उत्तराखंड

15 अक्टूबर से जिम कॉर्बेट में फिर शुरू होगा वन्यजीवों का रोमांचक सफर, पर्यटकों के लिए फुल प्रिपरेशन

15 अक्टूबर से जिम कॉर्बेट में फिर शुरू होगा वन्यजीवों का रोमांचक सफर, पर्यटकों के लिए फुल प्रिपरेशन

उत्तराखंड के रामनगर वन प्रभाग में स्थित विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के द्वार बुधवार, 15 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खुलने वाले हैं। मानसून के बाद बंद पड़े इस अभयारण्य में अब फिर से जिप और कैंटर सफारी शुरू हो जाएंगी, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए रोमांच का नया सफर लेकर आएंगी। वन विभाग ने पर्यटकों के स्वागत के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं, जिसमें नई सफारी जोन, बेहतर सुविधाएं और सख्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं। यह खुलना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, जो भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान है, हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। गर्मियों के मानसून (जुलाई से सितंबर) के दौरान बंद रहने के बाद यह 15 अक्टूबर से फिर जीवंत हो उठेगा। इस बार रामनगर वन प्रभाग में फाटो टूरिज्म जोन की शुरुआत हो रही है, जो बाघों और हाथियों की समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, बीजرانی जोन भी 15 अक्टूबर से खुलेगा, जबकि झिरना जोन वर्ष भर चालू रहने वाला एकमात्र क्षेत्र है। धिकाला जोन, जो पार्क का हृदय माना जाता है, 15 नवंबर से खुलेगा। वन विभाग के अनुसार, इन जोन में जिप सफारी के लिए 6,000 रुपये (भारतीय पर्यटकों के लिए) और 12,000 रुपये (विदेशियों के लिए) का शुल्क निर्धारित है, जबकि कैंटर सफारी सस्ती विकल्प है।

पर्यटकों के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। रामनगर में वाहनों का नया पंजीकरण शुरू हो चुका है, और सफारी बुकिंग की वेबसाइट पर 12 अक्टूबर से ही आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। वन अधिकारी डॉ. विवेक कुमार ने बताया, “हमने सभी जोन में 20 नई जिप, 10 कैंटर और 50 गाइड तैनात किए हैं। धूल नियंत्रण, पानी की आपूर्ति और इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं का विशेष ध्यान दिया गया है। पर्यटक ग्रीन पास बनवाना न भूलें।” इसके अलावा, कालाधुंगी क्षेत्र में नया कॉर्बेट हेरिटेज सर्किट भी नवंबर से शुरू होगा, जहां पर्यटक जिम कॉर्बेट की कहानियों से जुड़े स्थलों का भ्रमण कर सकेंगे। यह सर्किट स्थानीय समुदाय को रोजगार देगा और संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

पार्क में बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, तेंदुए और 600 से अधिक पक्षी प्रजातियां हैं, जो पर्यटकों को अविस्मरणीय अनुभव देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्टूबर का महीना सफारी के लिए आदर्श है, क्योंकि मौसम सुहावना रहता है और जानवर पानी के स्रोतों के पास दिखाई देते हैं। हालांकि, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ऑफ-ट्रैक ड्राइविंग पर सख्त पाबंदी है, और शाम 6 बजे के बाद गेट बंद हो जाते हैं। रामनगर पहुंचने के लिए दिल्ली से 250 किमी की दूरी पर ट्रेन या सड़क मार्ग उपलब्ध हैं।

यह खुलना उत्तराखंड पर्यटन को नई गति देगा। वन विभाग ने पर्यटकों से अपील की है कि वे प्लास्टिक मुक्त यात्रा करें और वन्यजीवों का सम्मान करें। बुकिंग के लिए आधिकारिक वेबसाइट corbett.nic.in पर जाएं। आने वाले दिनों में पार्क में टाइगर सेंसस 2026 की तैयारियां भी तेज होंगी। रामनगर वन प्रभाग अब रोमांच और प्रकृति प्रेमियों का स्वागत करने को बेताब है—आइए, जंगलों की गोद में खो जाएं!

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