केरल में हिजाब पर हंगामा: प्राइवेट स्कूल में छात्रा को रोका, दो दिन बंद रहा स्कूल, अब मंत्री का आदेश
केरल में हिजाब पर हंगामा: प्राइवेट स्कूल में छात्रा को रोका, दो दिन बंद रहा स्कूल, अब मंत्री का आदेश
केरल के कोच्चि में एक प्राइवेट स्कूल में हिजाब को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया। पल्लुरुथी के सेंट रीटा पब्लिक स्कूल में 8वीं कक्षा की एक मुस्लिम छात्रा को हिजाब पहनने के कारण स्कूल में प्रवेश से रोकने का मामला सामने आया। इस घटना ने इतना तूल पकड़ा कि स्कूल को 13 और 14 अक्टूबर को दो दिन के लिए बंद करना पड़ा। केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने हस्तक्षेप करते हुए स्कूल को छात्रा को हिजाब के साथ पढ़ाई करने की अनुमति देने का आदेश दिया। यह मामला अब धार्मिक स्वतंत्रता और स्कूल नियमों के बीच टकराव का प्रतीक बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद 7 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब सेंट रीटा पब्लिक स्कूल (सीबीएसई से संबद्ध, लैटिन कैथोलिक चर्च द्वारा संचालित) की एक 8वीं कक्षा की छात्रा हिजाब पहनकर स्कूल पहुंची। स्कूल प्रशासन ने इसे यूनिफॉर्म नीति का उल्लंघन बताया और छात्रा को हिजाब हटाने को कहा। प्रिंसिपल सिस्टर हेलेना अल्बी के अनुसार, छात्रा जून से स्कूल की यूनिफॉर्म (पैंट और शर्ट) का पालन कर रही थी, लेकिन अचानक हिजाब पहनना शुरू किया। स्कूल ने इसे “प्यार से” हटाने को कहा, और पहले दिन छात्रा ने मान लिया। लेकिन 10 अक्टूबर को फिर हिजाब पहनकर आने पर उसे कक्षा में प्रवेश से रोक दिया गया और कॉन्फ्रेंस रूम में बैठाया गया।
छात्रा के पिता अनस ने स्कूल प्रशासन पर रूखा व्यवहार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी को गेट पर रोककर अपमानित किया गया। हिजाब पहनने से यूनिफॉर्म में क्या दिक्कत?” पिता के साथ कुछ लोग स्कूल पहुंचे और हिजाब की अनुमति मांगी, जिसे स्कूल ने इनकार कर दिया। पेरेंट-टीचर एसोसिएशन (PTA) के अध्यक्ष जोशी कैथावलप्पिल ने दावा किया कि पिता के साथ आए लोग सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़े थे और उन्होंने नन से बदतमीजी की। SDPI ने इन आरोपों का जवाब नहीं दिया। इस घटना से तनाव बढ़ा, और स्कूल ने “मानसिक तनाव” का हवाला देकर दो दिन की छुट्टी घोषित की।
सरकार और कोर्ट का हस्तक्षेप
13 अक्टूबर को स्कूल ने केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस सुरक्षा मांगी, जिसे मंजूर कर लिया गया। 14 अक्टूबर को शिक्षा मंत्री शिवनकुट्टी ने एर्नाकुलम के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (DDE) की जांच रिपोर्ट के आधार पर स्कूल को आदेश दिया कि छात्रा को हिजाब के साथ पढ़ाई करने की अनुमति दी जाए। रिपोर्ट में कहा गया कि हिजाब के कारण छात्रा को कक्षा से हटाना राइट टू एजुकेशन एक्ट और संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। शिवनकुट्टी ने कहा, “केरल धर्मनिरपेक्ष मूल्यों वाला राज्य है। कोई भी शिक्षण संस्थान संवैधानिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकता।” स्कूल को छात्रा और परिवार के मानसिक तनाव को दूर करने और 15 अक्टूबर तक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया।
हालांकि, प्रिंसिपल सिस्टर हेलेना ने DDE की रिपोर्ट को “असत्य” बताया और कहा कि स्कूल ने छात्रा को निष्कासित नहीं किया। स्कूल ने अभी तक सरकार से कोई आधिकारिक नोटिस प्राप्त न होने का दावा किया।
राजनीतिक और सामाजिक तनाव
यह मामला जल्द ही राजनीतिक रंग ले चुका है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इसे “साजिश” करार दिया, जबकि कांग्रेस के सांसद हिबी ईडन और डीसीसी अध्यक्ष मुहम्मद शियास ने मध्यस्थता की। ईडन ने बताया कि छात्रा के पिता ने स्कूल नियमों का पालन करने की सहमति दे दी, जिससे विवाद सुलझ गया। लेकिन बीजेपी ने इसे “सांप्रदायिक विभाजन” की कोशिश बताया।
15 अक्टूबर को स्कूल फिर खुला, लेकिन छात्रा स्वास्थ्य कारणों से अनुपस्थित रही। भारी पुलिस बल तैनात किया गया, और मीडिया को कैंपस में प्रवेश से रोका गया।
क्या है विवाद का मूल?
यह मामला स्कूल की यूनिफॉर्म नीति बनाम धार्मिक स्वतंत्रता के टकराव को दर्शाता है। स्कूल का कहना है कि 450 में से 117 मुस्लिम छात्र बिना हिजाब पढ़ते हैं, और नियम सभी के लिए समान हैं। वहीं, छात्रा के परिवार का तर्क है कि हिजाब उनकी धार्मिक पहचान का हिस्सा है। यह केरल में पहला ऐसा मामला नहीं है; 2019 में भी मालाप्पुरम में हिजाब पर विवाद हुआ था।
फिलहाल, सरकार के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ, लेकिन यह धार्मिक स्वतंत्रता और निजी स्कूलों की स्वायत्तता पर बहस को और हवा दे रहा है।
