दिवाली की रात प्रदूषण का कहर: लखनऊ में AQI 1317, दिल्ली 991 के साथ सांस लेना मुश्किल; क्या है सच्चाई और खतरा?
दिवाली की रात प्रदूषण का कहर: लखनऊ में AQI 1317, दिल्ली 991 के साथ सांस लेना मुश्किल; क्या है सच्चाई और खतरा?
दिवाली की चमक-दमक के बाद देश की राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्मॉग का काला साया छा गया है। सोशल मीडिया पर वायरल दावों के मुताबिक, दिवाली की रात लखनऊ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 1317 और दिल्ली का 991 तक पहुंच गया, जो ‘हैजर्डस’ से कहीं आगे की स्थिति दर्शाता है। हालांकि, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ये आंकड़े अतिरंजित हो सकते हैं—दिल्ली का औसत AQI 451 रहा, जबकि कुछ स्टेशनों पर 500-600 तक पहुंचा। लखनऊ में आधिकारिक AQI 222 दर्ज किया गया, लेकिन स्थानीय मॉनिटरिंग से पटाखों के धुएं ने पीक पर 1300+ का स्तर छुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि पटाखों, पराली जलाने और वाहनों के धुएं ने मिलकर यह जहर फैलाया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं—बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा रोगियों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और दावों ने भ्रम पैदा किया कि दिल्ली का AQI 1000 पार कर गया, लेकिन CPCB के डैशबोर्ड पर औसत 451 (सीवियर) रहा। लखनऊ में भी स्थानीय मॉनिटरों ने रात के समय 1317 का आंकड़ा दिखाया, जो सामान्य मॉनिटरिंग से कहीं ज्यादा है। इंडिया टुडे ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में 34 स्टेशन ‘रेड जोन’ में रहे, जहां AQI 400+ रहा।
AQI की सच्चाई: आधिकारिक vs वायरल आंकड़े
– दिल्ली: CPCB के अनुसार, 21 अक्टूबर सुबह 8 बजे औसत AQI 451 (सीवियर कैटेगरी, 401-500)। वजीरपुर (408), बावना (423) और जहांगीरपुरी (407) जैसे इलाकों में पीक 500-600 तक पहुंचा। दिवाली रात (20 अक्टूबर) में 24-घंटे औसत 345 था, जो ‘वेरी पुअर’ (301-400) था, लेकिन पटाखों के बाद रात 10 बजे के आसपास कुछ स्टेशनों पर 991 जैसा स्पाइक देखा गया।
– लखनऊ: CPCB डेटा में औसत 222 (‘पुअर’ कैटेगरी, 201-300), लेकिन गोमतीनगर और हजरतगंज जैसे क्षेत्रों में रात के समय PM2.5 कणों के कारण AQI 1317 तक उछला। यह पटाखों के तत्काल प्रभाव से हुआ, जो सुबह तक सामान्य हो गया।
– अन्य शहर: मुंबई (214), पटना (224), जयपुर (231)—सभी ‘पुअर’। बैंगलोर (94, सैटिस्फैक्टरी) और हैदराबाद (107, मॉडरेट) में राहत। राजस्थान का औसत 243 रहा।
दिवाली के बाद उत्तर भारत में प्रदूषण स्तर 20-30% बढ़ गया, जिसमें पटाखों से 40% योगदान रहा। न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि दिल्ली के 37 में से 34 स्टेशन ‘वेरी पुअर’ से ‘सीवियर’ में थे।
क्यों बढ़ा प्रदूषण? मुख्य वजहें
– पटाखों का धुआं: सुप्रीम कोर्ट के ग्रीन पटाखों के आदेश के बावजूद, रातभर फायरक्रैकर्स फूटे। दिल्ली में PM2.5 स्तर 300-500 μg/m³ तक पहुंचा, जो सामान्य से 10 गुना ज्यादा है।
– पराली जलाना: पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने के कारण दिल्ली की ओर धुआं बहा, जो AQI को और बिगाड़ा। बीजेपी ने AAP शासित पंजाब पर दोष मढ़ा।
– मौसम का असर: ठंडी हवाओं और कम हवा की गति ने प्रदूषकों को जमीन पर जमा कर दिया। वाहन उत्सर्जन (15%) और उद्योग (23%) ने ताव दिया।
– वायरल भ्रम: सोशल मीडिया पर 1317/991 जैसे आंकड़े PM2.5 कंसंट्रेशन (μg/m³) से भ्रमित हो सकते हैं, जो AQI से अलग है। CPCB AQI कैलकुलेटर से वास्तविक 400-500 ही निकला।
GRAP-2 (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) लागू हो गया—कंस्ट्रक्शन साइट्स बंद, 50% सरकारी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम।
स्वास्थ्य जोखिम और सावधानियां
– खतरा: AQI 400+ पर सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, हृदय रोग बढ़ते हैं। WHO के अनुसार, PM2.5 से कैंसर का खतरा 20% ज्यादा।
– सलाह: N95 मास्क पहनें, AC/फैन पर HEPA फिल्टर लगाएं, आउटडोर एक्सरसाइज न करें। बच्चों को घर में रखें। CPCB ऐप से रीयल-टाइम चेक करें।
– सरकारी कदम: दिल्ली सरकार ने 10 नो-फायर जोन घोषित किए, लेकिन पटाखों पर सख्ती की कमी रही।
यह प्रदूषण का मौसम दिल्ली-यूपी के लिए चुनौती बन गया है। क्या सरकारें दीर्घकालिक समाधान लाएंगी? फिलहाल, साफ हवा की सांस लेना मुश्किल हो गया है।
