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नेपाल में सियासी भूचाल: PM ओली के बाद राष्ट्रपति पौडेल ने भी दिया इस्तीफा, काठमांडू में प्रदर्शनकारियों की ‘विजय परेड’

नेपाल में सियासी भूचाल: PM ओली के बाद राष्ट्रपति पौडेल ने भी दिया इस्तीफा, काठमांडू में प्रदर्शनकारियों की ‘विजय परेड’

नेपाल में ‘Gen-Z क्रांति’ ने इतिहास रच दिया। सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ युवा आंदोलन इतना उग्र हो गया कि पहले प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और फिर राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को इस्तीफा देना पड़ा। काठमांडू की सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारी ‘विजय परेड’ निकाल रहे हैं, नारे लगा रहे हैं, “लोकतंत्र जिंदाबाद, भ्रष्टाचार मुर्दाबाद!” इस अभूतपूर्व उथल-पुथल में 19 लोगों की मौत और 400 से अधिक घायल हुए हैं, लेकिन युवाओं का जोश सरकार को झुकाने में कामयाब रहा।

क्या हुआ काठमांडू में?

8 सितंबर को सरकार ने फेसबुक, X, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया, जिसे युवाओं ने अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करार दिया। सोमवार को काठमांडू, पोखरा और इटाहारी में प्रदर्शन शुरू हुए, जो पुलिस की गोलीबारी के बाद हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, मंत्रियों के घर और सरकारी कार्यालयों पर हमला बोला। मंगलवार सुबह बैन हटाने के बाद भी आंदोलन थमा नहीं, क्योंकि युवा भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और नेताओं की विलासिता के खिलाफ सड़कों पर डट गए।

ओली और पौडेल का इस्तीफा

तीन मंत्रियों—गृह मंत्री रमेश लेखक, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी और स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल—के इस्तीफे के बाद PM ओली ने मंगलवार दोपहर राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके कुछ घंटों बाद राष्ट्रपति पौडेल ने भी नैतिक आधार पर पद छोड़ दिया, क्योंकि उनके आवास पर भीड़ ने आगजनी की थी। ओली ने इस्तीफे में कहा, “देश में शांति और संवैधानिक प्रक्रिया के लिए यह कदम जरूरी था।” पौडेल ने बयान जारी कर युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील की।

‘Gen-Z क्रांति’ की जीत

18-30 साल के युवाओं ने इस आंदोलन को ‘Gen-Z क्रांति’ का नाम दिया। काठमांडू में प्रदर्शनकारी ढोल-नगाड़ों और राष्ट्रीय झंडों के साथ सड़कों पर उतरे, नारे लगाते हुए, “नेपाल हमारा है, भ्रष्टाचार नहीं चलेगा।” सोशल मीडिया पर #NepoKids और #GenZRevolution ट्रेंड कर रहा है, जिसमें नेताओं के बच्चों की विलासिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। 19.2% युवा बेरोजगारी और 1447 डॉलर प्रति व्यक्ति GDP वाले नेपाल में यह आंदोलन गहरी नाराजगी का प्रतीक बन गया है।

आगे क्या?

नेपाली कांग्रेस और माओवादी सेंटर ने नए चुनाव की मांग की है। गृह मंत्रालय ने हिंसा की जांच के लिए समिति गठित की है, लेकिन काठमांडू में कर्फ्यू और सेना की तैनाती बरकरार है। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बंद है, और भारत ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। यह आंदोलन नेपाल की राजनीति में नई पीढ़ी की ताकत दिखा रहा है, जो स्थायी बदलाव की मांग कर रही है।

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