एमपी में गरजे राकेश टिकैत: ‘ट्रैक्टर ही किसानों का असली हथियार’, बीजेपी-RSS को खुली चेतावनी
एमपी में गरजे राकेश टिकैत: ‘ट्रैक्टर ही किसानों का असली हथियार’, बीजेपी-RSS को खुली चेतावनी
नर्मदापुरम: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में सोमवार को किसान आंदोलन ने जोर पकड़ लिया। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सैकड़ों किसानों के साथ ट्रैक्टर रैली निकाली और सोयाबीन, गेहूं व धान की एमएसपी बढ़ाने की मांग को लेकर कृषि उपज मंडी में धरना दिया। टिकैत ने बीजेपी और आरएसएस को ललकारते हुए कहा, “ट्रैक्टर ही किसानों का असली हथियार है। अगर सरकार ने एमएसपी पर कानून नहीं बनाया, तो हम फिर दिल्ली की सीमाओं पर उतरेंगे। बीजेपी और उसके आका आरएसएस किसानों को दबाने की चालें चल रहे हैं, लेकिन हम झुकेंगे नहीं।” यह बयान 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन की याद दिला रहा है, जहां टिकैत की अगुवाई में ट्रैक्टर परेड ने केंद्र को तीन कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर कर दिया था।
सीनी मालवा क्षेत्र के तवा कॉलोनी से शुरू हुई ट्रैक्टर रैली करीब दो किलोमीटर लंबी मंडी तक पहुंची। सैकड़ों ट्रैक्टरों पर सवार किसानों ने नारे लगाए – “एमएसपी दो, वरना ट्रैक्टर चलो!” टिकैत ने मंच से कहा, “सोयाबीन की एमएसपी 4,892 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति क्विंटल होनी चाहिए। गेहूं और धान पर भी लागत के आधार पर लाभ सुनिश्चित करें। सरकार किसानों को भूखा मार रही है, जबकि कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचा रही है।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो मध्य प्रदेश से शुरू होकर पूरे देश में ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा। टिकैत ने जोर देकर कहा, “ट्रैक्टर हमारा हथियार है, जो शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत है। बीजेपी वाले इसे ‘आतंक का ट्रैक्टर’ कहते थे, लेकिन वही ट्रैक्टर अब उनकी नींद उड़ा देंगे।”
यह आंदोलन मध्य प्रदेश में सोयाबीन उत्पादक किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों का हिस्सा है। राज्य में सोयाबीन का उत्पादन 1.2 करोड़ टन से अधिक है, लेकिन कम एमएसपी के कारण किसान घाटे में हैं। कांग्रेस की ‘किसान न्याय यात्रा’ भी इसी मुद्दे पर चल रही है, लेकिन टिकैत ने साफ शब्दों में कहा, “यह आंदोलन अराजनीतिक रखें। किसी भी पार्टी को मंच न दें। नीरव मोदी, मेहुल चोकसी जैसे भगोड़ों का कर्ज माफ कर दिया, लेकिन किसानों का कर्ज माफी का वादा झूठा साबित हो गया। आरएसएस की विचारधारा किसानों के खिलाफ है, वे हमें कमजोर करना चाहते हैं।” जाट समुदाय बहुल इस इलाके में बीजेपी का गढ़ माना जाता है, लेकिन टिकैत की मौजूदगी ने स्थानीय राजनीति को गरमा दिया।
रैली के बाद किसानों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा, जिसमें एमएसपी बढ़ाने के अलावा बिजली-पानी सब्सिडी और ऋण माफी की मांगें शामिल हैं। बीकेयू के जिलाध्यक्ष ने बताया कि आंदोलन को और तेज करने के लिए 25 सितंबर को महापंचायत बुलाई गई है। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए टिकैत ने कहा, “पीएम मोदी गुजरात के सीएम रहते एमएसपी कानून के समर्थक थे, अब क्यों पीछे हट रहे हैं? हम दिल्ली जाएंगे, तो ट्रैक्टरों की कतारें देख लेंगे।” विपक्षी दलों ने टिकैत के बयान का समर्थन किया। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा, “टिकैत साहब सही कह रहे हैं। शिवराज सरकार किसानों को धोखा दे रही है।”
यह घटना मध्य प्रदेश में आगामी लोकसभा उपचुनावों को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसान असंतोष बीजेपी के लिए चुनौती बनेगा। टिकैत की चेतावनी ने एक बार फिर किसान आंदोलन को नई ऊर्जा दी है। क्या ट्रैक्टर फिर सड़कों पर उतरेंगे? केंद्र का जवाब इंतजार कर रहा है।
