सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन को संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत बताई: पूरा प्रतिबंध संभव नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन को संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत बताई: पूरा प्रतिबंध संभव नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री, निर्माण और भंडारण पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि पटाखों पर पूर्ण बैन लगाना संभव नहीं है, बल्कि एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। बेंच ने कहा कि निर्माताओं को काम करने का अधिकार है, तो नागरिकों को भी साफ हवा और सांस लेने का मौलिक अधिकार है। साथ ही, कोर्ट ने चेतावनी दी कि प्रतिबंध के बाद माफिया सक्रिय हो जाते हैं, जिससे काला बाजार फलता-फूलता है, इसलिए इस पर सख्त निगरानी जरूरी है।
सुनवाई का बैकग्राउंड:
– मामला: यह सुनवाई एमसी मेहता द्वारा दायर पर्यावरणीय याचिकाओं पर हो रही है, जिसमें दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण को रोकने के लिए पटाखों पर प्रतिबंध लगाया गया था। अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण बैन की पुष्टि की थी, लेकिन पटाखा व्यापारियों और एसोसिएशन (जैसे एसोसिएशन ऑफ फायरवर्क ट्रेडर्स) ने इसे चुनौती दी, दावा किया कि इससे लाखों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
– आज की टिप्पणियां: चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा, “अगर दिल्ली-एनसीआर के ‘एलिट’ नागरिकों को साफ हवा का अधिकार है, तो पूरे देश के नागरिकों को भी वही अधिकार मिलना चाहिए।” कोर्ट ने पूर्ण प्रतिबंध को “चरम” बताते हुए ग्रीन पटाखों (कम प्रदूषण वाले) के निर्माण की अनुमति दी, लेकिन बिक्री पर रोक बरकरार रखी। केंद्र सरकार को 8 अक्टूबर तक हितधारकों के साथ मिलकर समाधान प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
– माफिया पर चिंता: अदालत ने नोट किया कि बैन के बाद अवैध व्यापार बढ़ जाता है, जैसे हरियाणा और यूपी से दिल्ली में तस्करी। इसलिए, एनसीआर राज्यों (दिल्ली, यूपी, हरियाणा, राजस्थान) को प्रभावी प्रवर्तन तंत्र बनाने और दो हफ्तों में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
कोर्ट के प्रमुख निर्देश:
– ग्रीन पटाखों पर फोकस: निर्माण की अनुमति, लेकिन बिक्री और भंडारण पर रोक। नीरी (नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) को रासायनिक संरचना निर्धारित करने को कहा।
– पैन-इंडिया नीति: सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि पटाखा प्रतिबंध सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित न रहे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान नीति बने। पिछले सुनवाई (12 सितंबर 2025) में भी यही बात कही गई थी।
– कार्यान्वयन: राज्यों को धारा 5 के तहत पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू करने, शिकायत निवारण तंत्र बनाने और लाइसेंस रद्दीकरण पर स्टेटस को बरकरार रखने को कहा।
प्रभाव और प्रतिक्रियाएं:
– व्यापारियों की प्रतिक्रिया: पटाखा उद्योग ने राहत की सांस ली, लेकिन बिक्री प्रतिबंध पर असंतोष जताया। एक व्यापारी ने कहा, “निर्माण तो ठीक, लेकिन बिना बिक्री के क्या फायदा?”
– पर्यावरणविदों का मत: ग्रुप्स जैसे इंडिक कलेक्टिव ने स्वागत किया, लेकिन पूर्ण बैन की मांग की। दिल्ली का AQI अभी भी 300 के पार है, जो प्रदूषण की गंभीरता दर्शाता है।
– राजनीतिक कोण: दीवाली से पहले यह फैसला सांस्कृतिक परंपराओं और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बहस छेड़ सकता है।
यह फैसला नवरात्रि-दीवाली सीजन से पहले आया है, जब पटाखों की मांग चरम पर होती है। अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी। अधिक जानकारी के लिए सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट या लाइव लॉ चेक करें।
