Monday, September 7, 2026
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महाअष्टमी पर आज ऐसे करें हवन और कन्या पूजा, नोट कर लें शुभ मुहूर्त

महाअष्टमी पर आज, ऐसे करें हवन और कन्या पूजा, नोट कर लें शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि 2025 का आठवां दिन, महाअष्टमी, आज मनाया जाएगा। यह तिथि मां दुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी की पूजा के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दिन हवन और कन्या पूजन का विधान है, जो व्रत का पूर्ण फल प्रदान करता है। अष्टमी तिथि की शुरुआत आज शाम 4:31 बजे से हो चुकी है और कल शाम 6:06 बजे तक रहेगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कल के शुभ मुहूर्तों में ही ये अनुष्ठान करें। आइए जानें विस्तार से पूजा विधि, सामग्री और समय।

महाअष्टमी 2025: कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

कन्या पूजन में 2 से 10 वर्ष की नौ कन्याओं (कुमारी) को मां दुर्गा के रूप में पूजा जाता है। कल के लिए मुख्य मुहूर्त इस प्रकार हैं:

– प्रातः कालीन मुहूर्त: सुबह 5:01 बजे से 6:13 बजे तक।

– अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक।

इन समयों में पूजन करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि संभव न हो तो नवमी (1 अक्टूबर) पर भी कर सकते हैं।

कन्या पूजन की विधि: स्टेप बाय स्टेप तरीका

1. तैयारी: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। पूजा स्थल पर आसन बिछाएं।

2. कन्याओं का आमंत्रण: नौ कन्याओं (2-10 वर्ष) को आमंत्रित करें। उन्हें स्नान कराकर स्वच्छ वस्त्र पहनाएं। एक कन्या को सुलभ (10 वर्ष से अधिक) के रूप में चुनें।

3. पूजन: कन्याओं को आसन पर बिठाएं। उनके चरण धोएं, तिलक लगाएं। प्रत्येक को मां दुर्गा के स्वरूप (ब्राह्मणी, द्विजा आदि) के रूप में पूजें। फूल, चंदन, दूर्वा, फल, मिठाई और दान दें।

4. भोजन और भोग: पूजन के बाद कन्याओं को हलवा, पूरी, कचौड़ी, खीर, चने का सूप आदि भोजन कराएं। अंत में आशीर्वाद लें।

5. मंत्र जाप: पूजन के दौरान “या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।” का जाप करें।

सामग्री की लिस्ट: पूजा थाली, अगरबत्ती, दीपक, फूल, चंदन, कुमकुम, दूर्वा, फल, मिठाई, दान (कपड़े, चूड़ी, बिंदी), भोजन सामग्री (पूरी, हलवा, खीर)।

महाअष्टमी पर हवन की विधि

हवन नवरात्रि व्रत को पूर्ण करने का माध्यम है। इसे कन्या पूजन के बाद या अलग से करें।

1. तैयारी: हवन कुंड को साफ करें। आम की समिधा, घी, हवन सामग्री (तिल, जौ, गुड़, चंदन) रखें।

2. आरंभ: गणेश जी का ध्यान करें। गंगाजल छिड़कें। स्वस्ति वाचन करें।

3. हवन: दुर्गा सप्तशीती के मंत्रों या गायत्री मंत्र का जाप करते हुए 108 आहुतियां दें। अंत में पूर्णाहुति (नारियल, घी) दें।

4. समापन: हवन के बाद आरती उतारें और प्रसाद वितरित करें।

हवन के शुभ मुहूर्त:

– प्रातः संध्या: सुबह 4:58 से 6:07 बजे तक।

– अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 से 12:49 बजे तक।

– विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:20 बजे तक।

हवन सामग्री: आम की चक्की, घी, जौ, तिल, गुड़, चंदन, कपूर, नारियल, हवन कुंड।

महाअष्टमी पर ये अनुष्ठान करने से पापों का नाश होता है और समृद्धि प्राप्त होती है। यदि घर में कन्या न हों तो मंदिर में दान करें। क्या आप कल पूजन कर रहे हैं? शुभकामनाएं!

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