चीन को कड़ा संदेश! ट्रंप के टैरिफ दबाव के बीच भारत-अमेरिका 10 साल का ऐतिहासिक रक्षा करार
ट्रंप प्रशासन के बढ़ते टैरिफ दबाव के बीच भारत और अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने 10 साल के ‘फ्रेमवर्क फॉर द यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप’ पर हस्ताक्षर किए। राजनाथ सिंह ने इसे “रणनीतिक अभिसरण का सिग्नल” बताया, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और चीन के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने का संकेत देता है। यह करार ASEAN डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग-प्लस (ADMM-Plus) के साइडलाइंस पर साइन हुआ, जहां हेगसेथ ने चीनी डिफेंस मिनिस्टर डोंग जुन से ताइवान और साउथ चाइना सी पर चिंताएं भी जताईं।
करार का बैकग्राउंड: टैरिफ टेंशन के बीच स्ट्रैटेजिक मूव
ट्रंप सरकार ने हाल ही में भारत पर 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जो व्यापार वार्ताओं को प्रभावित कर रही है। फिर भी, यह रक्षा करार दोनों देशों की साझा चिंताओं—खासकर चीन की आक्रामकता—को दर्शाता है। हेगसेथ ने कहा, “हमारी डिफेंस टाईज कभी इतनी मजबूत नहीं रहीं। यह पार्टनरशिप क्षेत्रीय स्थिरता और डिटरेंस का कोर स्टोन है।” राजनाथ ने एक्स पर पोस्ट किया, “यह करार हमारी मजबूत डिफेंस पार्टनरशिप में नया दौर लाएगा।” यह 2016 के मेजर डिफेंस पार्टनर डिजिग्नेशन को मजबूत करता है, जो QUAD और iCET जैसी पहलों से जुड़ा है।
मुख्य विशेषताएं: क्या मिलेगा भारत को?
नीति दिशा: 10 साल के लिए ओवरऑल पॉलिसी गाइडेंस, जिसमें जॉइंट एक्सरसाइज, इंटेलिजेंस शेयरिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर शामिल।
मेक इन इंडिया बूस्ट: डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, जैसे P-8I विमान और ड्रोन प्रोजेक्ट्स। यह भारत की स्वदेशी उत्पादन क्षमता को मजबूत करेगा।
इंडो-पैसिफिक फोकस: कोऑर्डिनेशन बढ़ाना, खासकर साउथ चाइना सी और ताइवान स्ट्रेट में, जहां चीन की नौसेना सक्रिय है।
अन्य लाभ: इंफॉर्मेशन शेयरिंग और टेक कोऑपरेशन से भारत को एडवांस्ड सिस्टम्स (जैसे मिसाइल डिफेंस) मिलेंगे, जो LAC पर चीन के खिलाफ उपयोगी साबित होंगे।
चीन को सिग्नल: इंडो-पैसिफिक में नया संतुलन
यह करार स्पष्ट रूप से चीन को संदेश है। हेगसेथ ने डोंग जुन से बात में बीजिंग की नेवल एक्टिविटी पर चिंता जताई, जो US के एलाइड्स (जैसे भारत) को प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह QUAD को मजबूत करेगा और भारत को US के साथ स्ट्रैटेजिक एलाइनमेंट देगा, बिना फॉर्मल एलाइंस के। ब्रह्मा चेल्लaney जैसे एनालिस्ट ने एक्स पर लिखा, “ट्रंप के टैरिफ प्रेशर के बावजूद भारत ने डिफेंस टाईज को प्राथमिकता दी, जो चीन थ्रेट के कारण जरूरी है। लेकिन काउंटर-लिवरेज बनाने की जरूरत है।”
प्रतिक्रियाएं: पॉजिटिव वेव्स, लेकिन ट्रेड चिंताएं बरकरार
भारतीय पक्ष: EAM एस जयशंकर ने 27 अक्टूबर को US सेक्रेटरी मार्को रुबियो से मिलकर बाइलेटरल रिलेशंस पर चर्चा की। BJP ने इसे “मोदी की डिप्लोमेसी की जीत” बताया।
अमेरिकी पक्ष: हेगसेथ ने एक्स पर फोटोज शेयर कर कहा, “स्ट्रैटेजिक अलाइनमेंट पर बिल्ट ट्रस्ट।” ट्रंप प्रशासन इसे इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी का हिस्सा मान रहा है।
सोशल मीडिया: यूजर्स इसे “चीन को चेकमेट” बता रहे, लेकिन कुछ ने टैरिफ पर चिंता जताई: “डिफेंस स्ट्रॉन्ग, लेकिन ट्रेड डील कब?”
विपक्ष: कांग्रेस ने कहा, “अच्छा कदम, लेकिन ट्रंप के टैरिफ से किसानों को नुकसान न हो।”
यह करार भारत को ग्लोबल पावरहाउस बनाने की दिशा में बड़ा स्टेप है, लेकिन ट्रेड टेंशन्स को बैलेंस करना चुनौती। क्या लगता है, अगला ट्रेड डील कब?
