राष्ट्रीय

दार्जिलिंग में मूसलाधार बारिश का कहर: पुल ढहा, भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध, 14 लोगों की मौत; रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

दार्जिलिंग में मूसलाधार बारिश का कहर: पुल ढहा, भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध, 14 लोगों की मौत; रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने भयानक रूप धारण कर लिया है। रात भर चली भारी वर्षा के कारण भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं ने जनजीवन को ठप कर दिया। मिरिक क्षेत्र में दुडिया आयरन ब्रिज के ढहने से कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि पूरे जिले में भूस्खलन से कुल 14 लोगों की जान जा चुकी है। कई सड़कें मलबे में दब गई हैं, जिससे दार्जिलिंग-सिलीगुड़ी और सिक्किम के बीच संपर्क पूरी तरह कट गया। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने रेड अलर्ट जारी कर अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और कलिम्पोंग में अगले 24 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी दी है।

मुख्य हादसा मिरिक के पास दुडिया आयरन ब्रिज का था, जो सिलीगुड़ी-कुर्सियांग को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग था। शनिवार रात भारी पानी की धारा ने पुल के आधार को काट दिया, जिससे यह भरभराकर ढह गया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पुल पर वाहनों के साथ फंस गए लोगों में से 6 की मौके पर ही मौत हो गई। बचाव दल ने मलबे से 3 शव बरामद कर लिए हैं, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “बारिश इतनी तेज थी कि पुल के नीचे की नदी उफान पर थी। अचानक धमाका हुआ और सब कुछ पानी में समा गया।”

भूस्खलन की घटनाएं जिले के दर्जनों स्थानों पर हुईं। नेशनल हाईवे-10 और स्टेट हाईवे-12 पर मलबा गिरने से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। हुसैन खोला क्षेत्र में भूस्खलन से सिलीगुड़ी-दार्जिलिंग मार्ग अवरुद्ध हो गया, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग 110 पर भी मलबा जमा हो गया। दार्जिलिंग नगर पालिका के वार्ड नंबर 17 (लुई जुबली इलाका) में भूस्खलन से 10 घर क्षतिग्रस्त हो गए, और वार्ड 23 में एक दीवार ढह गई। पर्यटन विभाग के दो क्वार्टर भी प्रभावित हुए। इससे कई परिवार बेघर हो गए, और लगभग 200 लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए। गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (GTA) ने टाइगर हिल, रॉक गार्डन और अन्य पर्यटन स्थलों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया।

उत्तर बंगाल के अन्य जिलों में भी कहर जारी है। जलपाईगुड़ी के मालबाजार में बाढ़ से एक बड़ा इलाका जलमग्न हो गया। सिक्किम सीमा पर भूस्खलन से सड़कें कट गईं, जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो गई। दार्जिलिंग जिले में ही 8 अन्य मौतें भूस्खलन और बाढ़ से हुईं, जिसमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। जिलाधिकारी राजू बासु ने बताया, “रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगी हैं, लेकिन लगातार बारिश और फिसलन भरी सड़कों के कारण चुनौतियां हैं। हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्थिति को ‘गंभीर’ बताते हुए केंद्रीय टीम से सहायता की मांग की। उन्होंने प्रत्येक मृतक परिवार को 4 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया। केंद्र सरकार ने भी एनडीआरएफ की अतिरिक्त टुकड़ियां भेजी हैं। IMD के अनुसार, मानसून की विदाई के बावजूद पश्चिमी विक्षोभ के कारण यह असामान्य बारिश हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।

स्थानीय लोग आक्रोशित हैं। एक निवासी ने कहा, “हर साल बारिश से तबाही, लेकिन सड़कें और पुलों की मरम्मत पर ध्यान क्यों नहीं?” प्रशासन ने लोगों से घरों में रहने और अलर्ट पर नजर रखने की अपील की। राहत कार्य तेज हैं, लेकिन बारिश रुकने तक खतरा बरकरार है। यह प्राकृतिक आपदा उत्तर बंगाल को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *