बीजेपी सांसद संजय जायसवाल का तंज: प्रशांत किशोर को नटवरलाल का दादा कहा, पीके ने पलटवार में चैलेंज ठोका
बीजेपी सांसद संजय जायसवाल का तंज: प्रशांत किशोर को नटवरलाल का दादा कहा, पीके ने पलटवार में चैलेंज ठोका
पटना: बिहार की सियासत में जुबानी जंग तेज हो गई है। बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) पर ‘ठगी’ का गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें ‘नटवरलाल का दादा’ करार दिया। जायसवाल ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पीके पर पांच सवालों की बौछार कर दी, जिसमें उनकी पार्टी के फंडिंग सोर्स से लेकर लालू प्रसाद के साथ कथित साठगांठ तक शामिल है। जवाब में पीके ने जहानाबाद में सभा के बाद तीखा पलटवार किया, कहा कि ‘सड़क पर हर सियार को जवाब देना जरूरी नहीं’। यह टकराव 2025 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार की राजनीति को और गर्म कर रहा है, जहां जन सुराज बीजेपी-आरजेडी दोनों के वोट बैंक को निशाना बना रही है।
जायसवाल ने 19 सितंबर को वेस्ट चंपारण में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जहां उन्होंने पीके को ‘ठगने में माहिर’ बताया। उन्होंने कहा, “प्रशांत किशोर ठगी के गणित के मास्टर हैं। नटवरलाल भी इनके सामने फेल है। वे दिन-ब-दिन लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं।” जायसवाल ने आरोप लगाया कि जन सुराज को तमिलनाडु और तेलंगाना की शराब कंपनियों से फंडिंग मिल रही है, और पीके असल में लालू यादव के लिए काम कर बीजेपी के वोट काट रहे हैं। उन्होंने पांच सवाल दागे: 1. जन सुराज का फंडिंग सोर्स क्या है? 2. अयोध्या रामी रेड्डी से 14 करोड़ रुपये क्यों लिए? 3. पार्टी के खाते में पैसा क्यों नहीं गया? 4. उदय सिंह और मनोज भारती को प्रेसिडेंट क्यों बनाया, ताकि जांच में बच सकें? 5. मेडिकल कॉलेज घोटाले में एनडीए नेताओं पर आरोप क्यों? जायसवाल ने दावा किया कि पीके ने पहले बीजेपी को मजबूत किया, अब विपक्ष की ‘बी-टीम’ बनकर कमजोर कर रहे हैं।
इसके जवाब में पीके ने 21 सितंबर को जहानाबाद के गांधी मैदान में ‘बिहार बदलाव जनसभा’ के बाद पत्रकारों से कहा, “मुझे नटवरलाल कहा जा रहा है? सड़क पर चलते हुए हर इंसान का जवाब देना जरूरी नहीं। जो सियार मरने से पहले शहर की ओर भागता है, उसे कौन पूछता है?” पीके ने जायसवाल पर भ्रष्टाचार का काउंटर अटैक किया। उन्होंने कहा, “बेतिया में संजय जायसवाल के पेट्रोल पंप पर नगर निगम के वाहनों की फर्जी बिलिंग से 5 करोड़ का घोटाला हुआ। मेयर गरिमा देवी ने अगस्त 2024 में ही म्युनिसिपल कमिश्नर को पत्र लिखा था कि पंप शिफ्ट करें और पेमेंट रोकें।” पीके ने चैलेंज दिया, “अगर मैं गलत हूं, तो केस दर्ज कराएं और मुझे जेल भेज दें। उनके पिता मदन जायसवाल सम्मानित थे, लेकिन बेटा ने बदनाम कर दिया।” उन्होंने एनडीए नेताओं—उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, ग्रामीण विकास मंत्री अशोक चौधरी और जायसवाल—पर मेडिकल कॉलेज और फ्लाईओवर घोटालों के सबूत पेश किए। पीके ने पीएम मोदी के पूर्णिया दौरे पर भी तंज कसा, “पीएम आते हैं, कुछ नहीं देते। गरीबों का पैसा फिजूलखर्ची में उड़ा देते हैं।”
आरजेडी ने जायसवाल के आरोपों को खारिज करते हुए पीके को ‘बीजेपी की बी-टीम’ कहा। प्रवक्ता एजाज अहमद ने बोला, “लालू जी ऐसे लोगों से दूरी रखते हैं। प्रशांत बीजेपी का वोट काटने का खेल खेल रहे हैं।” बीजेपी ने पीके के आरोपों को ‘झूठा प्रचार’ बताते हुए लीगल नोटिस भेजने की धमकी दी। पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष जायसवाल ने कहा, “पीके की यात्रा फेल हो रही है, इसलिए हताश होकर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं।” जन सुराज की ‘बिहार बदलाव यात्रा’ में अब तक 10 लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया, लेकिन फंडिंग विवाद ने पार्टी की छवि पर सवाल खड़े कर दिए।
यह विवाद बिहार चुनावी दंगल को रोमांचक बना रहा है। इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे के बीच जन सुराज तीसरा विकल्प बनने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पीके का पलटवार बीजेपी को बैकफुट पर ला सकता है, लेकिन फंडिंग के सबूत न देने पर खुद पर सवाल उठेंगे। क्या यह जंग कोर्ट तक पहुंचेगी? बिहार की सियासत में सबकी नजरें टिकी हैं।
