काशीपुर में बिना अनुमति निकाला ‘I Love मोहम्मद’ जुलूस, भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर बुरी तरह पीटा
काशीपुर में बिना अनुमति निकाला ‘I Love मोहम्मद’ जुलूस, भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर बुरी तरह पीटा
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में रविवार देर रात ‘I Love मोहम्मद’ के नारों के साथ बिना प्रशासनिक अनुमति के निकाले गए जुलूस ने हिंसा का रूप ले लिया। अल्ली खां इलाके में सैकड़ों लोगों की भीड़ ने आधी रात करीब 10 बजे सड़क पर जुलूस शुरू किया, जो कानपुर के विवादास्पद ट्रेंड से प्रेरित था। जब पुलिस ने जुलूस को रोकने की कोशिश की, तो उग्र भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया और पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया। कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि 112 नंबर इमरजेंसी वाहन के शीशे तोड़ दिए गए।
पुलिस के अनुसार, जुलूस के आयोजकों ने जिला मजिस्ट्रेट या एसएसपी कार्यालय से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली थी। सूचना मिलते ही एसएचओ सदर प्रदीप कुमार के नेतृत्व में एक टीम मौके पर पहुंची। एसएचओ ने बताया, “भीड़ ने अचानक पथराव किया और हमारे साथियों को लाठियों से पीटा। हमने लाठीचार्ज नहीं किया, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर अतिरिक्त फोर्स बुलाई।” हमले में एसआई राकेश कुमार और कांस्टेबल मनोज कुमार को चोटें आईं, जिन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। भीड़ ने सड़क पर खड़ी वाहनों पर तोड़फोड़ भी की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।
यह घटना कानपुर से शुरू हुए ‘I Love मोहम्मद’ विवाद की कड़ी है, जहां 5 सितंबर को ईद-ए-मिलाद के जुलूस में लगे बैनर पर हिंदू संगठनों ने विरोध किया था। उसके बाद 9 सितंबर को पुलिस ने 24 लोगों पर एफआईआर दर्ज की, जिसके खिलाफ देशभर में मुस्लिम संगठनों ने जुलूस निकाले। उन्नाव, बरेली, हैदराबाद समेत कई जगहों पर ऐसी झड़पें हो चुकी हैं। काशीपुर में स्थानीय मुस्लिम नेता अब्दुल्ला ने कहा, “यह पैगंबर के प्रेम का जुलूस था, पुलिस ने बिना वजह रोका।” वहीं, हिंदू संगठनों ने इसे ‘सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश’ बताया।
प्रशासन ने सोमवार सुबह धारा 144 लागू कर दी है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। एसएसपी दलीप सिंह कश्यप ने कहा, “हमने 8 लोगों को हिरासत में लिया है। जांच में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। तनाव कम करने के लिए शांति समितियों की बैठक बुलाई गई है।” स्थानीय निवासी रमेश चंद्र ने चिंता जताई, “रात के समय जुलूस से पूरा मोहल्ला डर गया। शांति बनाए रखें।” यह घटना उत्तराखंड में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा रही है, जहां नवरात्रि की तैयारियां भी जोरों पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल ट्रेंड से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। क्या प्रशासन शांति बहाल कर पाएगा? इलाके में सतर्कता बरती जा रही है।
