राजनीति

मायावती की 9 अक्टूबर को लखनऊ में ‘मेगा रैली’: कांशीराम पुण्यतिथि पर ‘मिशन 2027’ का आगाज, आकाश आनंद की री-लॉन्चिंग

मायावती की 9 अक्टूबर को लखनऊ में ‘मेगा रैली’: कांशीराम पुण्यतिथि पर ‘मिशन 2027’ का आगाज, आकाश आनंद की री-लॉन्चिंग

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती 9 अक्टूबर को लखनऊ के कांशीराम स्मारक पार्क में एक विशाल रैली को संबोधित करेंगी। यह आयोजन बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का रूप लेगा, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे ‘मिशन 2027’ का आगाज माना जा रहा है। चार साल बाद होने वाली यह पहली बड़ी सभा दलित वोटबैंक को एकजुट करने और पार्टी को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। पार्टी ने 5 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को जुटाने का लक्ष्य रखा है।

रैली की तैयारियां जोरों पर हैं। बसपा कार्यकर्ताओं को ‘नीले गमछे’ पहनकर लखनऊ पहुंचने का निर्देश दिया गया है, जो पार्टी के प्रतीक चक्र को दर्शाता है। प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने इसे ‘श्रद्धांजलि कार्यक्रम’ बताया, लेकिन जमीनी स्तर पर वार्ड-स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। मायावती ने साफ कहा है कि यह रैली केवल स्मृति नहीं, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति का हिस्सा है। 2022 चुनावों में बसपा का वोट शेयर घटकर 13% रह गया था, जो 2017 के 22% से काफी कम था। अब मायावती त्रिकोणीय संघर्ष (बीजेपी-सपा-बसपा) को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं।

रैली का एक प्रमुख एजेंडा मायावती के भतीजे और राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद की ‘री-लॉन्चिंग’ है। आकाश को 2024 में पार्टी से हटाया गया था, लेकिन अब उन्हें फिर से सक्रिय करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम युवा दलित नेतृत्व को मजबूत करेगा। मायावती रैली में कार्यकर्ताओं से ‘सर्वजन हिताय’ का संदेश देंगी और अन्य दलों से लौटे नेताओं की वापसी पर विचार करेंगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, रैली में 2 लाख से अधिक लोगों के जुटने की उम्मीद है, जो बसपा की ताकत का पैमाना बनेगी।

यह रैली सपा और कांग्रेस जैसे दलों के लिए असहज करने वाली है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को रामपुर में आजम खान से मिलने जा रहे हैं, जो बसपा के दलित वोटों पर असर डाल सकता है। विपक्षी दल इसे ‘कॉम्बैक प्रयास’ बता रहे हैं, लेकिन मायावती के लिए 2027 चुनाव जीवन-मरण का सवाल है। अगर बसपा फिर असफल हुई, तो पार्टी का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। रैली के बाद मायावती की सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है, जो यूपी की सियासत को गर्म कर देगी।

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