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नेपाल अशांति के बीच भारतीय सेना ने नेपाली गोरखा सैनिकों की छुट्टी बढ़ाई, यात्रा पर रोक लगाई

नेपाल अशांति के बीच भारतीय सेना ने नेपाली गोरखा सैनिकों की छुट्टी बढ़ाई, यात्रा पर रोक लगाई

नई दिल्ली: नेपाल में Gen-Z के नेतृत्व वाले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच भारतीय सेना ने नेपाली मूल के गोरखा सैनिकों की छुट्टी को बढ़ा दिया है और उनकी नेपाल यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला सैनिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जहां काठमांडू और अन्य शहरों में प्रदर्शन तेज हो चुके हैं। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लगभग 40,000 गोरखा सैनिकों में से सैकड़ों की छुट्टियां बढ़ाई गई हैं, ताकि वे नेपाल की अस्थिर स्थिति में फंस न जाएं। यात्रा प्रतिबंध 15 सितंबर तक लागू रहेगा, जब तक स्थिति सामान्य न हो।

नेपाल में सोमवार से चले आंदोलन ने भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया ब्लैकआउट और आर्थिक नीतियों के खिलाफ 19 मौतें और 300 से अधिक घायलों को जन्म दिया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, मंत्रियों के घरों और पार्टी कार्यालयों पर हमले किए, जिसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। गृह और कृषि मंत्री ने भी त्यागपत्र दिए। काठमांडू एयरपोर्ट को मंगलवार को बंद करना पड़ा था, जो अब खुल चुका है, लेकिन सड़कें और हाईवे ब्लॉक हैं। भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों को यात्रा न करने की सलाह दी है।

गोरखा सैनिक, जो ब्रिटिश और भारतीय सेनाओं में 200 साल से सेवा दे रहे हैं, नेपाल के गोरखा समुदाय से आते हैं। भारत में 1st, 5th, 8th और 9th गोरखा राइफल्स जैसे रेजिमेंट्स में वे तैनात हैं। सेना ने कहा, “गोरखाओं की वीरता हमारी ताकत है, लेकिन उनकी सुरक्षा प्राथमिकता है।” छुट्टी पर गए सैनिकों को तुरंत भारत लौटने का निर्देश दिया गया है, और परिवारों को वित्तीय सहायता का आश्वासन दिया गया। नेपाली सेना ने भी भारतीय समुदाय की सुरक्षा का भरोसा दिया है।

यह कदम भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने का संकेत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से बात की, जहां सहायता का वादा किया। नेपाल में 70,000 से अधिक भारतीय रहते हैं, जिनमें पर्यटक और मजदूर शामिल हैं। Gen-Z आंदोलन ने सुशीला कार्की को अंतरिम पीएम बनाने की मांग की है, जबकि बालेन शाह ने पद ठुकरा दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि अशांति नेपाल की राजनीति बदल सकती है, लेकिन भारत की सीमा सुरक्षा पर असर पड़ेगा। सेना ने गोरखाओं के लिए हेल्पलाइन जारी की है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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