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लेह में हिंसक आंदोलन: सोनम वांगचुक ने तोड़ा 15 दिन का उपवास, युवाओं से शांति की अपील की

लेह में हिंसक आंदोलन: सोनम वांगचुक ने तोड़ा 15 दिन का उपवास, युवाओं से शांति की अपील की

लेह: लद्दाख के लेह में मंगलवार को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर शुरू हुए शांतिपूर्ण आंदोलन ने हिंसक रूप धारण कर लिया। प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी कार्यालय और लद्दाख हिल ऑटोनॉमस डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) भवन पर हमला कर आग लगा दी, जबकि सीआरपीएफ की एक गाड़ी को भी आग के हवाले कर दिया। इस हिंसा के बीच पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने बुधवार को अपना 15 दिवसीय (कुछ रिपोर्ट्स में 21-दिवसीय) अनशन तोड़ दिया। वांगचुक ने युवाओं से हिंसा रोकने की अपील की, कहा कि यह आंदोलन को नुकसान पहुंचा रहा है। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने गुरुवार को पूर्ण बंद का ऐलान किया है, जबकि स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

घटना दोपहर करीब 1 बजे भड़की, जब वांगचुक के अनशन के समर्थन में सैकड़ों छात्र और स्थानीय लोग LAHDC की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोका, तो प्रदर्शनकारी भड़क गए। पत्थरबाजी, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। वीडियो फुटेज में साफ दिख रहा है कि प्रदर्शनकारी बीजेपी कार्यालय को घेरकर आग लगाते हैं, जबकि धुआं पूरे इलाके में फैल जाता है। दो अनशनकारी, जो 10 सितंबर से वांगचुक के साथ उपवास पर थे, मंगलवार को हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती हुए। LAB के को-कन्वीनर चेरिंग डोरजे लक्रुक ने कहा, “दो साथियों की हालत बिगड़ने से गुस्सा भड़का। लेकिन हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण था। केंद्र सरकार की उदासीनता के कारण युवा उग्र हो गए।”

वांगचुक ने X पर वीडियो संदेश जारी कर कहा, “आज लेह में जो हुआ, वह दुखद है। मेरा शांतिपूर्ण रास्ते का संदेश विफल हो गया। युवाओं से अपील है, इस बकवास को रोकें। यह हमारे संघर्ष को कमजोर करता है।” उन्होंने अनशन तोड़ने का फैसला हिंसा के बाद लिया, ताकि आंदोलन को गांधीवादी रंग बनाए रखा जा सके। वांगचुक का 35-दिवसीय अनशन मूल रूप से 10 सितंबर को शुरू हुआ था, लेकिन अब इसे रिले फॉर्म में जारी रखने का प्लान है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 6 अक्टूबर को LAB के साथ दिल्ली में बैठक बुलाई है, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे “समझौते के बिना बेकार” बता रहे हैं।

लद्दाख 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश बना, लेकिन स्थानीय लोग राज्य का दर्जा, स्थानीय नौकरियों में आरक्षण, जमीन अधिकारों की सुरक्षा और लोकसभा-राज्यसभा में अलग सीटें मांग रहे हैं। LAB और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने 2024 में केंद्र के साथ चार-सूत्री समझौता किया था, जिसमें छठी अनुसूची का वादा था, लेकिन इसका पालन न होने से आंदोलन तेज हो गया। लेह एसएसपी पदम सिंह ने बताया, “कोई हताहत नहीं, लेकिन भारी फोर्स तैनात है। इंटरनेट सेवाएं बंद हैं।” विशेषज्ञों का कहना है कि यह हिंसा बीजेपी की साख को नुकसान पहुंचा रही है, जो 2019 में UT बनाने का वादा कर सत्ता में आई थी।

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