भूकंप से दहला अफगानिस्तान, जम्मू-कश्मीर में भी महसूस हुए झटके
भूकंप से दहला अफगानिस्तान, जम्मू-कश्मीर में भी महसूस हुए झटके
अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा पर शुक्रवार शाम को 5.6 तीव्रता का मध्यम भूकंप आया, जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर सहित उत्तरी भारत के कई हिस्सों में झटके महसूस किए गए। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में 36.62°N अक्षांश और 72.72°E देशांतर पर था, जो सतह से महज 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। यह घटना लगभग शाम 5:45 बजे हुई, जब समय IST के हिसाब से दोपहर 5:30 के आसपास थी।
जम्मू-कश्मीर के कश्मीर घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में झटके महसूस होने से लोगों में दहशत फैल गई। श्रीनगर, अंनतनाग और अन्य जगहों पर लोग घरों और दफ्तरों से बाहर भागे। कश्मीर वेदर के अनुसार, झटके हल्के से मध्यम थे, लेकिन पर्याप्त थे कि लोग घबरा जाएं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गए, जिनमें लोग इमारतों से बाहर निकलते और छत के पंखे झूलते नजर आ रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी जानमाल की हानि या संपत्ति को नुकसान की कोई खबर नहीं आई है। मेट्रोलॉजिकल विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
यह भूकंप हिंदूकुश क्षेत्र की भूगर्भीय अस्थिरता का परिणाम है, जहां भारतीय और यूरेशियन प्लेट्स के टकराव से लगातार भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) ने भी इसकी तीव्रता 5.6 ही बताई, लेकिन गहराई 51 किलोमीटर बताई। अफगानिस्तान में भूकंप का केंद्र खांडूद के उत्तर-पश्चिम 47 किलोमीटर दूर था। पाकिस्तान के इस्लामाबाद, पेशावर और अबोटाबाद जैसे शहरों में भी झटके महसूस हुए।
अफगानिस्तान पहले भी भूकंपों का शिकार रहा है। अप्रैल 2025 में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके झटके दिल्ली-एनसीआर और जम्मू-कश्मीर तक पहुंचे। अगस्त 2025 में 6.0 तीव्रता का भूकंप कुनार प्रांत में आया, जिसमें 3,000 से अधिक मौतें हुईं। हिंदूकुश क्षेत्र में सुपरहिटिंग (सुपरहिटिंग) के कारण भूकंपों की तीव्रता बढ़ जाती है। राष्ट्रीय भूकंप केंद्र (NCS) ने कहा कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन निगरानी जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में भूकंप आने का खतरा हमेशा बना रहता है। जम्मू-कश्मीर में भूकंपरोधी इमारतें बनाने पर जोर दिया जा रहा है। फिलहाल, राहत कार्यों की कोई जरूरत नहीं पड़ी है, लेकिन स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर है।
