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कोल्ड्रिफ कफ सिरप घोटाला: श्रीसन फार्मा का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द, कंपनी बंद – ED ने तमिलनाडु में 7 ठिकानों पर दबिश, 22 बच्चों की मौत का मामला

कोल्ड्रिफ कफ सिरप घोटाला: श्रीसन फार्मा का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द, कंपनी बंद – ED ने तमिलनाडु में 7 ठिकानों पर दबिश, 22 बच्चों की मौत का मामला

तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स (Sresan Pharma) का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है। कंपनी को पूरी तरह बंद करने का आदेश जारी हो चुका है, और इसके मालिक जी. रंगनाथन (75 वर्ष) को गिरफ्तार कर 10 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कंपनी के ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप पीने से 22 बच्चों (ज्यादातर 5 वर्ष से कम उम्र के) की मौत के बाद हुई। लैब टेस्ट में सिरप में घातक रसायन डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया, जो किडनी फेलियर का कारण बनता है।

सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस के तहत कंपनी के 7 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट के अधिकारियों के घर भी शामिल हैं।

घटना का क्रम: सिरप से मौतें, गिरफ्तारी से ED रेड तक

– मौतों का सिलसिला: अगस्त-सितंबर 2025 में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और राजस्थान में 22 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई। डॉक्टरों ने कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ को जिम्मेदार ठहराया, जो बच्चों को सर्दी-खांसी के लिए दिया गया था। लैब रिपोर्ट में सिरप में DEG की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जो सस्ता ग्लाइकॉल होता है और विषाक्त है। मध्य प्रदेश पुलिस की SIT ने 9 अक्टूबर को चेन्नई के कोडंबक्कम से रंगनाथन को गिरफ्तार किया।

– लाइसेंस रद्द: तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने 13 अक्टूबर को सभी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर कंपनी को बंद कर दिया। स्वास्थ्य मंत्री एमए सुब्रमण्यम ने कहा, “यह स्थायी कार्रवाई है। कंपनी कभी दोबारा नहीं खुलेगी।” राज्य में सभी फार्मा यूनिट्स का व्यापक निरीक्षण शुरू हो गया है।

– ED की रेड: ED ने PMLA के तहत केस दर्ज कर 7 जगहों पर सर्च चलाए, जिनमें कंपनी के प्रमुख कर्मचारियों के घर और तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल के अधिकारियों के ठिकाने शामिल। ED को शक है कि कंपनी ने अवैध कमाई की। दो सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर्स को लापरवाही के लिए सस्पेंड कर दिया गया।

कंपनी का बैकग्राउंड: छोटी फार्मा यूनिट से घोटाला

श्रीसन फार्मा 1990 में प्राइवेट फर्म के रूप में शुरू हुई, जो बाद में सोल प्रोप्राइटरशिप बनी। रंगनाथन (मद्रास मेडिकल कॉलेज ग्रेजुएट) ने ‘प्रोनिट’ जैसे न्यूट्रिशनल सिरप से शुरुआत की, लेकिन कफ सिरप, प्रोटीन पाउडर और हर्बल चाइल्ड ग्रोथ सिरप बनाती थी। कंपनी का प्लांट सुंगुवरचत्रम (कांचीपुरम) में था। Indiamart पर खुद को ‘फार्मास्यूटिकल सिरप ट्रेडर’ बताती थी।

केंद्र और राज्य स्तर पर कार्रवाई

– ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने सभी राज्यों को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स 1945 का सख्त पालन करने का निर्देश दिया। कच्चे माल और फाइनिश्ड प्रोडक्ट्स की टेस्टिंग अनिवार्य।

– तमिलनाडु में सभी फार्मा यूनिट्स का इंस्पेक्शन चल रहा। मध्य प्रदेश में SIT जांच जारी, जहां मौतों की संख्या 21-22 बताई जा रही।

यह घटना 2023 के कफ सिरप घोटाले (जिसमें 100+ मौतें हुईं) को याद दिलाती है, जो फार्मा इंडस्ट्री की लापरवाही उजागर करती है।

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