकेश नेगी ने सैन्य धाम के निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने बजट ओवररन, भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी और पर्यावरणीय उल्लंघनों जैसे मुद्दों को उठाया है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस मुद्दे पर तीखा प्रहार किया है, इसे ‘भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा’ करार देते हुए।
यह विवाद तब और तेज हो गया है जब राज्य सरकार ने राज्य स्थापना दिवस (9 नवंबर 2025) के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का ऐलान किया है। सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी इसी दौरान सैन्य धाम का औपचारिक लोकार्पण करेंगे, जो उत्तराखंड को पांचवें धाम के रूप में विकसित करने का केंद्र बिंदु है। सैन्य धाम, जो शहीद सैनिकों की शौर्य गाथाओं को समर्पित है, लंबे समय से निर्माण विलंब, बजट वृद्धि और कानूनी चुनौतियों का शिकार रहा है।
एडवोकेट विकेश नेगी की शिकायत: बजट कई गुना बढ़ा, कानूनी लड़ाई जारी
एडवोकेट विकेश नेगी, जो लंबे समय से सैन्य धाम निर्माण के खिलाफ नैनीताल हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर रहे हैं, ने पीएमओ को भेजे पत्र में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि परियोजना की शुरुआत में अनुमानित बजट (लगभग 200 करोड़ रुपये) अब कई गुना बढ़कर 800 करोड़ से अधिक हो चुका है। निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा (2022 तक पूरा होने का लक्ष्य) से तीन वर्ष विलंबित हो गया है। नेगी ने भूमि अधिग्रहण में अनियमितताओं का भी जिक्र किया, जहां निजी जमीनों को अधिसूचित दरों से कम पर लिया जाना बताया गया।
नेगी ने पत्र में मांग की है कि लोकार्पण से पहले एक स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए। उन्होंने कहा, “यह पीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट है, लेकिन इसमें पारदर्शिता की कमी विवादों को जन्म दे रही है। हाईकोर्ट तक पहुंच चुका यह मामला अब केंद्र स्तर पर उठाना जरूरी है।” नेगी की यह कानूनी लड़ाई 2023 से जारी है, जिसमें पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की अनदेखी का भी आरोप है।
हरीश रावत का तीखा प्रहार: ‘भ्रष्टाचार पर टिकी नींव, आपदा का खतरा’
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सैन्य धाम विवाद पर मोर्चा खोलते हुए इसे शहीदों की स्मृति के अपमान का प्रतीक बताया। एक सार्वजनिक बयान में रावत ने कहा, “जहां बलिदान और शौर्य गाथाओं का प्रतीक सैन्य धाम बनाया गया है, उसी की नींव भ्रष्टाचार पर रखी गई है। इससे बड़ी भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा क्या होगी? खेल मैदान और नालों को घेरकर सैन्य धाम बना दिया गया है।”
रावत ने पर्यावरणीय जोखिमों पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान प्राकृतिक नालों-खालों पर अतिक्रमण किया गया, जो राज्य के जल निकासी तंत्र के महत्वपूर्ण आउटलेट हैं। “यह निकट भविष्य में एक बड़ी आपदा का कारण बन सकता है। सैन्य धाम को घेरने के चक्कर में हमारी प्राकृतिक धरोहर को खतरा पैदा हो गया है,” रावत ने चेतावनी दी। उन्होंने इन विवादों को सैन्य धाम की गरिमा के लिए ‘निंदनीय’ बताते हुए सरकार से तत्काल सुधार की मांग की।
रावत का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जहां विपक्षी नेता इसे ‘सियासी हथियार’ बता रहे हैं। कांग्रेस ने इसे राज्य सरकार की ‘विफलता’ का प्रतीक करार दिया है।
सियासत तेज: भाजपा का बचाव, विपक्ष का हमला
इस पत्र और बयान के बाद उत्तराखंड की सियासत गरम हो गई है। भाजपा ने इसे ‘विपक्ष का नकारात्मक प्रचार’ बताते हुए कहा कि सैन्य धाम एक राष्ट्रीय गौरव का प्रोजेक्ट है, जो तय समय पर पूरा हो चुका है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने हरीश रावत को निशाना साधते हुए उनके कार्यकाल की याद दिलाई। जोशी ने कहा, “रावत ने खुद कई परियोजनाओं में विलंब किया। सैन्य धाम शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि है, इसे बदनाम करने की कोशिश निंदनीय है।”
विपक्ष ने हालांकि इसे ‘भ्रष्टाचार का खुलासा’ बताते हुए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है। नेगी की याचिका पर हाईकोर्ट ने पहले ही निर्माण कार्य पर स्टे आदेश जारी कर चुका है, लेकिन लोकार्पण की तैयारी जारी है।
सैन्य धाम का बैकग्राउंड: विवादों की लंबी फेहरिस्त
सैन्य धाम की नींव 2019 में पूर्व पीएम नरेंद्र मोदी ने रखी थी, जिसे उत्तराखंड को ‘धामों की भूमि’ बनाने के विजन का हिस्सा बताया गया। यह चार धामों (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ) के बाद पांचवां धाम होगा। परियोजना में शहीद स्मारक, संग्रहालय और प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं। हालांकि, 2023 से यह विवादों में घिरा रहा:
बजट वृद्धि: 200 करोड़ से बढ़कर 800 करोड़।
विलंब: कोविड और कानूनी चुनौतियों से प्रभावित।
पर्यावरण मुद्दे: नदी किनारे निर्माण से बाढ़ जोखिम।
कानूनी लड़ाई: नेगी की याचिकाओं से हाईकोर्ट में कई सुनवाई।
आगे क्या? लोकार्पण पर सवाल
राज्य सरकार का दावा है कि सभी मुद्दे सुलझ चुके हैं, लेकिन नेगी के पत्र के बाद पीएमओ से कोई प्रतिक्रिया न आने पर सस्पेंस बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन पर बहस छेड़ सकता है। हरीश रावत ने कहा, “शहीदों का सम्मान भ्रष्टाचार से नहीं हो सकता। सरकार को जवाब देना होगा।”
यह मामला न केवल सियासी, बल्कि राज्य की सैन्य विरासत और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है।
