उत्तराखंड

नकल माफियाओं पर सीएम धामी: कथनी तो सख्त, करनी में अभी भी फर्क!

नकल माफियाओं पर सीएम धामी: कथनी तो सख्त, करनी में अभी भी फर्क!

देहरादून: उत्तराखंड में पेपर लीक का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। 2021 से लेकर 2025 तक दर्जनों परीक्षाएं रद्द हो चुकी हैं, हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘कथनी’ ने हमेशा ‘नकल माफिया’ पर सख्ती का दावा किया है, लेकिन ‘करनी’ में कमी साफ नजर आ रही है। क्या वाकई धामी सरकार ने ‘चीटिंग माफिया’ को नेस्तनाबूद किया, या यह सिर्फ चुनावी जुमला साबित हो रहा है? आइए, धामी के बयानों और कार्रवाइयों का विश्लेषण करें।

धामी ने 2021 में सत्ता संभालते ही नकल माफिया पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा दिया। 2022 में UKSSSC पेपर लीक के बाद उन्होंने कहा, “हमारा संदेश साफ है, कोई अपराधी बचेगा नहीं।” तत्कालीन UKSSSC चेयरमैन आरबीएस रावत की गिरफ्तारी को उन्होंने अपनी उपलब्धि बताया। 2023 में विधानसभा में सख्त एंटी-कॉपींग बिल पास करवाया, जिसे “देश का सबसे सख्त कानून” करार दिया। फरवरी 2023 में उन्होंने कहा, “नकल राष्ट्रीय समस्या है, लेकिन हमारा कानून इसे जड़ से उखाड़ फेंकेगा। पेन ड्राइव में पेपर बेचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” छात्र आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज पर जांच के आदेश देकर उन्होंने खुद को “युवाओं का साथी” बताया। 2025 में हालिया UKSSSC लीक पर भी धामी ने कहा, “नकल माफिया सरकार को बदनाम करने की साजिश रच रहा है, कोई बचेगा नहीं।”

ये बयान सुनने में तो आकर्षक हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। 2021 का UKSSSC लीक मामला आज तक पूरी तरह सुलझा नहीं। आरोपी हाकम सिंह, जो 2021 का ‘मास्टरमाइंड’ था, जमानत पर रिहा हो गया और 2025 में फिर गिरफ्तार हुआ – यह साबित करता है कि सिस्टम में लूपहोल्स बरकरार हैं। 2023 के कानून के बावजूद, 2025 में ग्रेजुएट लेवल परीक्षा के तीन पेज लीक हो गए। हारिद्वार में खालिद मलिक को गिरफ्तार किया गया, लेकिन उसके परिवार के अन्य सदस्यों की जांच लंबित है। कांग्रेस नेता हरीश रावत ने तंज कसा, “धामी जी कहते हैं CBI जांच से देरी होगी, लेकिन उनके कानून ने तो लीक ही नहीं रोका।” पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने भी माना कि “कड़ी मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य खतरे में है।”

विपक्ष का आरोप है कि धामी सरकार जांच को राज्य स्तर पर ही सीमित रख रही है, CBI को शामिल नहीं कर रही। 2023 में धामी ने कहा था, “CBI जांच से भर्तियां 5-7 साल लेट हो जाएंगी,” लेकिन छात्र आज भी CBI प्रोब की मांग कर रहे हैं। STF का गठन तो हुआ, लेकिन गिरफ्तारियां ज्यादातर छोटे-मोटे अपराधियों की होती हैं – बड़े माफिया सरगना आजाद घूम रहे हैं। 2025 के लीक में जैमर लगे होने के बावजूद फोटो लीक हो गईं, जो सिस्टम की नाकामी दर्शाती है। BJP विधायक खजान दास दावा करते हैं कि धामी राज में 25,000 से ज्यादा नियुक्तियां हुईं, लेकिन लीक के कारण रद्द परीक्षाओं से युवाओं का विश्वास डगमगा गया है।

कुल मिलाकर, धामी की कथनी में सख्ती है, लेकिन करनी में कमी साफ दिखती है। कानून बने, गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन माफिया की जड़ें मजबूत बनी रहीं। युवा सड़कों पर उतर रहे हैं, परीक्षाएं रद्द हो रही हैं। अगर धामी वाकई ‘युवाओं का साथी’ हैं, तो CBI जांच और सख्त निगरानी जरूरी। वरना, यह ‘कथनी-करनी’ का फर्क उत्तराखंड की राजनीति का हॉट टॉपिक बनेगा।

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