सुशीला कार्की के हाथों में होगी नेपाल की सत्ता, बालेन शाह को पीछे छोड़ बनी Gen-Z की पहली पसंद
नेपाल में Gen-Z के नेतृत्व वाले बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक उथल-पुथल तेज हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अंतरिम प्रधानमंत्री के चयन की प्रक्रिया में सुशीला कार्की का नाम जोर पकड़ रहा है। नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं कार्की को Gen-Z आंदोलनकारियों ने समर्थन दिया है, जबकि काठमांडू मेयर और युवाओं के चहेते बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की पेशकश ठुकरा दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कार्की का चयन देश में स्थिरता ला सकता है, लेकिन संसदीय समर्थन जुटाना चुनौतीपूर्ण होगा।
Gen-Z आंदोलन, जो सोमवार से भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया प्रतिबंध और आर्थिक नीतियों के खिलाफ चल रहा है, ने 19 मौतों और 300 से अधिक घायलों के बावजूद जोर पकड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन और मंत्रियों के घरों पर हमले किए, जिसके बाद ओली सरकार गिर गई। गृह मंत्री और कृषि मंत्री ने भी इस्तीफा दे दिया। आंदोलन के नेताओं ने बालेन शाह को अंतरिम पीएम बनाने की मांग की थी, क्योंकि वे काठमांडू में अपनी ईमानदार छवि के लिए युवाओं के फेवरेट हैं। लेकिन शाह ने कई कोशिशों के बावजूद कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। एक सोशल मीडिया पोस्ट में शाह ने कहा, “मैं मेयर के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा हूं, राजनीतिक कुर्सी की दौड़ में नहीं हूं।” Gen-Z ने ऑनलाइन पेटिशन शुरू की, जिसमें 5,000 से अधिक युवाओं ने शाह का समर्थन किया, लेकिन उनकी चुप्पी से निराश होकर अब फोकस सुशीला कार्की पर शिफ्ट हो गया।
सुशीला कार्की, जो 2016-2019 तक मुख्य न्यायाधीश रहीं, को Gen-Z ने ‘ईमानदार और निष्पक्ष’ नेता के रूप में चुना। आंदोलनकारियों ने उनकी ओर से मांगे गए 1,000 सिग्नेचरों पर 2,500 से अधिक हस्ताक्षर जुटा लिए। एक युवा नेता ने कहा, “कार्की जी महिलाओं और युवाओं के अधिकारों की रक्षा करेंगी। बालेन भाई ने समर्थन दिया है।” बालेन शाह ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कार्की को अंतरिम पीएम के रूप में समर्थन की पुष्टि की। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) और अन्य दलों के बीच गठबंधन की कोशिशें चल रही हैं, जहां कार्की को सर्वसम्मति उम्मीदवार बनाने की चर्चा है। राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी को जल्द फैसला लेना होगा।
यह बदलाव नेपाल की राजनीति में युवा शक्ति का प्रतीक है। Gen-Z ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और X पर अभियान चलाकर दबाव बनाया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और चीन नजर रखे हुए हैं, क्योंकि नेपाल की अस्थिरता सीमा क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है। काठमांडू एयरपोर्ट फिर से खुलने के बाद भारतीय पर्यटक लौट रहे हैं, लेकिन प्रदर्शन जारी हैं। यदि कार्की कमान संभालती हैं, तो यह नेपाल का पहला Gen-Z समर्थित नेतृत्व होगा। संसद की विशेष बैठक में चयन की उम्मीद है, लेकिन विपक्षी दलों की आपत्तियां बाधा बन सकती हैं।
