रामलीला महासंघ बोर्ड ने बुलाई बैठक, पूनम पांडे के मंदोदरी किरदार पर होगा फैसला: विवाद के बीच नवरात्रि पर टकराव
रामलीला महासंघ बोर्ड ने बुलाई बैठक, पूनम पांडे के मंदोदरी किरदार पर होगा फैसला: विवाद के बीच नवरात्रि पर टकराव
शारदीय नवरात्रि की धूम में रामलीला का रंग चढ़ रहा है, लेकिन दिल्ली की मशहूर लव कुश रामलीला पर विवाद के बादल मंडरा रहे हैं। अभिनेत्री पूनम पांडे को रावण की पत्नी मंदोदरी का किरदार निभाने के फैसले पर साधु-संतों और धार्मिक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। इसी क्रम में अखिल भारतीय रामलीला महासंघ के बोर्ड ने तत्काल बैठक बुलाई है, जिसमें पूनम के किरदार को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। बैठक शाम 5 बजे रामलीला समिति कार्यालय में होगी, जहां वीएचपी, संत समाज और कमेटी के पदाधिकारियों के बीच चर्चा होगी।
लाल किले के मैदान में 22 सितंबर से शुरू हुई लव कुश रामलीला, जो 3 अक्टूबर तक चलेगी, इस बार बॉलीवुड सितारों से सजी है। आर्य बब्बर रावण का किरदार निभाएंगे, तो पूनम पांडे मंदोदरी बनीं। लेकिन पूनम की बोल्ड इमेज और सोशल मीडिया पर विवादित वीडियोज को लेकर संत समाज भड़क उठा। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, “मंदोदरी पवित्र और बुद्धिमान स्त्री का प्रतीक है। पूनम जैसी छवि वाली महिला का चयन रामलीला की गरिमा को ठेस पहुंचाएगा।” पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर जगतगुरु बालक देवाचार्य ने तो इसे ‘ग्लैमराइजेशन’ का प्रयास बताते हुए सुपर्णखा का रोल सुझाया।
कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और बीजेपी प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने समिति को पत्र लिखकर पूनम को हटाने की मांग की। उन्होंने कहा, “रामलीला धार्मिक आयोजन है, न कि बॉलीवुड शो। पूनम की पृष्ठभूमि इस पवित्र भूमिका के अनुरूप नहीं।” वीएचपी ने भी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
वहीं, लव कुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने पूनम का बचाव किया। उन्होंने कहा, “पूनम एक प्रतिभाशाली कलाकार हैं। रामलीला में 500 से ज्यादा कलाकार हैं, सभी का स्वागत है। मंदोदरी का किरदार 29-30 सितंबर को मंचित होगा, और पूनम इसे बखूबी निभाएंगी।” पूनम ने खुद सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर कहा, “मैं नौ दिनों तक नवरात्रि व्रत रखूंगी, ताकि तन-मन शुद्ध हो। जय श्री राम!” उन्होंने किरदार को रामायण की बुद्धिमान स्त्री बताया, जो रावण को समझाती है।
रामलीला महासंघ का यह कदम विवाद को शांत करने की कोशिश है। महासंघ के महासचिव ने बताया, “बैठक में सभी पक्षों की राय सुनी जाएगी। फैसला रामलीला की परंपरा और आधुनिकता के संतुलन पर आधारित होगा।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद रामलीला को और चर्चित बना रहा है, लेकिन धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। नवरात्रि के बीच यह टकराव पूजा-अर्चना पर असर डाल सकता है। बैठक का फैसला कल सुबह घोषित होगा। दर्शक रामलीला के मंचन का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन विवाद की आग अभी ठंडी नहीं हुई।
