उत्तराखंड

हरिद्वार में हाथियों की मौत का सिलसिला: 6 दिन में 3 मृत, करंट तारों से खतरा, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग में हाथियों की रहस्यमयी मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पिछले 6 दिनों में तीन जंगली हाथियों के शव बरामद हो चुके हैं, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों में छोड़े गए इलेक्ट्रिक तारों (करंट फेंसिंग) के कारण ये मौतें हो रही हैं। प्रशासन ने दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, लेकिन जमानत पर रिहा होने से कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। वन विभाग ने ऊर्जा निगम को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित इलाकों से तार हटाए जाएं, लेकिन स्थानीय किसानों को चेतावनी के बाद भी खतरा बरकरार है।

मौतों का क्रम और विवरण

– पहली मौत (27 सितंबर): हरिद्वार के बुग्गावाला क्षेत्र में हिलवुड अकेडमी स्कूल के पास एक गन्ने के खेत में मादा हाथी (उम्र लगभग 30 वर्ष) का शव मिला। यह संदिग्ध मौत थी, और प्रारंभिक जांच में करंट लगने का संदेह जताया गया। वन विभाग ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है।

– दूसरी मौत (1 अक्टूबर): उसी बुग्गावाला क्षेत्र में एक अन्य हाथी की मौत करंट से हुई। खेत मालिक ने फसल की सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई थी, जो हाथी के लिए घातक साबित हुई। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9 के तहत केस दर्ज किया गया, और दो लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।

– तीसरी मौत (3 अक्टूबर): एक सप्ताह के भीतर तीसरी मौत ने हड़कंप मचा दिया। मृत हाथी मखना (टस्कर) था, और कारण फिर से खेतों में बिजली के तार बताए जा रहे हैं। वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है, और ऊर्जा निगम को तार हटाने के आदेश दिए गए।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ये मौतें मानव-वन्यजीव संघर्ष का परिणाम हैं, जहां बढ़ती शहरीकरण और कृषि क्षेत्रों में हाथियों का घुसना आम हो गया है। हरिद्वार के जंगलों से सटे इलाकों में हाथी झुंड शहरी क्षेत्रों में घूम रहे हैं, जिससे खतरा बढ़ गया है।

वन विभाग की प्रतिक्रिया और कार्रवाई

– जांच और पोस्टमॉर्टम: सभी शवों का पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है, जिसमें विषाक्तता या अन्य कारणों की पड़ताल होगी। वन रेंजर राम सिंह ने कहा, “विद्युत विभाग की लापरवाही से तार नीचे लटक रहे हैं, जो हाथियों के लिए घातक हैं।”

– कानूनी कदम: दो किसानों के खिलाफ वन्यजीव अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज, लेकिन जमानत मिलने से स्थानीय स्तर पर असंतोष है। वन विभाग ने किसानों को चेतावनी जारी की है कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग न लगाएं।

– रोकथाम के उपाय: ऊर्जा निगम को निर्देश दिए गए हैं कि हाईटेंशन लाइनें ऊंचाई पर रखें। साथ ही, हाथी कॉरिडोर को मजबूत करने और जागरूकता अभियान चलाने की योजना है। वन विभाग ने कहा कि ये मौतें चिंताजनक हैं, और 24×7 निगरानी बढ़ाई जा रही है।

विशेषज्ञों की राय

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हरिद्वार जैसे क्षेत्रों में मानव अतिक्रमण और बिजली के गलत उपयोग से हाथियों की आबादी खतरे में है। पिछले वर्षों में भी इसी तरह की घटनाएं हुई हैं, जैसे 2022 में हाइटेंशन लाइन से मौत। WWF-इंडिया के एक अधिकारी ने कहा, “हाथी संरक्षण के लिए तत्काल सोलर फेंसिंग और वैकल्पिक उपाय अपनाने होंगे।”

यह सिलसिला उत्तराखंड में वन्यजीव संरक्षण को चुनौती दे रहा है, जहां हाथी हमले भी बढ़ रहे हैं। वन विभाग ने अपील की है कि जंगली इलाकों में सतर्क रहें। यदि नया अपडेट आता है, तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर नजर रहेगी। वन्यजीवों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी!

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