लेह हिंसा के बाद सोनम वांगचुक पर केंद्र का बड़ा एक्शन: SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्द, CBI जांच भी जारी
लेह हिंसा के बाद सोनम वांगचुक पर केंद्र का बड़ा एक्शन: SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्द, CBI जांच भी जारी
लेह में लद्दाख राज्यता की मांग को लेकर हुई हिंसक झड़पों के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़ी संस्था स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस रद्द कर दिया। गृह मंत्रालय ने इसे FCRA 2010 के कई उल्लंघनों का परिणाम बताया है, जिसमें विदेशी फंड के गलत इस्तेमाल, लेखा-जोखा में अनियमितताएं और राष्ट्रीय हित के विरुद्ध गतिविधियां शामिल हैं। यह कदम वांगचुक पर केंद्र के सख्त रुख को दर्शाता है, जिन्हें हिंसा भड़काने का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। CBI ने भी SECMOL और वांगचुक की दूसरी संस्था हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) के खिलाफ FCRA उल्लंघन की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।
FCRA लाइसेंस रद्द का कारण: नियमों का बार-बार उल्लंघन
गृह मंत्रालय ने 20 अगस्त 2025 को SECMOL को शो कॉज नोटिस जारी किया था, जिसमें विदेशी फंड के दुरुपयोग, गलत रिपोर्टिंग और अनधिकृत खातों का इस्तेमाल जैसे आरोप लगाए गए। संस्था ने 19 सितंबर को जवाब दिया, लेकिन मंत्रालय ने इसे असंतोषजनक पाया। मुख्य उल्लंघन इस प्रकार हैं:
– 2020-2022 के बीच गैर-अनुपालन: विदेशी और घरेलू योगदानों का मिश्रण, जिसमें SECMOL के 9 खातों में से 6 अनघोषित पाए गए।
– वांगचुक का डिपॉजिट उल्लंघन: 2021-22 में वांगचुक द्वारा SECMOL के FCRA खाते में 3.5 लाख रुपये जमा करना, जो FCRA की धारा 17 का उल्लंघन था।
– फंड डायवर्जन: HIAL ने FCRA लाइसेंस मिलने से पहले ही 1.5 करोड़ रुपये विदेशी फंड स्वीकार किए, और घरेलू फंड को विदेशी खाते में रूट किया।
– डोनेशन में अचानक उछाल: 2023-24 में 6 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 15 करोड़ रुपये, जो संदिग्ध माना गया।
SECMOL को सांस्कृतिक-शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए FCRA पंजीकरण था, लेकिन मंत्रालय ने इसे रद्द कर विदेशी फंडिंग पर पूर्ण रोक लगा दी। इससे संस्था की वित्तीय क्षमता पर गहरा असर पड़ेगा।
लेह हिंसा का कनेक्शन: वांगचुक पर ‘भड़काऊ’ बयानों का आरोप
यह एक्शन 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के ठीक बाद आया, जहां राज्यता और संविधान की छठी अनुसूची की मांग पर प्रदर्शन हिंसक हो गए। चार लोगों की मौत, 80 से ज्यादा घायल, BJP कार्यालय और हिल काउंसिल पर हमला—यह 1989 के बाद लद्दाख का सबसे बड़ा अशांति का दिन था। केंद्र ने वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया, कहा कि उनके ‘अरब स्प्रिंग’ और ‘नेपाल जेन-जेड’ जैसे उकसावे वाले संदर्भों ने भीड़ को भड़काया। वांगचुक ने 10 सितंबर से अनशन शुरू किया था, जो 24 को समाप्त हुआ, लेकिन सुबह 11:30 बजे भीड़ ने तोड़फोड़ शुरू कर दी।
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने सुरक्षा समीक्षा बैठक बुलाई, जहां शांति के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया। लेह में कर्फ्यू, अन्य शहरों में धारा 144 लागू।
CBI जांच: पुरानी शिकायत पर नई कार्रवाई
CBI ने SECMOL और HIAL के खिलाफ प्रारंभिक जांच (PE) शुरू की, जो MHA की शिकायत पर आधारित है। जांच 2022-2024 के विदेशी फंड पर फोकस्ड है। वांगचुक ने कहा, “CBI टीम ने HIAL और SECMOL का दौरा किया, लेकिन हम विदेशी फंड पर निर्भर नहीं। हम ज्ञान निर्यात से कमाते हैं। तीन मामलों को उन्होंने गलती से FCRA उल्लंघन माना।” CBI ने वांगचुक को समन भेजा, लेकिन जवाब लंबित है। अभी FIR दर्ज नहीं हुई।
स्रोतों के अनुसार, लद्दाख प्रशासन ने HIAL को जमीन आवंटन भी रद्द कर दिया। वांगचुक के पाकिस्तान दौरे पर भी सवाल उठे हैं। वांगचुक ने ट्वीट कर कहा, “शांतिपूर्ण रास्ते की अपील नाकाम रही। युवाओं से बकवास बंद करने की गुजारिश।”
वांगचुक का ‘जेल तैयार’ बयान, राजनीतिक हंगामा
वांगचुक ने कहा, “वे मुझे पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत जेल में डालने की तैयारी कर रहे हैं। मैं तैयार हूं, लेकिन जेल में सोनम वांगचुक सरकार के लिए ज्यादा समस्या पैदा कर सकता है।” असम में SECMOL जैसी संस्थाओं ने शोक जताया। BJP ने कांग्रेस पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने केंद्र के एक्शन को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लद्दाख आंदोलन को दबाने की कोशिश है, लेकिन राज्यता की मांग तेज हो सकती है। MHA ने ABL और KDA के साथ बातचीत जारी रखने का भरोसा दिलाया। क्या यह एक्शन शांति लाएगा या आग को भड़काएगा? आने वाले दिनों में साफ होगा।
