राजनीति

जीएसटी 2.0 पर पीएम मोदी का संबोधन, विपक्ष ने साधा निशाना: ‘गब्बर सिंह टैक्स’ से ‘बैंड-एड’ तक, सुनिए क्या बोले नेता

जीएसटी 2.0 पर पीएम मोदी का संबोधन, विपक्ष ने साधा निशाना: ‘गब्बर सिंह टैक्स’ से ‘बैंड-एड’ तक, सुनिए क्या बोले नेता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रविवार के राष्ट्र संबोधन ने जीएसटी 2.0 सुधारों को ‘बचत उत्सव’ का नाम देकर सराहा, लेकिन विपक्ष ने इसे ‘क्रेडिट चोरी’ और ‘देर से आया तोहफा’ बताते हुए तीखा हमला बोला। 22 सितंबर से लागू हो रहे इन सुधारों—जिसमें 28% स्लैब हटाकर 5% और 18% मुख्य दरें बनाने का फैसला शामिल है—पर पीएम ने कहा कि इससे आम आदमी को 2.5 लाख करोड़ की बचत होगी और आत्मनिर्भर भारत को बल मिलेगा। लेकिन विपक्षी दलों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए पुरानी कमियों पर सवाल उठाए। कांग्रेस से लेकर टीएमसी और आप तक, नेताओं ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम को घेरा। यह विवाद त्योहारों से पहले बाजार को गति देने वाले सुधारों को राजनीतिक रंग दे रहा है।

कांग्रेस ने सबसे आक्रामक रुख अपनाया। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर लिखा, “नरेंद्र मोदी जी, आपकी सरकार ने कांग्रेस के सरल और कुशल जीएसटी के बजाय 9 स्लैबों वाला ‘गब्बर सिंह टैक्स’ लगाया और 8 साल में 55 लाख करोड़ से ज्यादा वसूले। अब 2.5 लाख करोड़ के ‘बचत उत्सव’ से जनता के घाव भरने की बात? 900 चूहों खाने के बाद बिल्ली हज को चली!” खड़गे ने मांग की कि सरकार दाल, चावल, किताबें, दवाइयों और किसानों के ट्रैक्टरों पर लगे जीएसटी के लिए माफी मांगे। वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा, “पीएम ने जीएसटी काउंसिल—जो संवैधानिक निकाय है—के फैसलों का एकल स्वामित्व ले लिया। ये सुधार अपर्याप्त हैं, राज्यों की 5 साल की मुआवजा मांग पूरी नहीं हुई। चीन के साथ व्यापार घाटा दोगुना हो गया, लेकिन ये ‘बैंड-एड’ सुधार कुछ नहीं बदलेंगे।” कांग्रेस ने इसे ‘ग्रोथ सप्रेसिंग टैक्स’ का नाम देकर पीएम के ‘विकसित भारत’ दावे पर कटाक्ष किया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टीएमसी के रुख से पीएम पर श्रेय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पीएम का संबोधन जीएसटी काउंसिल के सामूहिक फैसले को अपना बताने का प्रयास है। 8 साल की लापरवाही के बाद अब सुधार? ये तो देर से आया न्याय है।” ममता ने जोर दिया कि बंगाल जैसे राज्यों को राजस्व हानि का मुआवजा मिलना चाहिए, वरना सुधार कागजी शेर ही रहेंगे।

आम आदमी पार्टी (आप) ने भी निशाना साधा। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और आप नेता सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा, “8 साल तक ऊंचे टैक्स क्यों लगाए? अब दिवाली से पहले वोट खरीदने का तोहफा? ये सुधार किसानों, छोटे व्यापारियों को फायदा कम, कॉर्पोरेट को ज्यादा देंगे।” आप ने दावा किया कि सुधारों से महंगाई पर असर नहीं पड़ेगा, और पीएम ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के 50% टैरिफ और H1B वीजा मुद्दों पर चुप्पी साधी।

सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने कहा, “ट्रंप के टैरिफ से ये सुधार धूमिल हो जाएंगे। पीएम का संबोधन विदेश नीति की कमजोरी छिपाने का प्रयास लगता है।” विपक्ष ने एकजुट होकर कहा कि संबोधन में बेरोजगारी, महंगाई जैसे बड़े मुद्दों पर चुप्पी रही।

वहीं, एनडीए नेताओं ने पीएम की तारीफ की। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इसे ‘ऐतिहासिक निर्णय’ बताया, जबकि केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा, “विपक्ष जितना बोलेगा, उतना हमें फायदा।” आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने ‘बचत उत्सव’ को पूरे देश का उत्सव कहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सुधार जीडीपी को 1-2% बूस्ट देंगे, लेकिन विपक्ष का हमला चुनावी साल में राजनीतिक बहस को तेज करेगा। क्या ये सुधार वाकई ‘उत्सव’ साबित होंगे या ‘विवाद’? बाजार की प्रतिक्रिया तय करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *