बिहार चुनाव 2025: NDA में सीट बंटवारा लगभग तय, BJP-JD(U) को 203 सीटें; धर्मेंद्र प्रधान की ताबड़तोड़ बैठकें, फॉर्मूला फाइनल
बिहार चुनाव 2025: NDA में सीट बंटवारा लगभग तय, BJP-JD(U) को 203 सीटें; धर्मेंद्र प्रधान की ताबड़तोड़ बैठकें, फॉर्मूला फाइनल
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की अधिसूचना जारी होने से ठीक पहले एनडीए में सीट बंटवारे पर सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री और बीजेपी के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को पटना में ताबड़तोड़ बैठकें कीं। उन्होंने जदयू के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, हम पार्टी के प्रमुख व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के नेता उपेंद्र कुशवाहा से अलग-अलग मुलाकात की। इन बंद कमरे की बैठकों में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला लगभग तय हो गया, जिसमें बीजेपी और जदयू को मिलाकर 203 सीटें साझा करने का प्लान है, जबकि छोटे सहयोगी दलों को 40 सीटों का हिस्सा मिलेगा।
धर्मेंद्र प्रधान का दो दिवसीय पटना दौरा चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने का प्रयास था। शनिवार को उन्होंने बीजेपी की राज्य चुनाव समिति की बैठक की, जहां 60 सीटिंग विधायकों के प्रदर्शन पर मंथन हुआ। रविवार को सुबह सबसे पहले ललन सिंह से मुलाकात हुई, जिसमें जदयू के साथ सीटों के बंटवारे पर सहमति बनी। इसके बाद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और बिहार प्रभारी विनोद तावड़े के साथ मांझी के सरकारी आवास पर पहुंचे। बैठक करीब 15-20 मिनट चली, जिसमें हम पार्टी को 7-10 सीटें देने का फॉर्मूला चर्चा में रहा। मांझी, जो पहले 15-20 सीटों की मांग कर रहे थे, ने बैठक के बाद कहा, “एनडीए में सब ऑल इज वेल है। जल्द ही सीट बंटवारा फाइनल हो जाएगा।”
दोपहर में उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात हुई, जहां आरएलएम को 4-5 सीटें देने पर बात बनी। सूत्रों के अनुसार, कुल 243 सीटों में से बीजेपी को 120-125, जदयू को 78-83, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 25-28, हम को 7-10 और आरएलएम को 4-5 सीटें मिल सकती हैं। यह फॉर्मूला लोकसभा चुनाव 2024 के अनुपात पर आधारित है, जहां बीजेपी ने 17, जदयू ने 16, एलजेपी ने 5 और अन्य ने 1-1 सीट लड़ी थीं। चिराग पासवान से मुलाकात अभी बाकी है, लेकिन उनके मोबाइल बंद होने से अटकलें तेज हैं।
बैठकों के दौरान सीटों के अलावा उम्मीदवार चयन, चुनाव प्रचार रणनीति और जिला स्तर पर तालमेल पर भी चर्चा हुई। मांझी ने कहा, “हम पार्टी को मान्यता के लिए 8 सीटें या 6% वोट चाहिए। एनडीए इसका पूरा सहयोग करेगा।” कुशवाहा ने कहा, “सीट बंटवारा पारदर्शी होगा, हमारी मांगें पूरी हुईं।” ललन सिंह ने जदयू की मजबूत पकड़ वाली सीटों पर दावा मजबूत किया।
यह फॉर्मूला बीजेपी की ‘बड़े भाई’ भूमिका को दर्शाता है, जो सहयोगी दलों को एकजुट रखने पर फोकस कर रही है। विपक्षी महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) ने इसे ‘बीजेपी का वर्चस्व’ बताते हुए निशाना साधा। पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा, “एनडीए में छोटे दलों की बलि चढ़ रही है।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बंटवारा एनडीए को मजबूत बहुमत दिला सकता है, लेकिन चिराग पासवान की भूमिका निर्णायक होगी।
चुनाव आयोग की अधिसूचना 7-8 अक्टूबर को अपेक्षित है। नामांकन 10 अक्टूबर से शुरू होंगे। बीजेपी ने 125 से अधिक संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कर ली है। ये बैठकें एनडीए की एकजुटता का संदेश दे रही हैं, जो बिहार की सियासत को नया मोड़ दे सकती हैं।
