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दिल्ली में पहली बार आर्टिफिशियल बारिश: प्रदूषण से निपटने के लिए DGCA से मिली मंजूरी, 15 अक्टूबर को ट्रायल

दिल्ली में पहली बार आर्टिफिशियल बारिश: प्रदूषण से निपटने के लिए DGCA से मिली मंजूरी, 15 अक्टूबर को ट्रायल

दिल्ली की जहरीली हवा से त्रस्त राजधानी को बड़ी राहत मिलने वाली है। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए आर्टिफिशियल बारिश (क्लाउड सीडिंग) के ट्रायल को हरी झंडी दे दी है। यह पहली बार होगा जब दिल्ली में कृत्रिम वर्षा का प्रयोग होगा। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से मंजूरी मिल चुकी है, और ट्रायल 15 अक्टूबर तक शुरू हो सकता है। मौसम विभाग (IMD) से मानसून वापसी की अपडेट्स का इंतजार है, उसके बाद अंतिम समय तय होगा। यह कदम दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों में बढ़ते PM2.5 और PM10 स्तर को कम करने के लिए उठाया गया है।

प्रोजेक्ट का नाम ‘टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेशन एंड इवैल्यूएशन ऑफ क्लाउड सीडिंग अस एन अल्टरनेटिव फॉर दिल्ली एनसीआर पॉल्यूशन मिटिगेशन’ है। IIT कानपुर के विशेषज्ञों की अगुवाई में यह ट्रायल होगा। इसमें एक मॉडिफाइड Cessna 206-H विमान से क्लाउड्स में सिल्वर आयोडाइड नैनोपार्टिकल्स, आयोडाइज्ड सॉल्ट और रॉक सॉल्ट का मिश्रण छिड़का जाएगा। यह रसायन बादलों में पानी की बूंदों को बड़ा बनाकर वर्षा को प्रेरित करेंगे, जिससे हवा में जमा प्रदूषक धुल जाएंगे। कुल 3.21 करोड़ रुपये का खर्च होगा, जिसमें 5 फ्लाइट्स (प्रत्येक 55 लाख) और सेटअप कॉस्ट (66 लाख) शामिल है। ट्रायल रोहिणी, बावना, अलीपुर, बुराड़ी जैसे प्रदूषित इलाकों और पश्चिमी यूपी (लोनी, बागपत) में होगा।

मूल रूप से ट्रायल 4-11 जुलाई 2025 को प्लान था, लेकिन मानसून क्लाउड्स में पर्याप्त नमी न होने से टल गया। फिर अगस्त 30 से सितंबर 10 तक की विंडो तय की गई, लेकिन अब मिड-अक्टूबर पर फोकस है। पर्यावरण विभाग ने IMD से वर्तमान मौसम की जानकारी मांगी है। सिरसा ने कहा, “मौसम की स्थिति साफ होने पर DGCA को फिर से पत्र लिखेंगे। यह दिल्ली के 2025-26 एनवायरनमेंट एक्शन प्लान का हिस्सा है, जिसमें AI-बेस्ड मॉनिटरिंग, एंटी-स्मॉग गन्स और डस्ट कंट्रोल शामिल हैं।” विमान VIP जोन और प्रतिबंधित एयरस्पेस से दूर रहेंगे, और हर फ्लाइट के बाद प्रदूषण स्तर मापा जाएगा।

क्लाउड सीडिंग की तकनीक दुनिया भर में इस्तेमाल हो रही है, लेकिन दिल्ली में यह पहली कोशिश है। अप्रैल 2025 में कैबिनेट ने इसे मंजूर किया था, और मई में 5 ट्रायल्स की योजना बनी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तात्कालिक राहत देगी, लेकिन लंबे समय के लिए वाहनों से उत्सर्जन कम करना जरूरी। CPCB, DPCC और अर्थ साइंसेज मिनिस्ट्री ने इसमें सहयोग किया है। अगर सफल रहा, तो यह अन्य शहरों के लिए मॉडल बनेगा।

दिल्ली की AQI अक्सर ‘सीवियर’ कैटेगरी में रहती है, खासकर सर्दियों में। GRAP स्टेज 4 के तहत पहले भी आर्टिफिशियल रेन की मांग हुई थी। सिरसा ने कहा, “यह युद्ध है प्रदूषण के खिलाफ। हम साफ हवा के लिए प्रतिबद्ध हैं।” यह ट्रायल न केवल प्रदूषण, बल्कि गिरते ग्राउंडवाटर स्तर को भी संबोधित करेगा।

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