सस्पेंस हुआ खत्म, शपथग्रहण के बाद नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं सुशीला कार्की
काठमांडू: नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने शुक्रवार को पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई। 73 वर्षीय कार्की नेपाल की पहली महिला नेता बन गईं, जो जेन-जेड युवा आंदोलन के बाद राजनीतिक संकट के बीच सत्ता संभाल रही हैं। शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में शाम 8:45 बजे आयोजित हुआ, जहां राष्ट्रपति पौडेल ने संविधान के तहत उन्हें पद सौंपा। इसके साथ ही संसद को भंग कर दिया गया, और छह महीने के भीतर नए आम चुनाव कराने का ऐलान किया गया। यह कदम भ्रष्टाचार, नेपोटिज्म और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के बाद आया है, जिसमें 34 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
सुशीला कार्की का चयन जेन-जेड कार्यकर्ताओं की पसंद पर आधारित था, जिन्होंने ऑनलाइन सर्वे के जरिए उनका नाम चुना। वे 2016 से 2017 तक नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं, और उनकी ईमानदारी तथा भ्रष्टाचार विरोधी छवि के लिए जानी जाती हैं। शपथ से पहले कार्की ने कहा, “अगर मेरे हाथ-पैर बंधे रहेंगे तो मैं पद नहीं संभालूंगी। भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच और पुलिस की अत्यधिक बल प्रयोग की जांच जरूरी है।” राष्ट्रपति पौडेल ने राजनीतिक दलों के नेताओं, सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल और अन्य विशेषज्ञों के साथ देर रात तक चर्चा की। जेन-जेड नेता अनिल बानिया ने कहा, “कार्की जी देश को नई दिशा देंगी। हम शांतिपूर्ण तरीके से नया नेपाल बनाएंगे।” दो अन्य मंत्रियों को भी शपथ दिलाई गई, जो अंतरिम सरकार का हिस्सा होंगे।
नेपाल में 4 सितंबर से शुरू हुए प्रदर्शन सोशल मीडिया बैन से भड़के, जो भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ फैल गए। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा, और सेना ने सुरक्षा की कमान संभाली। काठमांडू में आगजनी, लूटपाट और संसद पर कब्जे की घटनाओं से 31 अरब रुपये का नुकसान हुआ। जेन-जेड समूह ने संसद भंग, भ्रष्टाचार जांच और हिंदू राष्ट्र बहाली की मांग की। कार्की की नियुक्ति के बाद प्रदर्शनकारियों ने शांति की अपील की, लेकिन कुछ जगहों पर तनाव बरकरार है। सेना ने कर्फ्यू हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
भारत ने नेपाल की नई सरकार को बधाई दी है, लेकिन सीमा पर फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की। विशेषज्ञों का मानना है कि कार्की का नेतृत्व स्थिरता लाएगा, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच सहमति चुनौतीपूर्ण होगी। नेपाल आर्मी चीफ ने कहा कि सेना संवैधानिक ढांचे के तहत सहयोग करेगी। जेन-जेड नेता ओजस्वी आर्यल ने कहा, “कार्की जी युवाओं की आवाज हैं। छह महीने में चुनाव होंगे।” यह घटनाक्रम नेपाल की राजनीति में नया दौर शुरू कर रहा है, जहां युवा शक्ति बदलाव की अगुआई कर रही है। कुल मिलाकर, सुशीला कार्की की शपथ नेपाल के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।
