राजनीति

राहुल गांधी के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा: ‘इंडियन स्टेट से लड़ाई’ बयान पर लखनऊ कोर्ट में याचिका, कोर्ट ने दर्ज किया केस

राहुल गांधी के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा: ‘इंडियन स्टेट से लड़ाई’ बयान पर लखनऊ कोर्ट में याचिका, कोर्ट ने दर्ज किया केस

लखनऊ: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर एक बार फिर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह याचिका वकील नृपेंद्र पांडेय ने 9 सितंबर को दाखिल की थी, जिसमें राहुल के हालिया विवादास्पद बयान को देश की एकता के खिलाफ साजिश करार दिया गया है। कोर्ट ने 1 अक्टूबर को बयानों की दर्ज करने की तारीख तय की है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।

याचिका का केंद्र बिंदु राहुल गांधी का जनवरी 2025 में दिया गया बयान है, जिसमें उन्होंने कहा था, “हम इंडियन स्टेट से लड़ाई लड़ रहे हैं।” याचिकाकर्ता का दावा है कि यह बयान न केवल राष्ट्रविरोधी है, बल्कि भारत की संप्रभुता, अखंडता और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने वाली सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। पांडेय ने कोर्ट से मांग की है कि भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 152 (राष्ट्रद्रोह) और षड्यंत्र संबंधी धाराओं के तहत राहुल को तलब किया जाए। याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, प्रियंका वाड्रा, केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश को भी आरोपी बनाया गया है, आरोप है कि उन्होंने इस बयान को बढ़ावा दिया।

यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब याद किया जाए कि राहुल गांधी पहले भी राष्ट्रद्रोह के आरोपों का सामना कर चुके हैं। 2019 में कोव्वूरु मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दी थी, लेकिन अब यह नया मोर्चा खुल गया है। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की “देशविरोधी मानसिकता” का प्रमाण बताते हुए हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “राहुल का यह बयान गृहयुद्ध को न्योता दे रहा है, कानून अपना काम करेगा।” वहीं, कांग्रेस ने याचिका को “राजनीतिक साजिश” करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने ट्वीट किया, “बीजेपी की हार से बौखलाहट में ये कानूनी स्टंट। राहुल गांधी देशहित में बोलते हैं, न कि विभाजन फैलाते हैं।”

लखनऊ कोर्ट के इस फैसले ने राष्ट्रीय राजनीति को नई ऊंचाई दे दी है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है, जबकि सत्ताधारी दल इसे “राष्ट्रप्रेम की परीक्षा” बता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है, खासकर तब जब राष्ट्रद्रोह कानून को 2023 में संशोधित किया गया था। राहुल गांधी की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी ने कानूनी टीम गठित कर ली है।

यह घटना भारतीय लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक बयानों की सीमाओं पर बहस छेड़ रही है। क्या यह याचिका न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेगी या राजनीतिक दबाव का शिकार? आने वाले दिनों में इसका असर संसद सत्र पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें 1 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं।

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